मस्जिदों को मिलने वाली विदेशी मदद पर जर्मनी कस रहा है लगाम

जर्मन सरकार ने देश की मस्जिदों को आर्थिक मदद देने वाले देशों से आग्रह किया है कि वे ऐसी किसी भी रकम के बारे में जर्मन अधिकारियों को बताएं. इस कदम से जर्मन मस्जिदों में कट्टरपंथ को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है.

जर्मन विदेश मंत्रालय चाहता है कि सऊदी अरब, कतर, कुवैत और दूसरे खाड़ी देशों से अगर जर्मनी में मौजूद मस्जिदों को कोई मदद भेजी जाती है, तो इसका ब्यौरा दर्ज किया जाए.

जर्मन अखबार ज्यूडडॉयचे त्साइटुंग और जर्मनी के सरकारी प्रसारकों डब्ल्यूडीआर और एनडीआर की रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार ने घरेलू और विदेशी खुफिया सेवाओं से इस बात पर नजर रखने को कहा है कि कौन मदद भेज रहा है और वह किसको मिल रही है.

रिपोर्टों के मुताबिक इस निर्देश पर पहले ही अमल होना शुरू हो गया है. नवंबर में बर्लिन में हुई जर्मनी की इस्लाम कांफ्रेंस में जर्मन गृह मंत्री होर्स्ट जेहोफर ने कहा था कि वह जर्मनी की मस्जिदों में "विदेशी प्रभाव" को कम करेंगे.

बताया जा रहा है कि कुवैत के साथ सहयोग के अच्छे नतीजे मिलने शुरू भी हो गए हैं जबकि अन्य देश इस बारे में सहयोग करने से हिचक रहे हैं.

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दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिदें

जुमा मस्जिद, मॉस्को

मॉस्को की केंद्रीय मस्जिद जुमा मस्जिद या कैथीड्रल मस्जिद के नाम से भी जानी जाती है. 1904 में बनी यह मस्जिद यूरोप की सबसे बड़ी मस्जिदों में शामिल है और जीर्णोद्धार के बाद यहां 10,000 लोग एक साथ नमाज पढ़ सकते हैं.

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अल हरम मस्जिद, मक्का

इस्लाम धर्म की सबसे महत्वपूर्ण और साढ़े तीन लाख वर्गमीटर में फैली दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद है अल हरम. मूल रूप से 16वीं सदी में बनी इस मस्जिद में 9 मीनारें हैं. मस्जिद के अंदर काबा है जो इस्लाम का मुख्य पवित्रस्थल है.

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पैगंबर मस्जिद, मदीना

मक्का की अल हरम मस्जिद के बाद मदीने की मस्जिद इस्लाम का दूसरी सबसे पवित्र स्थल है. यहां पैगंबर मुहम्मद की कब्र है. यह मस्जिद 622 ईस्वी में बनी थी. इस मस्जिद में 600,000 श्रद्धालु एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं.

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अल अक्सा मस्जिद, येरूशलम

येरूशलम में टेंपल माउंट पर स्थित अल अक्सा मस्जिद 5,000 जगहों के साथ दुनिया की छोटी मस्जिदों में शुमार होती है, लेकिन सोने के गुंबद वाली 717 ईस्वी में बनी यह मस्जिद विश्वविख्यात है और इस्लाम की तीसरी सबसे महत्वपूर्ण मस्जिद है.

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हसन मस्जिद, कासाब्लांका

सीधे अटलांटिक सागर तट पर बनी मस्जिद का नाम मोरक्को के पूर्व शाह हसन द्वितीय के नाम पर है. इसे 1993 में उनके जन्म की 60 वीं सालगिरह पर बनाया गया था. इसकी 210 मीटर ऊंची मीनार मस्जिदों में विश्व रिकॉर्ड बनाती है.

