ये बुरी आदतें घटा रही हैं आपकी शारीरिक ऊर्जा

भागती दौड़ती जिंदगी लगातार हमारे लाइफस्टाइल को बदल रही है और हम कई ऐसी आदतों के शिकार हो रहे हैं जो हमारी शारीरिक ऊर्जा को निचोड़ रही हैं. चलिए जानते हैं ये कौन सी आदतें हैं जिन्हें छोड़ने में ही भलाई है.

भागदौड़ वाली दिनचर्या, अव्यवस्थित जीवनशैली, काम का बोझ और मानसिक तनाव के बीच बुरी लतें मौजूदा दौर में लोगों की परेशानी और बढ़ा रही हैं, क्योंकि उनकी शारीरिक ऊर्जा दिन-ब-दिन क्षीण होती चली जाती है.

विशेषज्ञ इसे गंभीर चिता का विषय बताते हैं. क्लिनिकल न्यूट्रीशियन, डाइटिशियन और हील योर बॉडी के संस्थापक रजत त्रेहन ने कहा कि लोगों को यह सोचने की जरूरत है कि शारीरिक ऊर्जा को कम करने वाली कौन सी बुरी आदतें हैं जिन्हें छोड़कर वे हेल्दी लाइफस्टाइल अपना सकते हैं. 

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की कुल 130 करोड़ आबादी में से 28.6 फीसदी लोग तंबाकू का सेवन करते हैं. रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि करीब 18.4 फीसदी युवा ना सिर्फ तंबाकू बल्कि सिगरेट, बीड़ी, खैनी, बीटल, अफीम, गांजा जैसे अन्य खतरनाक मादक पदार्थो का सेवन करते हैं. 

मस्तिष्क पर बुरा असर डालने वाली आदतें

बहुत ज्यादा फैट वाला खाना

बहुत ज्यादा जमा फैट वाला खाना खाने से मस्तिष्क में डोपेमीन का स्तर गिरता है. डोपेमीन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो इंसान को काम करने के लिए प्रेरित करता है. कई शोधों में यह साफ हो चुका है कि बहुत ज्यादा फैट वाला खाना इंसान को धीमा बनाता है, स्मरण शक्ति पर असर डालता है और अवसाद को भी बढ़ावा देता है.

मल्टीटास्किंग

मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के न्यूरोसाइंस के एक्सपर्ट अर्ल मिलर के मुताबिक इंसान का मस्तिष्क एक साथ कई काम करने के लिए नहीं बना है. एक साथ कई काम करने पर एकाग्रता भंग होती है और दिमाग जरूरी सूचानाओं को याद नहीं रख पाता.

हर बात पर गूगल

पता, टेलीफोन या कोई और जानकारी पाने के लिए गूगल सर्च करना बड़ी राहत है. लेकिन धीरे धीरे इंसान अपनी मेमोरी का कम से कम इस्तेमाल करने लगा है. स्मृति के लिए मस्तिष्क के भीतर हिप्पोकैम्पस जिम्मेदार होता हैं. तकनीक के चलते इंसान सूचनाएं पा रहा है लेकिन उन्हें याद नहीं रख पा रहा है.

बहुत ज्यादा मीठे फल

पोषण विशेषज्ञ डॉक्टर सारा ब्रेवर के मुताबिक बहुत ज्यादा मीठे फल नहीं खाने चाहिए, "काम करने के लिए मस्तिष्क को ग्लूकोज चाहिए. लेकिन बहुत छोटे अंतराल में बहुत ज्यादा ग्लूकोज मिले तो भी दिमाग धीमा हो जाता है."

मीडिया का असर

मनोविज्ञानी मार्क्स एप्पल अपनी रिसर्च में यह साबित कर चुके हैं कि फिल्म, रियलिटी शो और टीवी का असर हमारे व्यवहार पर पड़ता है. एप्पल के मुताबिक हम जो कुछ भी देखते या सुनते हैं वह अचेतन में हमारे व्यवहार को प्रभावित करता है.

