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भारतीयों के साथ विदेशियों को भी रूला रहा प्याज

१९ नवम्बर २०१९

भारत में प्याज की कीमत इस महीने पिछले छह साल के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई थी. भारत से निर्यात रोके जाने की वजह से एशिया के दूसरे देशों में भी कीमतें बढ़ी हैं. फरवरी महीने के बाद निर्यात से रोक हट सकती है.

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Indien | Zwiebeln auf einem Markt in Kalkutta
तस्वीर: picture alliance/Xinhua News Agency/T. Mondal

भारत में प्याज की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए सरकार इसके निर्यात पर फरवरी महीने तक रोक जारी रख सकती है. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि बेमौसम बारिश से गर्मी में बोई जाने वाली प्याज की फसल बर्बाद होने और बाजार में देरी से पहुंचने के कारण इसकी कीमतों में काफी इजाफा हुआ है. भारत दुनिया में प्याज का एक बड़ा निर्यातक देश है. भारत से विदेशों में प्याज के निर्यात पर रोक लगाए जाने से एशिया के दूसरे देशों में इसकी कीमतें बढ़ी रहेंगी. नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका को अपने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए किसी दूसरे माध्यम की तलाश करनी होगी.

सितंबर से ही भारत ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. लेकिन अक्टूबर और नवंबर माह में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से बाजार में प्याज पहुंचने में देरी हुई. इस वजह से प्याज के दाम काफी बढ़ गए. बारिश की वजह से भारत में सबसे बड़ा प्याज उगाने वाले राज्य महाराष्ट्र पर काफी ज्यादा असर हुआ है. नेशनल हॉर्टिकल्चर रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार इस महीने की शरुआत में प्याज की कीमत 55 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी जो पिछले छह साल में सबसे ज्यादा थी. हालांकि अब इसकी कीमतें थोड़ी कम हुई है और 40 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है.

भारत के उपभोक्ता मामलों के विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, "एक बार जब प्याज की कीमतें देश में कम हो जाती है तब हम इसके निर्यात के बारे में सोचेंगे. फिलहाल यह संभव नहीं है. जनवरी महीने से प्याज की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है. एक बार जब कीमत 20 रुपये प्रति किलो से कम हो जाएगी तब इसके निर्यात की इजाजत दी जाएगी." हालांकि भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता से जब पूछा गया कि प्याज निर्यात पर लगी रोक कब समाप्त होगी तो उन्होंने इस सवाल पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी. उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुरोध पर ही वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यात पर रोक लगाई है.

Kamerun Zwiebelmarkt in Yaounde
तस्वीर: picture alliance/dpa/J. P. Kepseu

प्याज उत्पादकों और सरकारी अधिकारियों को उम्मीद थी कि गर्मी के मौसम में बोई जाने वाली फसल की आपूर्ति की वजह से नवंबर के मध्य तक प्रतिबंध हटा लिया जाएगा. 78 वर्षीय सखाराम दरेकर महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से 180 किलोमीटर दूर स्थित गांव घोडेगांव के किसान हैं. वे बताते हैं, "पिछले महीने भारी बारिश की वजह से खेतों में कई दिनों तक पानी जमा रह गया था. इससे 2 एकड़ में लगी उनकी प्याज की तैयार फसल बर्बाद हो गई." बारिश की वजह से सर्दियों में बोई जाने वाली फसल में भी देरी हुई. नासिक जिले के रहने वाले किसान दिनेश खैरनार कहते हैं, मैं प्याज की खेती करना चाहता हूं लेकिन बीज नहीं मिल रहे हैं." बारिश की वजह से नर्सरियों में रखे बीज भी बर्बाद हो गए.

भारत से निर्यात पर रोक लगाए जाने की वजह से दूसरे एशियाई देशों में प्याज की कीमतें बढ़ी हैं. बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे बड़े खरीदार प्याज के लिए म्यांमार, मिस्र, तुर्की और चीन का रुख कर रहे हैं. भारत प्रत्येक साल 20 लाख टन से ज्यादा प्याज निर्यात करता है. ऐसे में इतने प्याज का आयात करना इन देशों के लिए आसान नहीं होगा. मुंबई स्थित एक निर्यातक ने बताया, "चीन और मिस्र भारत जितनी आपूर्ति नहीं कर सकते हैं. एशिया के खरीदार अभी भी भारतीय आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं."

आरआर/एनआर (रॉयटर्स)

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