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शेख जायद मस्जिद, अबू धाबी

इस मस्जिद का उद्घाटन 2007 में हुआ. यह दुनिया की 8वीं सबसे बड़ी मस्जिद है. यह 224 मीटर लंबे और 174 मीटर चौड़े इलाके पर बनी है और मीनारों की ऊंचाई 107 मीटर है. मुख्य गुंबद का व्यास 32 मीटर है जो विश्व रिकॉर्ड है.

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जामा मस्जिद, दिल्ली

मुगल सम्राट शाह जहां द्वारा बनवाई गई जामा मस्जिद भारत की प्रसिद्ध मस्जिदों में शामिल है. 1656 में बनकर पूरी हुई पुरानी दिल्ली की यह मस्जिद दुनिया की 9वीं सबसे बड़ी मस्जिद है. यहां 25,000 लोग एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं.

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रोम की मस्जिद

कैथोलिक धर्म की राजधानी कहे जाने वाले रोम में भी एक विशाल मस्जिद है. 30,000 वर्गमीटर जगह वाली यह मस्जिद यूरोप की सबसे बड़ी मस्जिद होने का दावा करती है. दस साल में बनी इस मस्जिद का उद्घाटन 1995 में किया गया था.

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अखमत कादिरोव मस्जिद, ग्रोज्नी

यह मस्जिद भूतपूर्व मुफ्ती और चेच्न्या के राष्ट्रपति रहे कादिरोव के नाम पर बनी है. वे 2004 में एक हमले में मारे गए थे. मस्जिद का निर्माण कार्य चेच्न्या युद्ध के कारण कई बार रोकना पड़ा. इसे 2008 में आम लोगों के लिए खोला गया.

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कुल शरीफ मस्जिद, कजान

इस मस्जिद का नाम रूसी अधिग्रहण से पहले कजान के आखिरी इमाम के नाम की याद दिलाता है. पड़ोस में स्थित कैथीड्रल के साथ इसे तातर जाति के मुसलमानों और ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों के शांतिपूर्ण सहजीवन का सूत माना जाता है.

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इस बीच, जर्मनी में मुसलमानों पर मस्जिद टैक्स लगाने की बातें भी चल रही हैं ताकि उससे मस्जिदों की फंडिग हो सके. जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में ईसाईयों से चर्च टैक्स लिया जाता है, जिसके चर्चों की आर्थिक जरूरतें पूरी होती हैं. जानकारों का कहना है कि मुसलमानों पर इस तरह का मस्जिद टैक्स लगाने पर मस्जिदों पर विदेशी प्रभाव को घटाने में मदद मिलेगी.

जर्मनी के संयुक्त आतंकवाद विरोधी सेंटर (जीटीएजेड) की रिपोर्टों के आधार पर सरकार 2015 से जर्मनी में "अरब खाड़ी देशों से आए सलाफी मिशनरियों की गतिविधियों" की निगरानी कर रही है. 2015 में लाखों शरणार्थी जर्मनी आए थे. 

जीटीएजेड का कहना है कि कट्टरपंथी इस्लामी समूहों को प्रभावित करना सऊदी अरब जैसे देशों की "दीर्घकालिक रणनीति" रही है. हालांकि सऊदी अरब इससे इनकार करता है. जर्मन खुफिया एजेंसियों का कहना है कि खाड़ी देशों से आने वाले "मिशनरी समूह" जर्मनी और यूरोप में सलाफियों से जुड़ रहे हैं.

जर्मन प्रसारकों की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे कोई विश्वसनीय आंकड़े मौजूद नहीं है, जिनसे पता चले कि खाड़ी देशों से जर्मनी में सक्रिय कट्टरपंथी समूहों को कितना धन भेजा गया है.

निकोल गोएबेल/एके

जर्मनी की सबसे बड़ी और सबसे विवादित मस्जिद

फूल की कली

मस्जिद के निर्माण में कांच का इस्तेमाल खुलेपन का संदेश देने के लिए किया गया है, ताकि सभी धर्मों के लोग यहां आ सकें. कांच और कंट्रीट से तैयार मस्जिद का गुंबद किसी फूल की कली जैसा लगता है. मस्जिद परिसर में 55 मीटर ऊंची दो मीनारें भी हैं.

