मैर्केल के उत्तराधिकारी के चुनाव के साथ एक युग का अंत

करीब दो दशकों से सीडीयू अध्यक्ष रहने के बाद अंगेला मैर्केल पार्टी की कमान एक नए नेता को सौंप रही हैं. उत्तराधिकारी का चुनाव बेहद रोमांचक है. एक ओर मैर्केल की वफादार सहयोगी हैं तो दूसरी ओर उनका पुराना प्रतिद्वंद्वी.

यूरोप की सबसे प्रभावशाली नेता के तौर पर सालों साल जानी जाती रहीं मैर्केल के खुद के राजनीतिक भविष्य के लिए भी नया उत्तराधिकारी अहम होगा. इससे तय होगा कि वे 2021 तक अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद राजनीति छोड़ने की अपनी योजना को अमली जामा पहना पाएंगी या नहीं. पिछले कई सर्वेक्षणों से 64 वर्षीया मैर्केल की घटती लोकप्रियता का पता चल रहा है. इसका कारण मुख्य रूप से शरणार्थियों के लिए उनकी उदार नीति को माना जाता है.

ऐसा क्या है अंगेला मैर्केल के व्यक्तित्व में

'शक्ति का त्रिकोण'

मैर्केल को अक्सर हाथ मिलाकर खड़े होने पर एक त्रिकोण सी मुद्रा में देखा जाता है. जनता के सामने हों या कैमरे के सामने- ये हस्त मुद्रा उनकी पहचान है. और एक बेहद शक्तिशाली नेता होने के कारण कई लोग इसे शक्ति का त्रिकोण कहते हैं.

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यूरोप की नेता

जर्मन चांसलर अपनी लगभग हर सार्वजनिक उपस्थिति में शांत और गंभीर होती हैं, खासकर यूरोप के भीतर. इसी कारण सही मौकों पर आई उनकी मुस्कान खबर बन जाती है. जैसे हाल ही में ब्रातिस्लावा में आयोजित यूरोपीय नेताओं के सम्मेलन में.

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सेल्फी में चांसलर

2015 में जर्मनी में शरणार्थियों की संख्या में आए उभार के दौरान ही एक सीरियाई युवा के साथ उनकी ये सेल्फी बहुत महत्वपूर्ण संदेश बन गई. शरणार्थियों के लिए द्वार खुले रखने वाली मैर्केल ने अपने मत को साफ करते हुए तमाम स्कूलों और शरणार्थी कैंपों का दौरा किया.

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गठबंधन सरकार में जुगलबंदी

जर्मनी की चांसलर और सीडीयू पार्टी की मुखिया के तौर पर मैर्केल के सामने चुनौतियां भी बड़ी हैं. वह सरकार में अपनी सहयोगी पार्टी एसपीडी के बड़े नेता जिग्मार गाब्रिएल की तरह तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देतीं बल्कि बहुत ही ठंडे दिमाग से वस्तुनिष्ठता वाले बयानों के लिए जानी जाती हैं.

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तेज डिजिटल विकास पर उत्सुक

एक भौतिकशास्त्री के रूप में प्रशिक्षित मैर्केल वैज्ञानिक सोच और अभिरुचि वाली तो रही हैं, लेकिन इंटरनेट और डिजिटल मीडिया में वे बहुत ज्यादा बढ़ चढ़ कर हिस्सा नहीं लेतीं. हालांकि उनका आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट है, जिस पर उनके सरकारी फोटोग्राफर की खींची तस्वीरें डाली जाती हैं. 2015 में यूएन में फेसबुक संस्थापक मार्क जकरबर्ग के साथ.

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उपदेशक की बेटी

एक प्रोटेस्टेंट पादरी की बेटी के रूप में जन्मी मैर्केल के नैतिक मूल्यों पर उनके पिता की शिक्षाओं का गहरा असर माना जाता है. ईसाई परवरिश के साथ बड़ी हुईं मैर्केल को 2016 में पोप फ्रांसिस के साथ वैटिकन में मिलने का मौका मिला. अपनी पसंदीदा किताबों पर चर्चा करते हुए.

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दोस्ताना राजनैतिक संबंधों की चैंपियन

अपने व्यस्त कार्यक्रमों के चलते मैर्केल के जीवन में ऐसे मौके भी कम ही आते हैं जब वे रिलेक्स दिखें. लेकिन 2013 में जर्मनी और फ्रांस के बीच एलिजी समझौते पर हस्ताक्षर होने की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर मैर्केल ने पूरी संसद को न्यौता दिया और दोनों देशों की दोस्ती का जश्न शैंपेन की बोतल के साथ मनाया गया.

