भविष्य में नहीं रहेंगे केले

क्या आप सोच सकते हैं कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब केले सिर्फ किस्से कहानियों में ही बचेंगे? लगता है वह दिन अब बहुत दूर नहीं है.

नीदरलैंड्स के रिसर्चरों ने एक नया शोध किया है जिसके अनुसार भविष्य में केले की सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली किस्म लुप्त हो जाएगी. इसे कैवेंडिश कहा जाता है. रिसर्चरों के अनुसार "पनामा डिजीज" इन्हें पूरी तरह नष्ट कर देगा.

1960 के दशक में इस बीमारी के कारण "ग्रॉस मिशेल" नाम की केले की किस्म को भारी नुकसान हुआ था. दरअसल केले के पौधे को यह बीमारी फंगस के लगने से होती है. टीआर4 नाम का फंगस केलों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है. वैज्ञानिकों को डर है कि जल्द ही यह फंगस लातिन अमेरिका तक पहुंच जाएगा. यहीं दुनिया के 80 फीसदी कैवेंडिश केले उगाए जाते हैं.

टीआर फंगस की पहचान पहली बार 1994 में हुई. ताइवान में केलों के खेत खराब होने पर जब शोध हुआ, तब तीन दशक बाद जा कर उसकी असली वजह, टीआर फंगस का पता चला. टीआर4 एक ऐसा फंगस है जो 30 साल तक मिट्टी में बिना किसी हरकत के रह सकता है और फिर अचानक से सक्रिय हो कर पूरे खेत को नुकसान पहुंचाता है. ये पौधे को इस हद तक सुखा देता है कि वह पानी की कमी से मर जाता है. ताइवान के बाद यह पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशिया में फैला. 2013 के बाद से यह जॉर्डन, लेबनान, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में भी पाया गया है.

बाजार में उपलब्ध केलों को जिस तरह से उगाया जाता है, उनमें खुद को बीमारियों से बचाने की क्षमता काफी कम होती है. इसीलिए वैज्ञानिकों को डर है कि ये केले खुद को फंगस से बचा नहीं पाएंगे और इनका पूरी तरह सफाया हो जाएगा. दुनिया से केलों का नामोनिशान मिट जाए, इससे पहले ही वे ऐसी नई किस्म बनाना चाहते हैं जिसकी रोग प्रतिरोधी क्षमता अच्छी हो. रिपोर्ट में लिखा गया है, "1960 के दशक में कैवेंडिश ने ग्रॉस मिशेल की जगह ली थी. अब हमें एक नई किस्म की जरूरत है जो कैवेंडिश की जगह ले सके."

लेकिन इसके लिए नए सिरे से काम करना होगा. इसमें भारी निवेश की भी जरूरत पड़ेगी और अंत में केले की इस नई किस्म की कीमतें भी काफी ज्यादा होंगी. हालांकि इस पर काम शुरू होना अभी बाकी है. अगर वक्त रहते कुछ नहीं किया गया, तो भविष्य में केले सिर्फ किस्से कहानियों में ही नजर आया करेंगे.

खायें लेकिन संभलकर

सेब

एक सेब रोज, यह सलाह हर कोई देता है. लेकिन इसके बीज नहीं खाने चाहिए. सेब के बीज में एमिगडलिन होता है. पाचक रसों से मिलने पर यह हाइड्रोजन साइनाइड बना सकता है. इसीलिए बेहतर है कि सेब खाएं और उसके बीज नहीं.

खायें लेकिन संभलकर

आलू

बहुत ही लंबे समय तक रखे गए आलू को खाने से बचें. आलू के अंकुर में विषैला ग्लाइकोएल्केलायड होता है. कच्चे और हरे आलू को भी न खाएं. उसमें सोलैनिन होता है जो सेहत के लिए अच्छा नहीं होता.

खायें लेकिन संभलकर

फुगु मछली

जापान में फुगु मछली को लजीज माना जाता है. लेकिन इसे पकाने में बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है. इस मछली के लिवर में टेट्रोडोटॉक्सिन होता है. यह साइनाइड से 1,200 गुना ज्यादा जहरीला होता है.

खायें लेकिन संभलकर

टमाटर

हरे टमाटर नहीं खाने चाहिए. इनमें भी सोलैनिन होता है. इसका सेवन करने से सिरदर्द और उल्टी की शिकायत हो सकती है.

खायें लेकिन संभलकर

जायफल

इसकी चुटकी भर मात्रा नुकसान नहीं पहुंचाती. लेकिन अगर एक बार में चार ग्राम से ज्यादा जायफल खाया जाए तो नाक बहने और सिरदर्द होने की समस्या हो सकती है. असल में जायफल में एलेमिसिन, मिरिस्टिसिन और सैफरोल तत्व होते हैं जो नशीले भी होते हैं.

खायें लेकिन संभलकर

बादाम

बहुत ज्यादा मात्रा में जंगली बादाम खाने से बचना चाहिए. ज्यादा सेवन से शरीर पर विषैला असर होता है. बादाम अगर कड़वा हो, तो ना खाएं.

खायें लेकिन संभलकर

जैतून का तेल

इसके कई फायदे हैं. लेकिन छोंक लगाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. 180 डिग्री से ज्यादा गर्म होने पर ओलिव ऑयल के तत्व विषैले कपाउंड में बदलने लगते हैं.

खायें लेकिन संभलकर

ब्रेड

ब्रेड कई प्रकार की होती है. इन्हें आटे या मैदे से बनाया जाता है. लेकिन गूंथे हुए मैदे पर खमीर चढ़ने के दौरान पोटेशियम ब्रोमेट बनता है. हालांकि ब्रेड बनाने के दौरान यह ब्रोमेट ब्रोमाइड में बदल जाता है. लेकिन अगर ब्रेड बनाने में सावधानी न बरती जाए तो ब्रोमेट बरकरार रहता है और ट्यूमर जैसी घातक बीमारी दे सकता है.

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