जेट लैग और नींद में खलल

लंबी हवाई यात्रा के बाद होने वाली थकान या फिर लगातार नींद में आ रही बाधा हिप्पोकैंपस पर असर डालती है. वहां याददाश्त बेहतर करने वाले न्यूरॉन्स के नए समूह नहीं बनते हैं. इसका असर धीरे धीरे सामने आता है.

चुईंग गम

एक वक्त ऐसा था जब चुईंग गम को मसूड़ों या जबड़ों के लिए बहुत अच्छा बताया जाता था. लेकिन नए एक्सपेरिमेंट दिखाते हैं कि चुईंग चबाने का असर एकाग्रता पर पड़ता है. चुईंग गम चबाते वक्त शॉर्ट टर्म मेमोरी कमजोर पड़ जाती है.

बीते साल आई डब्लयूएचओ की ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट में भी कुछ ऐसे ही चिंताजनक आंकड़े सामने आए थे. 2017 में आई इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बीते 11 सालों में प्रति व्यक्ति शराब की खपत दोगुनी हुई है. जहां 11 साल पहले एक व्यक्ति 3 लीटर शराब पीता था वहीं बीते 11 वर्षों में बढ़कर इसकी खपत बढ़कर 6 लीटर हो गई है. 

रिपोर्ट के अनुसार, इस दशक में भारतीय युवाओं में तंबाकू और शराब के अलावा एक और नशीले पदार्थ की लत तेजी से बढ़ी है. वह नशीला पदार्थ है ड्रग्स. ड्रग्स और अन्य मादक पदार्थो के सेवन से शारीरिक कार्यक्षमता बनाए रखने में ऊर्जा का अत्यधिक उपयोग होता है, जिसके चलते ये नशीले पदार्थ लीवर और फेफड़ों में विषैले पदार्थ के रूप में जमा होने लगते हैं.

खान-पान की आदतें भी बीते कुछ वर्षों में काफी तेजी से बदली हैं. सपरफूड से लेकर जंक फूड ना केवल शहरों बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी अब पांव पसारने लगे हैं. साल 2018 में आई क्लिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 35 फीसदी भारतीय सप्ताह से भी कम समय में एक बार फास्ट फूड खाते हैं. 

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मंथन | 23.08.2018

कैसे सीखता है दिमाग

इंडियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 14 फीसदी स्कूली बच्चे मोटापे का शिकार हैं. जंक फूड में जरूरी पोषण तत्वों की कमी से मोटापा बढ़ता है, कम उम्र में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा और लीवर और अन्य पाचन अंगों को जंक फूड पचाने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा और हार्मोनल स्त्राव की जरूरत होती है, क्योंकि इन खाद्य पदार्थो में काबोर्हाइड्रेट और वसा की उच्च मात्रा होती है.

बदलती जीवन शैली और शहरी लाइफस्टाइल कम नींद का एक प्रमुख कारण है. काम का बोझ, शिक्षा का दबाव, रिश्तों में आती खटास, तनाव और अन्य समस्याओं के कारण लोगों को नींद नहीं आती है. युवा ज्यादातर समय मूवी देखने और रात में पार्टी करने में बिताते हैं. 

विशेषज्ञ बताते हैं कि नींद की कमी से तनाव के हार्मोन रिलीज होते हैं. यह टेस्टोस्टेरोन कम करता है. कम नींद से हृदय रोग और मोटोपे बढ़ने का खतरा बना रहता है. कम नींद की वजह से शरीर को और भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है. ऐसे में वसा का संचय होता है, जिससे मधुमेह यानी डायबीटिज का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है.

योग, ध्यान और व्यायाम, ये तीनो चीजें शरीर और शरीर से जुड़ी स्वास्थ्य समास्याओं से निजात पाने की संजीवनी हैं. ये सभी हमारे शरीर के ब्लड सकुर्लेशन को नॉर्मल और हार्मोन्स को बैलेंस करते हैं. इसके साथ ही शारीरिक ऊर्जा और उसकी कार्य क्षमता को बनाए रखते हैं. शारीरिक व्यायाम करने के दौरान हमारे शरीर से वसा और कैलोरी बर्न होती है, जिससे शरीर को अधिक ऊर्जा मिलती है.

