भारत जैसे देशों में दुनिया के आधे भूखे लोग

दुनिया के करीब आधे भूखे लोग ब्राजील, चीन, भारत, इंडोनेशिया और मेक्सिको जैसे बढ़ते मध्यआय वाले देशों में रह रहे हैं. यूएन की रिपोर्ट दिखाती है कि दुनिया में भुखमरी के शिकार करीब 36.3 करोड़ लोग इन्हीं देशों में रहते हैं.

वॉशिंगटन स्थित इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (इफप्री) की 2015 ग्लोबल फूड पॉलिसी रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सारे वे विकासशील देश हैं जो "उभरती हुई आर्थिक शक्तियां" हैं. इन देशों में पोषण और स्वास्थ्य के हालात सुधारने के लिए खाद्य व्यवस्था की स्थिति को बदलने की कोशिशें होनी चाहिए. इफप्री के महानिदेशक शेंगेन फान बताते हैं, "यह विरोधाभासी लग सकता है लेकिन असल में ये बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाएं पूरी दुनिया भर में पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं."

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि स्वच्छता और पोषण के बीच सीधा संबंध होता है. बांग्लादेश से मिले साक्ष्य दिखाते हैं कि लगभग समान आर्थिक स्तर वाली आबादी के बीच "जिन क्षेत्रों में खुले में शौच करने वालों की संख्या में गिरावट आई वहां छोटे कद के बच्चों की संख्या में भी बहुत कमी दिखाई दी." रिसर्च से यह साफ होता है कि लोगों के पोषण पर असर डालने वाले ऐसे कई कारक हैं जिनका संबंध भोजन और कृषि के अलावा पीने के पानी, स्वच्छता, महिलाओं की भूमिका और देखभाल से है.

इसके अलावा रिपोर्ट इस ओर भी ध्यान दिलाती है कि छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी खाद्य उत्पादों का नियामन कितना जरूरी है. स्टडी दिखाती है कि इस बात के पक्के प्रमाण हैं कि पूरे मध्यपूर्व में जारी राजनैतिक अस्थिरता के पीछे खाद्य असुरक्षा भी एक कारण था. मध्यपूर्व विवाद के खाद्य सुरक्षा पर असर के बारे में इफप्री के वरिष्ठ रिसर्च फेलो क्लीमेंस ब्रीसिंगर ने बताया कि राजनीतिक अस्थिरता और विवादों का नैसर्गिक नतीजा अक्सर खाद्य संकट के रूप में दिखता है. 2011 से राजनीतिक अस्थिरता की चपेट में आए सीरिया, इराक और यमन जैसे तमाम देशों में खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे लोगों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी आई है. ब्रीसिंगर बताते हैं, "नई रिसर्च दिखाती है कि खाद्य असुरक्षा भी तनाव भड़का सकती है, खास तौर पर ऐसे देशों में जहां खाने की चीजों का आयात अधिक होता हो क्योंकि आयातित चीजों के दामों पर वैश्विक खाद्य मूल्यों का असर पड़ता है." इस लिहाज से यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है कि अरब देश अपनी जरूरत का करीब आधा खाना बाहर से ही आयात करते हैं.

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों और खाद्य मूल्यों में भी गहरा संबंध पाया गया. रिसर्च बताती है कि "हमारा आधुनिक वैश्विक खाद्य तंत्र तेल पर बहुत ज्यादा निर्भरता वाला है." खाद्य उत्पादन से लेकर उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने तक ईंधन के रूप तेल की ही जरूरत होती है, जो कि कुल शिपिंग कीमत का करीब 50 से 60 फीसदी होता है. इस तरह खान पान की चीजों की कीमत से तेल की कीमतों का सीधा संबंध दिखाई देता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि जैसे जैसे इन ईंधनों की मांग कम होगी, वैसे वैसे खान पान की चीजों के दाम भी कम होंगे और अधिक से अधिक लोगों को खाना मिल पाएगा.

आरआर/ओएसजे (आईपीएस)

भारत में व्याप्त गंभीर कुपोषण

आई थोड़ी बेहतरी

अगर पूरी दुनिया की बात करें तो हालात पहले से कुछ अच्छे हुए हैं. 2014 में दुनिया भर में साढ़े अस्सी करोड़ ऐसे लोग हैं जिनके पास पर्याप्त खाना नहीं है. वहीं करीब दो अरब लोग कुपोषित हैं.

भारत में व्याप्त गंभीर कुपोषण

तीन बिंदु हैं अहम

पांच साल से कम उम्र में बच्चों की मृत्यु, उनमें कुपोषण और कुल जनसंख्या में कुपोषण की संख्या को आंका जाता है और उसका विश्लेषण किया जाता है. एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि केवल पेट भरना पोषण नहीं है.

भारत में व्याप्त गंभीर कुपोषण

जागरूकता जरूरी

अक्सर माता पिता को यह पता ही नहीं होता कि उनके बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. अंधविश्वास के कारण वह इसे श्राप मानते रहते हैं और डॉक्टर की बजाए नीम हकीम से काम चलाते हैं.

भारत में व्याप्त गंभीर कुपोषण

मध्यप्रदेश की स्थिति

कुपोषण के मामले में देश में मध्यप्रदेश की स्थिति बहुत खराब है. कुपोषित बच्चों के लिए खास केंद्र बनाए गए हैं, जहां मां और बच्चों को समुचित आहार दिया जाता है.

भारत में व्याप्त गंभीर कुपोषण

लापरवाही

खरगोन में जन साहस नाम के गैर सरकारी संगठन के लिए काम करने वाली जासमीन खान बताती हैं कि अक्सर डॉक्टर इलाज के लिए मौजूद नहीं होते और मुश्किल में पड़े लोगों को मदद मिलने में देर हो जाती है.

भारत में व्याप्त गंभीर कुपोषण

परिवार की मनाही

गरीबी के कारण खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करने वाली महिलाएं परेशानी में आ जाती हैं. वे जानती हैं कि उनका बच्चा बीमार है लेकिन अक्सर परिजन ही उन्हें सहायता केंद्र जाने से रोक देते हैं.

भारत में व्याप्त गंभीर कुपोषण

मुश्किल में माएं

सोनू की मां रुना (तस्वीर में) अपनी बच्ची के कुपोषण को लेकर असमंजस में हैं. सहायता केंद्र में रहे तो मजदूरी जाती है और मजदूरी करे तो बच्ची बीमार. ऐसे कई परिवार हैं, जिन्हें सही जानकारी दिए जाने की जरूरत है.

भारत में व्याप्त गंभीर कुपोषण

कुछ अच्छा भी

ये सही है कि दुनिया में भुखमरी का आंकड़ा कम हुआ है. मगर इराक जैसे देशों में अस्थिरता और युद्ध के कारण यह बढ़ा भी है. कोमोरोस, बुरुंडी और स्वाजीलैंड में भी भुखमरी बढ़ी है.

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