लेबनान में सरकार गिरने के बाद राजनीतिक संकट

लेबनान में शिया संगठन हिज्बुल्लाह के समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री साद हरीरी की सरकार गिर गई है. पूर्व प्रधानमंत्री रफीक हरीरी की हत्या में हिज्बुल्लाह के शामिल होने की अटकलों से देश में राजनीतिक संकट पैदा हुआ.

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि लेबनान में अस्थिरता पैदा करने की हिज्बुल्लाह की कोशिशें नाकाम रहेंगी. उन्होंने कहा, जो कुछ भी हुआ, वह साफ तौर पर लेबनान में मौजूद ताकतों की कोशिशों का नतीजा हैं. साथ ही इसमें लेबनान के बाहर के हित भी शामिल हैं जो इंसाफ और लेबनान की स्थिरता और प्रगति का रास्ता रोकना चाहते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः महेश झा

राष्ट्रपति मिशेल सुलेमानी ने साद अल हरीरी से कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहने को कहा है. राष्ट्रपति की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अगली सरकार बनने तक मौजूदा सरकार कार्यवाहक सरकार के तौर पर काम करती रहे.

बुधवार को जब 14 महीने पुरानी राष्ट्रीय एकता सरकार गिरी, उस वक्त हरीरी वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिल रहे थे. हिज्बुल्लाह और सहयोगी दलों के 11 मंत्रियों ने 2005 में साद हरीरी के पिता रफीक अल हरीरी की हत्या के सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र की जांच को लेकर इस्तीफा दे दिया है. इस बारे में तनाव को घटाने की सउदी अरब और सीरिया की कोशिशें भी नाकाम रहीं. हिज्बुल्लाह के नेता सैयद नसरल्लाह ने कहा है कि इस मामले में उनके शिया आंदोलन के सदस्यों को आरोपी बनाया जा सकता है.

राजनीतिक उठापटक

हिज्बुल्लाह रफीक हरीरी की हत्या में शामिल होने से इनकार करता है और चाहता है कि प्रधानमंत्री हरीरी यूएन के जांच ट्राइब्यूनल को दी जाने वाली रकम रोक दें. लेकिन सरकार ने इस मांग को खारिज किया है. राजनीतिक जानकार हिज्बुल्लाह और हरीरी के बीच सशस्त्र सैन्य संघर्ष की संभावनाओं में तो ज्यादा दम नहीं देख रहे हैं. लेकिन 2005 के हमले के बाद जैसे विरोध प्रदर्शनों और झड़पों से इनकार नहीं किया जा सकता. हिज्बुल्लाह को ईरान और सीरिया का समर्थन प्राप्त है तो हरीरी के ऊपर सउदी अरब और अमेरिका का हाथ माना जाता है.

अमेरिका ने कहा है कि यह बात सुनिश्चित की जाएगी कि ट्राइब्यूनल अपना काम करता रहे. उधर अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा भी हरीरी के हत्यारों को सजा दिए जाने की मांग करते हैं, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि इसके लिए हिज्बुल्लाह पर आरोप लगाने से मामला भड़क सकता है. मूसा ने एक बयान में कहा, "ट्राइब्यूलन राजनीति से ऊपर होना चाहिए और इंसाफ होना चाहिए. लेबनान में एक सरकार भी होनी चाहिए. लेकिन जब हम इतने सालों से इंतजार कर रहे हैं तो तनाव को टालने के लिए क्यों छह महीने दिए जाएं."

अधिकारी अभी यह कहने से बच रहे हैं कि क्या हरीरी को ही नई सरकार बनाने को कहा जाएगा या फिर किसी और को यह जिम्मेदारी दी जाएगी. हरीरी के गठबंधन ने 2009 में हुए चुनावों में जीत दर्ज की.

