मेडिकल गोपनीयता से छेड़छाड़ न हो

जबसे पता चला कि जर्मनविंग्स के को-पायलट के डॉक्टर ने उसमें आत्महत्या के खतरा डायग्नोज किया था, डॉक्टरों की गोपनीयता में ढील देने की मांग बढ़ रही है.

लेकिन यह गलत रास्ता है. गोपनीयता के नियम के बिना डॉक्टर और मरीज में भरोसे का रिश्ता नहीं बन सकता. पूरी गोपनीयता से ही इस बात की गारंटी होती है कि हर मरीज अपने डॉक्टर से अपनी चिंताओं, तकलीफों और दुख के बारे में खुलकर बात कर सके. खासकर यह जनरल प्रैक्टिशनर और स्पेशलिस्ट के लिए लागू होता है जिनके पास मरीज खुद जाते हैं. ऐसे डॉक्टर से उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वह नियोक्ता को रिपोर्ट करेगा.

डॉयचे वेले के फाबियान श्मिट

बहुत सारे अपवाद

जर्मनी में इस समय भी गोपनीयता के कानून के बहुत सारे अपवाद हैं. मसलन खतरे को रोकने के मामले में. यदि डॉक्टर को पता है कि उसका मरीज शरीर को शिथिल करने वाली दवा खाने के बाद गाड़ी चलाने का इरादा रखता है तो उसे अपनी गोपनीयता की कसम तोड़कर पुलिस को फोन करना होगा. आत्महत्या के खतरे वाले पायलट के लिए जहाज उड़ाने का फैसला भी ऐसा ही मामला है. इसके लिए डॉक्टर को पता होना चाहिए कि उसके मरीज का पेशा क्या है और आत्महत्या का खतरा कितना गंभीर है.

कंपनी का डॉक्टर भी यूं तो कर्मचारी की पेशेवर योग्यता की जांच के लिए होता है लेकिन वह भी गोपनीयता के नियम से बंधा होता है. वह सिर्फ इतनी रिपोर्ट करता है कि कोई व्यक्ति किसी खास पद पर काम करने के योग्य है या नहीं. इसके लिए डॉक्टर को शारीरिक और मानसिक योग्यता की ठीक से जांच करनी होगी. जर्मनविंग्स के पायलट के मामले में ऐसा नहीं हुआ. वह मरीज वार्षिक जांचों में अपनी बीमारी छुपाने में कामयाब रहा.

पारदर्शी मरीज

इस समस्या का हल इस बात में नहीं हो सकता कि कंपनी के डॉक्टरों या दफ्तर के अधिकारियों को फैमिली डॉक्टर से बीमारी का पूरा दस्तावेज मिल जाए. संभवतः मरीजों के एक विशाल डाटा बैंक की मदद से ऐसे पारदर्शी मरीज की कल्पना सबके लिए दहलाने वाली होगी. पायलटों, ट्रेन और बस के ड्राइवरों या परमाणु बिजली घरों के कंट्रोल सेंटरों का नियंत्रण करने वाले इंजीनियरों की मानसिक योग्यता की सही जांच के लिए नियमित रूप से व्यापक स्वास्थ्य जांच जरूरी है.

उसमें मनोवैज्ञानिक जांच भी शामिल है. इसमें कोई नुकसान नहीं कि कंपनी का डॉक्टर मनोरोग वाली दवाओं या ड्रग का पता करने के लिए खून, पेशाब और बालों की जांच करें ताकि वे यह पता कर सकें कि मरीज जो कहानी उन्हें सुना रहा है वह सही भी है या नहीं. लेकिन यह सब भी मेडिकल गोपनीयता की पूरी तरह रक्षा करते हुए ही करना होगा.

फाबियान श्मिट/एमजे

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