मार्टिन शुल्त्स: एर्दोवान के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं

जर्मन आम चुनावों के आठ दिन पहले एसपीडी उम्मीदवार मार्टिन शुल्त्स ने तुर्की के राष्ट्रपति की कड़ी आलोचना की है. डॉयचे वेले के साथ बातचीत में उन्होंने जरूरत पड़ने पर तुर्की के साथ हुई शरणार्थी संधि को तोड़ने का पक्ष लिया.

चुनाव प्रचार के बीच समय निकाल कर एसपीडी उम्मीदवार मार्टिन शुल्त्स ने डॉयचे वेले की मुख्य संपादक इनेस पोल और मॉडरेटर जाफर अब्दुल करीम को इंटरव्यू दिया. तुर्की के राष्ट्रपति की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि तुर्की में मानवाधिकारों की हालत गंभीर हैं, "यदि आप कल तुर्की जाते हैं और वहां से रिपोर्ट करते हैं तो मैं इस बात की गारंटी नहीं दे सकता कि आप जेल में नहीं पहुंचेंगे." उन्होंने कहा कि इस समय राष्ट्रपति रेचेप तैयब एर्दोवान से बात करने के कोई मायने नहीं हैं.

इससे पहले भी शुल्त्स तुर्की की सरकार के साथ यूरोपीय संघ की सदस्यता वार्ता रोकने का पक्ष ले चुके हैं. उन्होंने डॉयचे वेले के साथ बातचीत में जरूरत पड़ने पर तुर्की के साथ हुई शरणार्थी संधि को तोड़ने की भी बात कही है. उन्होंने कहा, "मैं एर्दोवान के सामने किसी भी हालत में घुटने नहीं टेकूंगा. हमें ब्लैकमेल होने की इजाजत नहीं देनी चाहिए."

यूरोपीय आप्रवासन कानून का समर्थन

मार्टिन शुल्त्स ने कहा है कि वह चांसलर बनने पर शरणार्थियों को लेने से मना करने वाले ईयू के सदस्य देशों के साथ भी दो टूक बात करेंगे. चांसलर पद के लिए एसपीडी उम्मीदवार ने हंगरी को धमकी दी है कि यूरोपीय संघ के बजट से उसे मिलने वाले आवंटन में संशोधन हो सकता है. अगले सात सालों में 900 अरब यूरो के बजट पर फैसला होना है. शुल्त्स ने कहा, "एकजुटता एक सिद्धांत है, वित्तीय मदद में भी, और शरणार्थियों को लेने के मामले में भी." एसपीडी उम्मीदवार ने यूरोप में तय कोटे के साथ आप्रवासन कानून बनाने का पक्ष लिया, लेकिन साथ ही कहा कि इस प्रक्रिया में शरणार्थी कानून में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यूरोप में शरणार्थियों की आमद रोकने के लिए अफ्रीकी देशों के साथ, गैर लोकतांत्रिक देशों के साथ भी सहयोग संभव है, लेकिन सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग और निगरानी में.

मुख्य संपादक इनेस पोल और जाफर अब्दुल करीम के साथ बातचीत

मैर्केल पर आरोप, बस काम चला रही हैं

चुनाव के हफ्ते भर पहले ज्यादातर जनमत सर्वेक्षणों में मार्टिन शुल्त्स चांसलर अंगेला मैर्केल और उनकी सीडीयू पार्टी से काफी पीछे चल रहे हैं. इसके बावजूद वह हार मानने को तैयार नहीं हैं और चांसलर पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते. उन्होंने कहा, "अंगेला मैर्केल बस काम चला रही हैं. इस सिद्धांत के साथ कि एक देश जिसमें हम अच्छी तरह रह रहे हैं. हां ये सच है. हम इस देश में अच्छी तरह और खुशी से जी रहे हैं, लेकिन हम कल भी अच्छी तरह और खुशी से जीना चाहते हैं. और इसीलिए लोगों को बताया जाना चाहिए कि हम कहां जा रहे हैं?"

शरणार्थी मुद्दे पर लोगों के बीच असुरक्षा के लिए चांसलर को जिम्मेदार ठहराते हुए शुल्त्स कहते हैं कि वह चांसलर होते तो नागरिकों को अपने फैसले का कारण बताते. "उसमें ऐसी बातें भी हो सकती हैं जो लोगों को पसंद नहीं आये. मैं कहता कि यह उसका सिर्फ एक हिस्सा है जो हमें आने वाले सालों में करना है." शुल्त्स का कहना है कि राजनीतिज्ञों में लोगों को यह बताने के साहस का अभाव है कि तेजी से बदलती दुनिया में कुछ भी वैसा नहीं रहेगा जैसा पहले था.