हिज्बुल्लाह की ताकत

हिज्बुल्ला अकेला ऐसा संगठन है जिसने 1975 से 1990 तक चले गृहयुद्ध के बाद भी हथियार नहीं छोड़े हैं. उसे लेबनान में सैन्य रूप से देश की सेना से भी ताकतवर समझा जाता है. हिज्बुल्लाह खुद को एक जातीय गुट से ज्यादा एक ऐसे इस्लामी समूह के तौर पर पेश करता है जो इस्राएल का विरोधी है. लेकिन अगर 2005 में रफीक हरीरी समेत 22 लोगों की जान लेने वाले ट्रक बम धमाके में हिज्बुल्ला के शामिल होने की बात सामने आती है तो इससे उसकी छवि को धक्का लगेगा.

हिज्बुल्लाह और उसके सहयोगी अमेरिका पर आरोप लगाते हैं कि वह सउदी अरब और सीरिया को समधान नहीं तलाशने दे रहा है. ट्राइब्यूनल को लेकर हरीरी की सरकार गिर गई. वह देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने हुए हैं और अमेरिका के बाद फ्रांस के दौरे पर गए हैं. ब्रिटेन, फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने 2007 में बने इस ट्राइब्यूनल को पूरी तरह समर्थन दिया है.

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि लेबनान में अस्थिरता पैदा करने की हिज्बुल्लाह की कोशिशें नाकाम रहेंगी. उन्होंने कहा, जो कुछ भी हुआ, वह साफ तौर पर लेबनान में मौजूद ताकतों की कोशिशों का नतीजा हैं. साथ ही इसमें लेबनान के बाहर के हित भी शामिल हैं जो इंसाफ और लेबनान की स्थिरता और प्रगति का रास्ता रोकना चाहते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः महेश झा

हिज्बुल्लाह की ताकत

हिज्बुल्ला अकेला ऐसा संगठन है जिसने 1975 से 1990 तक चले गृहयुद्ध के बाद भी हथियार नहीं छोड़े हैं. उसे लेबनान में सैन्य रूप से देश की सेना से भी ताकतवर समझा जाता है. हिज्बुल्लाह खुद को एक जातीय गुट से ज्यादा एक ऐसे इस्लामी समूह के तौर पर पेश करता है जो इस्राएल का विरोधी है. लेकिन अगर 2005 में रफीक हरीरी समेत 22 लोगों की जान लेने वाले ट्रक बम धमाके में हिज्बुल्ला के शामिल होने की बात सामने आती है तो इससे उसकी छवि को धक्का लगेगा.

हिज्बुल्लाह और उसके सहयोगी अमेरिका पर आरोप लगाते हैं कि वह सउदी अरब और सीरिया को समधान नहीं तलाशने दे रहा है. ट्राइब्यूनल को लेकर हरीरी की सरकार गिर गई. वह देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने हुए हैं और अमेरिका के बाद फ्रांस के दौरे पर गए हैं. ब्रिटेन, फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने 2007 में बने इस ट्राइब्यूनल को पूरी तरह समर्थन दिया है.

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि लेबनान में अस्थिरता पैदा करने की हिज्बुल्लाह की कोशिशें नाकाम रहेंगी. उन्होंने कहा, जो कुछ भी हुआ, वह साफ तौर पर लेबनान में मौजूद ताकतों की कोशिशों का नतीजा हैं. साथ ही इसमें लेबनान के बाहर के हित भी शामिल हैं जो इंसाफ और लेबनान की स्थिरता और प्रगति का रास्ता रोकना चाहते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः महेश झा

हिज्बुल्लाह रफीक हरीरी की हत्या में शामिल होने से इनकार करता है और चाहता है कि प्रधानमंत्री हरीरी यूएन के जांच ट्राइब्यूनल को दी जाने वाली रकम रोक दें. लेकिन सरकार ने इस मांग को खारिज किया है. राजनीतिक जानकार हिज्बुल्लाह और हरीरी के बीच सशस्त्र सैन्य संघर्ष की संभावनाओं में तो ज्यादा दम नहीं देख रहे हैं. लेकिन 2005 के हमले के बाद जैसे विरोध प्रदर्शनों और झड़पों से इनकार नहीं किया जा सकता. हिज्बुल्लाह को ईरान और सीरिया का समर्थन प्राप्त है तो हरीरी के ऊपर सउदी अरब और अमेरिका का हाथ माना जाता है.