--आईएएनएस

ऐसे लोगों को कोई पसंद नहीं करता

फेसबुक पर बहुत ज्यादा फोटो

बिजनेस इनसाइडर की एक स्टडी कहती है कि जो लोग फेसबुक पर बहुत ज्यादा फोटो डालते हैं उन्हें पसंद नहीं किया जाता. इसके उलट उनके लिए लोगों के मन में एक तरह की खीज पैदा हो जाती है.

सबके साथ अच्छे

अच्छे से बात करना अच्छी बात है. लेकिन सबके साथ हर वक्त अच्छा होना गड़बड़ है. ऐसे लोगों को ज्यादा पसंद नहीं किया जाता क्योंकि लोगों को अच्छाई पर संदेह होने लगता है. इसलिए कभी-कभार अच्छा ना होना भी अच्छा होता है.

भावनाएं छिपाने वाले

कुछ मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मुस्कुराकर छिपा लेने से बेहतर है अपने जज्बात जाहिर करें. अगर आप अपनी भावनाएं जाहिर करते हैं तो सामने वाले देखेंगे कि आप भी उन जैसी ही भावनाएं रखते हैं. अपने जैसे लोगों को पसंद करना आसान होता है.

बात करते हुए मोबाइल देखने वाले

आम बात है लेकिन हम सब ऐसा करते हैं. किसी से बातचीत के दौरान बार-बार मोबाइल देखने वाले लोगों से सबको चिढ़ होती है. इससे वे सामने वाले को बता रहे होते हैं कि बातों में उनकी दिलचस्पी नहीं है.

मजाक नहीं

कई कंपनियों में हुए शोध से पता चला कि जो लोग गंभीर रहते हैं और मजाक-वजाक नहीं करते, उन्हें उनके सहकर्मी कम पसंद करते हैं. इलिनॉय स्टेट यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पता चला है कि रिश्तों में यहां तक कि रोमैंटिक रिश्तों में भी मजाक की अहमियत बहुत ज्यादा है.

शांति नहीं

शोध बताते हैं कि अगर आप हर वक्त परेशान रहते हैं तो आप अपनी इमेज खराब कर रहे हैं. खासकर ऑफिस में तो यह घातक है क्योंकि इससे लोगों को लग सकता है कि आप अक्षम हैं और दूसरों पर भरोसा नहीं करते.

मुस्कुराहट नहीं

शोध से पता चला है कि लोग आमतौर पर मुस्कुराते हुए लोगों को पसंद करते हैं. बेशक, शरीर और मन में बाकी सब ठीकठाक हो. मतलब एक्सिडेंट हो जाए तो मुस्कुराना जरूरी नहीं है. अगर आप पहली मुलाकात में मुस्कुराते हैं तो सामने वाले की आपको भूलने की गुंजाइश कम होगी.

हर वक्त गॉसिप

ट्रैविस ब्रैडबरी ने फोर्ब्स में एक लेख में लिखा है कि हर वक्त दूसरों के बारे में गॉसिप करने वाले को कोई पसंद नहीं करता. क्योंकि इससे भरोसा उठता है और लोगों को लगता है कि आप उनके बारे में भी गॉसिप करते होंगे.

अति विनम्र

हार्वर्ड बिजनस स्कूल की एक स्टडी कहती है कि जो लोग जरूरत से ज्यादा विनम्र होते हैं और इस विनम्रता के लिए तारीफ की उम्मीद करते हैं वे दूसरों को नाखुश ही करते हैं. हर वक्त शिकायत करने वाले लोग भी ज्यादा पसंद नहीं किए जाते लेकिन अति विनम्र लोग तो पसंद नहीं ही किए जाते.

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