सर्वे में पीछे रहने का जवाब आंतरिक संतुलन

यह पूछे जाने पर कि जीत की कोई संभावना न दिखने से क्या वह निराश हैं, मार्टिन शुल्त्स ने डॉयचे वेले के इंटरव्यू में कहा, "मैं ठीक ठाक हूं. ईमानदारी से. सॉरी मुझे आपको निराश करना होगा. मेरे भीतर एक आतंरिक संतुलन है जो मुझसे कहता है, सर्वेक्षण सर्वेक्षण हैं. 24 सितंबर को मतदाता अपना फैसला सुनाएंगे. उसके बाद हम देखेंगे."

और यह पूछे जाने पर कि दूसरी पार्टियों के प्रमुख उम्मीदवारों में से वह किसे अपने साथ किसी एकांत द्वीप पर ले जाना चाहेंगे, एसपीडी प्रमुख ने जवाब देने में कोई वक्त नहीं लगाया और कहा कि उनका फैसला ग्रीन पार्टी के नेता चेम ओएज्देमीर के पक्ष में होगा. "उन्हें मैं सबसे अच्छी तरह जानता हूं, वे मेरे साथ यूरोपीय संसद के सदस्य थे. वे बहुत ही अच्छे इंसान हैं."

मार्टिन शुल्त्स: ये हैं चांसलर मैर्केल के चैलेंजर

चांसलर के चैलेंजर

यूरोपीय संसद का अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद मार्टिन शुल्त्स इसी साल राष्ट्रीय मुख्यधारा की राजनीति में उतरे हैं. उनका मुकाबला चांसलर मैर्केल से है. लेकिन मैर्केल लोकप्रियता के मामले में उनसे काफी आगे हैं.

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हम साथ साथ हैं

शुल्त्स का संबंध जर्मनी के राइनलैंड इलाके से है. साधारण परिवार से आने वाले शुल्त्स को यहां उनकी पत्नी इग्ने के साथ देखा जा सकता है. तस्वीर 2014 की है जब यूरोपीय संसद के लिए वोट पड़ रहे थे.

मार्टिन शुल्त्स: ये हैं चांसलर मैर्केल के चैलेंजर

अनुभवी

शुत्ल्स खास तौर से सुर्खियों में उस समय आये जब वह 2012 में यूरोपीय संसद के अध्यक्ष बने. हालांकि एसपीडी पार्टी की तरफ से वह 1994 से ही यूरोपीय संसद के सदस्य रहे हैं और उन्हें यूरोपीय राजनीति का लंबा अनुभव है.

मार्टिन शुल्त्स: ये हैं चांसलर मैर्केल के चैलेंजर

मेयर बने

यूरोपीय राजनीति में कदम रखने से पहले मार्टिन शुल्त्स अपने शहर वुरसेलेन के मेयर बने. 31 साल की उम्र में वह जर्मनी के सबसे युवा मेयरों में से एक थे. वुरसेलेन जर्मनी के नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया राज्य में आखेन के पास एक छोटा सा शहर है.

मार्टिन शुल्त्स: ये हैं चांसलर मैर्केल के चैलेंजर

वुरसेलेन से शुरुआत

मार्टिन शुल्त्स को युवा अवस्था से ही राजनीति में दिलचस्पी थी. 19 साल की उम्र में वह वुरसेलेन में एसपीडी के सदस्य बन गये. उनके पिता पुलिसकर्मी थे जबकि मां घर पर रहकर अपने पांच बच्चों का ख्याल रखती थीं.

मार्टिन शुल्त्स: ये हैं चांसलर मैर्केल के चैलेंजर

एसपीडी के नेता

एसपीडी नेताओं ने पार्टी की कम होती लोकप्रियता को देखते हुए मार्टिन शुल्त्स से मुख्यधारा की राजनीति में लौटने और पार्टी का नेतृत्व संभालने को कहा और इस इस तरह वह आम चुनावों के लिए चांसलर पद के उम्मीदवार बनाये गये.

मार्टिन शुल्त्स: ये हैं चांसलर मैर्केल के चैलेंजर

शुल्त्स की मुश्किल

चुनावी अभियान के दौरान मार्टिन शुल्त्स को चांसलर मैर्केल की नीतियों को निशाना बनाना है. लेकिन उनकी पार्टी एसपीडी ने सत्ताधारी गठबंधन के जूनियर पार्टनर के तौर पर इन नीतियों का समर्थन किया है. यही उनके लिए सबसे बड़ी मुश्किल है.

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