जर्मनी की सबसे बड़ी और सबसे विवादित मस्जिद

अलग अलग संस्कृतियां

मस्जिद कोलोन शहर के एरेनफेल्ड इलाके में है. यह इलाका कभी कामगार तबके के लोगों का गढ़ था. लेकिन अब इस इलाके में नामी गिरामी कलाकार रहते हैं. यहां कई मशहूर गैलरियां और थिएटर हैं. यहां रहने वाले 35 प्रतिशत लोग विदेशी मूल के हैं.

Modell of the Mosque in a presentation

जर्मनी की सबसे बड़ी और सबसे विवादित मस्जिद

प्रभावशाली प्लान

मस्जिद के निर्माण में बहुत सारे मुस्लिम संगठनों ने मदद दी. इसके अलावा जर्मनी में तुर्क सरकार के धार्मिक मामलों के संगठन डिटिब से भी मदद मिली. कोलोन की नगरपालिका ने 2008 में इसे मंजूरी दी, हालांकि चांसलर मैर्केल की सीडीयू इसके खिलाफ थी.

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हट गए आर्किटेक्ट

के निर्माण का कॉन्ट्रैक्ट 2005 में जर्मन आर्किटेक्ट पॉल बोएम को मिला, जिन्हें चर्चों के निर्माण में महारथ है. उन्होंने इस इमारत को सहिष्णुता का प्रतीक समझा. लेकिन बाद में डिटिब के साथ उनके मतभेद हो गए और 2011 में वह इस प्रोजेक्ट से हट गए.

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2017 में खुले दरवाजे

मस्जिद के दरवाजे नमाजियों के लिए पहली बार 2017 में रमजान के महीने में खोले गए. लेकिन इसका आधिकारिक उद्घाटन तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोवान ने सितंबर 2018 में किया. हालांकि इस मौके पर शहर में एर्दोवान के विरोध और समर्थन में बड़ी रैलियां हुईं.

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1,200 नमाजियों के लिए जगह

मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए ग्राउंड के अलावा एक अपर फ्लोर भी है. यहां पर एक समय में 1,200 लोग नमाज पढ़ सकते हैं. यहां पर एक इस्लामी लाइब्रेरी भी है. यहां कई दुकानें और स्पोर्ट्स सेंटर भी हैं ताकि विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच आपसी संवाद को बढ़ाया जा सके.

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नई स्काईलाइन

शुरू में कई लोगों ने मस्जिद के निर्माण का विरोध किया था. उन्हें डर था ऊंची ऊंची मीनारों से "ईसाई शहर" कोलोन की स्काईलाइन बदल जाएगी. उस वक्त कोलोन के आर्कबिशप कार्डिनल योआखिम माइसनर ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी "असहजता" जाहिर की थी.

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मस्जिद का विरोध

धुर दक्षिणपंथियों ने इस मुद्दे को लपका और जर्मनी में मुसलमानों के घुलने मिलने को लेकर एक नई बहस छेड़ दी. लेखक राल्फ जोरडानो ने कहा कि यह मस्जिद "जर्मनी में तेजी से फैलते इस्लामीकरण की एक अभिव्यक्ति" होगी. मस्जिद के खिलाफ कई बड़े प्रदर्शन हुए.

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इमाम या जासूस?

2017 में जर्मन अधिकारियों ने डिटिब के इमामों की गतिविधियों को लेकर जांच शुरू की. तुर्की में शिक्षित इमाम तुर्की की सरकार के कर्मचारी होते हैं. मस्जिद के कर्मचारियों पर संदेह था कि वे तुर्की की सरकार को जर्मनी में रहने वाले तुर्कों के बारे में जानकारी देते हैं.

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