रिश्तों के मामले में काफी लचीले होते हैं पुरुष

कुछ वैज्ञानिक प्रयोगों से लेकर लोकप्रिय धारावाहिकों तक समाज में पुरूषों के बारे में ऐसी धारणा बनी है कि वे यौन संबंधों के बारे में महिलाओं से कम संजीदा होते हैं. कुछ मानवविज्ञानियों ने इसे मनगढ़ंत पाया है.

यह भी एक प्रचलित धारणा है कि मानव के विकासक्रम में ही पुरुष ऐसे विकसित हुए हैं कि वे कई पार्टनरों के साथ यौन संबंध बनाने से नहीं बल्कि कमिटमेंट से दूर भागते हैं. हाल ही में प्रकाशित हुए एक अमेरिकी अध्ययन में मानवविज्ञानियों ने पाया कि प्रचलित धारणाओं के उलट विकास क्रम में पुरुषों के दिमाग में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनी जिसके कारण वह अपने जीवनकाल में कई लोगों से संबंध बनाए. उन्होंने पाया कि असल में संबंधों और पार्टनरों की संख्या एक बेहद लचीला मामला है जो कि माहौल और खासकर मौजूदा लिंग अनुपात जैसे कारकों पर निर्भर करता है.

ऊटा यूनिवर्सिटी के रायन शाख्ट इसे ऐसे समझाते हैं कि जहां औरतें कम हैं वहां पुरुष लंबे समर्पित रिश्तों में रहना पसंद करते हैं. शाख्ट ने रॉयल सोसायटी ओपन साइंस में प्रकाशित इस स्टडी का नेतृत्व किया है. स्टडी में ये भी पाया गया कि आम धारणाओं के उलट, असल में महिलाएं भी वन-नाइट स्टैंड जैसे क्षणिक शारीरिक संबंधों वाले रिश्तों में उतनी ही दिलचस्पी रख सकती हैं.

काफी लंबे समय से माना जाता रहा है कि मानव विकास के क्रम में ही पुरुष ऐसे बनते गए कि वे यौन संबंधों में स्वार्थी और गैरजिम्मेदार रवैया रखने लगे. अब तक यह तर्क दिया जाता रहा है कि एक पुरुष जितनी ज्यादा महिलाओं के साथ यौन संबंध बनाता है, किसी एक महिला और उसके साथ हुए अपने बच्चों के साथ जितना कम बंधता है, उसकी कहीं ज्यादा संतानें होंगी. विकास के क्रम में इसी तरह किसी पुरुष के जीन ज्यादा फैलने की बात समझाई जाती है. कई प्रयोगों में भी पाया गया है कि कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र रिश्तों में बंधने के बजाए ज्यादा से ज्यादा लड़कियों के साथ कुछ समय के लिए यौन संबंध बनाना पसंद करेंगे.

शाख्ट और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की मोनिक बोर्गरहोफ मूल्डर ने इस धारणा को परखने के लिए माकुशी कहे जाने वाले, गयाना के अमेरिंडियन लोगों का अध्ययन किया. उन्होंने ऐसे आठ समुदायों का परीक्षण किया जिसमें वयस्क पुरुषों और महिलाओं का अनुपात 1.43 से लेकर 0.93 तक था. इन समूहों में उन्होंने पाया कि जिन समूहों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से जितनी ज्यादा थी, वहां पुरुषों ने प्रचलित धारणाओं के विपरीत व्यवहार दिखाया. शाख्ट इसका कारण ये बताते हैं कि असल में जब कोई पुरुष किसी एक महिला के साथ समर्पित संबंध में होता है तो उसके यौन संबंधों के मौके कहीं ज्यादा होते हैं. इसके उलट अगर कोई पुरुष नए नए पार्टनरों को आकर्षित करने की कोशिशों में ही लगा रहे तो इसमें ज्यादा समय लग जाता है. शाख्ट कहते हैं ऐसे में, "एक औरत को ढूंढ कर उसके साथ ही बने रहना सर्वोत्तम नीति है."

इसके अलावा, ज्यादा से ज्यादा संतानोत्पत्ति से भी ज्यादा जरूरी हो जाता है कि आपकी जितनी संतानें हों वे भी बड़े हों और खुद माता पिता बनें. इसके लिए भी जरूरी है कि पुरुष अपने बच्चों के साथ रहे और उन्हें सुरक्षित माहौल दे.

आरआर/एमजे(रॉयटर्स)

जर्मनी में पुरुष दिवस

पिकनिक

इस दिन जर्मनी में कई पुरुष पिकनिक मनाते हैं. वे ट्रैकिंग, या साइकल टूर पर जाते हैं. पत्नी या जीवन साथी और बच्चे घर ही रहते हैं. अक्सर ऐसा ही देखने में आता है कि पुरुष इस दिन पिकनिक का आनंद उठाएं.

जर्मनी में पुरुष दिवस

खास गाड़ी

इन आदमियों के पास फादर्स डे की खास गाड़ी है, इसे बोलर वैगन कहा जाता है. अगर ये न हो तो ठेले या बाबा गाड़ी टाइप कुछ होता है, लेकिन बच्चों के बिना. इसमें पिकनिक और पीने का सामान होता है.

जर्मनी में पुरुष दिवस

जो पसंद हो

जहां एक ओर लोग अच्छे से अच्छा कपड़ा पहनते हैं या फिर प्रैक्टिकल कपड़े पहनना पसंद करते हैं, ये लोग पुराने स्विमिंग कॉस्ट्यूम में पार्टी पर निकले हैं.

जर्मनी में पुरुष दिवस

परंपरा

100 साल से भी ज्यादा से फादर्स डे मनाया जा रहा है और इसकी परंपरा में ज्यादा बदलाव नहीं आया है. लेकिन पिता की भूमिका जरूर बदली है. वो दूर रहने वाले अनजान आदरणीय से साथ खेलने वाले पापा बन गए हैं.

जर्मनी में पुरुष दिवस

आधुनिक पिता

आज पुरुष परिवार के साथ काफी जुड़े हुए हैं. लेकिन एक पीढ़ी पहले हालात बिलकुल अलग थे. पिता की घरेलू कामों में कोई दखल नहीं होती थी. कुछ परिवारों में पिता ही अब घर का कामकाज देखते हैं.

जर्मनी में पुरुष दिवस

सबसे अच्छे पापा

आधुनिक पुरुष होने का फायदा है. एरिक फ्रायवाल्ड यहां अपनी बेटी येटे के साथ हैं. एरिक को पत्नी की मदद और बच्चों की देखभाल के लिए 2013 का सबसे अच्छा पिता चुना गया. मॉडर्न मैन नाम की कंपनी यह अवॉर्ड देती है.

जर्मनी में पुरुष दिवस

नया मॉडल

2004 में गोद लेने का अधिकार बदला और फिर समलैंगिक जोड़ों को भी बच्चे गोद लेने का अधिकार मिला. कुछ परिवारों में बच्चे अब दो पिताओं के साथ बड़े होते हैं.

जर्मनी में पुरुष दिवस

साल में एक बार

चाहे नए या समलैंगिक पिता हों, सिंगल या रुढ़िवादी पति. साल में एक बार हर पिता को अपना दिन मनाने का हक है.

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