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मैमोग्राफी से स्तन कैंसर का इलाज

२२ फ़रवरी २०१३

पश्चिमी यूरोप में स्तन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके इलाज के लिए नई तकनीक अपनाई जा रही है, जिस से मिनटों में ही कैंसर की कोशिकाओं को ढूंढ कर नष्ट किया जा सकता है.

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तस्वीर: picture-alliance/ dpa

भारत में हर साल स्तन कैंसर के एक लाख नए मामले सामने आ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि 2020 तक दुनिया में हर आठ में से एक महिला को स्तन कैंसर होगा. ब्रेस्ट कैंसर धीरे धीरे बढ़ता है और मुश्किल यह है कि शुरुआत में इसका पता भी नहीं चलता. डॉक्टरों के बीमारी पकड़ने तक अक्सर काफी देर हो चुकी होती है. लेकिन अब मैग्नेट रेसोनेंस मैमोग्राफी से स्तन कैंसर का और जल्दी पता लगाया जा सकता है. इस संवेदनशील प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड किरणों और एक्सरे के मुकाबले ज्यादा सटीक तस्वीरें मिलती है और मरीज पर गलत प्रभाव भी नहीं पड़ता.

टेस्ट के लिए कॉन्ट्रास्ट एजेंट की जरूरत होती है. यह ऐसे रसायन होते हैं जो टेस्ट के नतीजों को बेहतर तरीके से सामने लाने में मदद करते हैं. लेकिन यह प्रक्रिया अब भी बहुत महंगी है और डॉक्टर किसी एक तरीके पर सहमत नहीं हो पाए हैं. मैग्नेट रेसोनेंस की मदद से स्तन की 1,000 अलग अलग तस्वीरें मिलती हैं. एक्सरे के मुकाबले यह ज्यादा जानकारी देती है. एक्सरे में स्तन में घने ऊतकों की छवि साफ नहीं होती. 50 साल से कम उम्र की महिलाओं में ऊतक यानी टिशू और घने होने की वजह से कैंसर पकड़ में नहीं आता.

Symbolbild Brustkrebsvorsorge
मेमोग्राफी में काले बैकग्राउंड पर सफेद ट्यूमर साफ दिख जाता हैतस्वीर: picture alliance/dpa/lsw

हाथों हाथ इलाज

येना के रेडियोलॉजी इंस्टीट्यूट के डॉक्टर वेर्नर ए काइजर बताते हैं कि ऊतकों के किसी हिस्से में अगर और सघनता दिखे, तो वह ट्यूमर का संकेत है, "यह बर्फ में सफेद खरगोश या धुंध में कोई चीज को ढूंढने जैसा है. लेकिन इस नई प्रक्रिया में कॉन्ट्रास्ट है, यानी आपको एक काले बैकग्राउंड में ट्यूमर सफेद नजर आता है."  मैग्नेट रेसोनेंस के जरिए एक मरीज के स्कैन के बारे में डॉक्टर काइजर बताते हैं, "इस मरीज के शरीर में एक काफी खतरनाक ट्यूमर है और इसने स्तन की मांसपेशियों के पीछे एक और खतरनाक मैटास्टैटिक ट्यूमर के साथ जोड़ी बना ली है. यह आप इस प्रक्रिया के अलावा किसी और प्रक्रिया में नहीं देख सकते."

इस तकनीक से इलाज के नए तरीके सामने आ रहे हैं. डॉक्टर काइजर का कहना है कि अभी इस तकनीक को और बेहतर बनाने की जरूरत है, "बिना ऑपरेशन और बिना बेहोश किए, मरीज का इलाज ऐसे होना चाहिए. इस पर काम करना बाकी है लेकिन हमने शुरुआत कर ली है." आधे घंटे बाद ही मरीज अस्पताल से खुद अपने पैरों पर खड़े होकर घर जा सकेंगे. पहले उन्हें बुरी खबर दी जाएगी, यह कि उन्हें स्तन कैंसर है. और उसके बाद अच्छी खबर यह मिलेगी कि स्तन कैंसर खत्म हो गया है.

यह तकनीक महिलाओं के लिए क्रांतिकारी हो सकती है. जितनी जल्दी ट्यूमर का पता चले, कैंसर के खिलाफ जीत की संभावना उतनी ज्यादा हो जाती है.

रिपोर्ट: आभा मोंढे

संपादन: ईशा भाटिया

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