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एक निजी चांसलर

चांसलर के रूप में अंगेला मैर्केल साल में बहुत कम ही बार छुट्टियां ले पाती हैं. सार्वजनिक जीवन में होने के कारण अक्सर छुट्टी के समय भी उन पर नजर होती है. जैसे यहां पोलैंड में पति योआखिम जाउअर के साथ छुट्टी पर गईं मैर्केल की तस्वीर. (हाइके मुंड/आरपी)

हैम्बर्ग में सीडीयू के सम्मेलन में पार्टी अध्यक्ष के तौर पर अपना आखिरी भाषण देने के बाद पूरी सभा ने करीब 9-10 मिनट तक उनके लिए खड़े होकर तालियां बजाईं. इस सम्मान को देखकर मैर्केल ने उम्मीद जताते हुए कहा, "मैं आशा करती हूं कि इस पार्टी कॉन्फ्रेंस से हम और तैयार, प्रेरित और एकजुट होकर बाहर निकलेंगे." 2005 से ही जर्मनी का नेतृत्व करने वाली मैर्केल लगातार देश को केंद्र की राजनीति की ओर ले आई हैं. परिवार के लिए ज्यादा छुट्टियां दिलाना, परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल रोकना और सेना में अनिवार्य सेवा खत्म करने जैसी नीतियां उनके समय को परिभाषित करती हैं.

मैर्केल के उत्तराधिकारी के तौर पर जो दो मुख्य उम्मीदवार हैं, उनके व्यक्तित्व और विचारधारा में इतना अंतर है कि नए नेता के चुनाव से पहले पार्टी दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है. एक ओर हैं, सीडीयू की महासचिव आनेग्रेट क्रांप-कारेनबावर, जिन्हें एकेके के नाम से भी जाना जाता है. दूसरी ओर कॉर्पोरेट लॉयर फ्रीडरिष मैर्त्स हैं जो मैर्केल के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी नेतृत्व छोड़कर चले गए थे. अब 18 साल बाद वे एक बार फिर मैदान में हैं और लगातार मैर्केल की नीतियों पर हमला करते आए हैं. इसके अलावा एक तीसरा उम्मीदवार भी है जो मैर्केल के कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए भी मैर्केल की शरणार्थी नीति की खुल कर आलोचना करता रहा है, 38 वर्षीय येन्स श्पान.

मैर्केल की नीतियों के विरोधी रहे फ्रीडरिष मैर्त्स

अगर 56 साल की एकेके अध्यक्ष बनती हैं तो मैर्केल की जलाई लौ उसी तरह से जलती रहेगी और केंद्र की राजनीति ही आगे बढ़ेगी. वहीं 63 वर्षीय मैर्त्स के चुने जाने पर वे उन लोगों का परचम लहराएंगे जो मैर्केल की चलाई नीतियों में बड़े बदलाव चाहते हैं. मैर्त्स को पूर्व जर्मन वित्त मंत्री और अब संसद के स्पीकर वोल्फगांग शोएब्ले का समर्थन मिला हुआ है. माना जाता है कि यह दोनों नेता लंबे समय से मैर्केल के खिलाफ दुर्भावना पाले हुए हैं. शोएब्ले को लगता है कि मैर्केल ने एक समय उन्हें राष्ट्रपति बनने से रोका था और मैर्त्स को लगता है कि मैर्केल के ही कारण सालों पहले उनका सीडीयू के संसदीय दल के नेता का पद छूटा था.

एकेके के नाम से मशहूर सीडीयू नेता आनेग्रेट क्रांप-कारेनबावर

पार्टी से जुड़े 1001 सदस्य अपने वोट से सीडीयू का नया नेता चुनेंगे, लेकिन जो भी जीतेगा उसके सामने बड़ी चुनौतियां होंगी. फिलहाल सीडीयू को देश में केवल 30 फीसदी समर्थन हासिल है, जबकि मैर्केल के सुनहरे दिनों में यह समर्थन 40 फीसदी तक हुआ करता था. बहुत से समर्थक दक्षिण की ओर झुक गए हैं और अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) के साथ साथ वामपंथी राजनीति करने वाली ग्रीन पार्टी की ओर चले गए हैं. अगले साल मई में यूरोपीय संसद के चुनाव होने हैं, जिसके पहले जर्मनी को अपनी एकता का प्रदर्शन करना होगा.

आरपी/एमजे (एएफपी)

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