अमेरिका ने कहा है कि यह बात सुनिश्चित की जाएगी कि ट्राइब्यूनल अपना काम करता रहे. उधर अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा भी हरीरी के हत्यारों को सजा दिए जाने की मांग करते हैं, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि इसके लिए हिज्बुल्लाह पर आरोप लगाने से मामला भड़क सकता है. मूसा ने एक बयान में कहा, "ट्राइब्यूलन राजनीति से ऊपर होना चाहिए और इंसाफ होना चाहिए. लेबनान में एक सरकार भी होनी चाहिए. लेकिन जब हम इतने सालों से इंतजार कर रहे हैं तो तनाव को टालने के लिए क्यों छह महीने दिए जाएं."

अधिकारी अभी यह कहने से बच रहे हैं कि क्या हरीरी को ही नई सरकार बनाने को कहा जाएगा या फिर किसी और को यह जिम्मेदारी दी जाएगी. हरीरी के गठबंधन ने 2009 में हुए चुनावों में जीत दर्ज की.

हिज्बुल्लाह की ताकत

हिज्बुल्ला अकेला ऐसा संगठन है जिसने 1975 से 1990 तक चले गृहयुद्ध के बाद भी हथियार नहीं छोड़े हैं. उसे लेबनान में सैन्य रूप से देश की सेना से भी ताकतवर समझा जाता है. हिज्बुल्लाह खुद को एक जातीय गुट से ज्यादा एक ऐसे इस्लामी समूह के तौर पर पेश करता है जो इस्राएल का विरोधी है. लेकिन अगर 2005 में रफीक हरीरी समेत 22 लोगों की जान लेने वाले ट्रक बम धमाके में हिज्बुल्ला के शामिल होने की बात सामने आती है तो इससे उसकी छवि को धक्का लगेगा.

हिज्बुल्लाह और उसके सहयोगी अमेरिका पर आरोप लगाते हैं कि वह सउदी अरब और सीरिया को समधान नहीं तलाशने दे रहा है. ट्राइब्यूनल को लेकर हरीरी की सरकार गिर गई. वह देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने हुए हैं और अमेरिका के बाद फ्रांस के दौरे पर गए हैं. ब्रिटेन, फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने 2007 में बने इस ट्राइब्यूनल को पूरी तरह समर्थन दिया है.

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि लेबनान में अस्थिरता पैदा करने की हिज्बुल्लाह की कोशिशें नाकाम रहेंगी. उन्होंने कहा, जो कुछ भी हुआ, वह साफ तौर पर लेबनान में मौजूद ताकतों की कोशिशों का नतीजा हैं. साथ ही इसमें लेबनान के बाहर के हित भी शामिल हैं जो इंसाफ और लेबनान की स्थिरता और प्रगति का रास्ता रोकना चाहते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः महेश झा

राष्ट्रपति मिशेल सुलेमानी ने साद अल हरीरी से कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहने को कहा है. राष्ट्रपति की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अगली सरकार बनने तक मौजूदा सरकार कार्यवाहक सरकार के तौर पर काम करती रहे.

बुधवार को जब 14 महीने पुरानी राष्ट्रीय एकता सरकार गिरी, उस वक्त हरीरी वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिल रहे थे. हिज्बुल्लाह और सहयोगी दलों के 11 मंत्रियों ने 2005 में साद हरीरी के पिता रफीक अल हरीरी की हत्या के सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र की जांच को लेकर इस्तीफा दे दिया है. इस बारे में तनाव को घटाने की सउदी अरब और सीरिया की कोशिशें भी नाकाम रहीं. हिज्बुल्लाह के नेता सैयद नसरल्लाह ने कहा है कि इस मामले में उनके शिया आंदोलन के सदस्यों को आरोपी बनाया जा सकता है.

राजनीतिक उठापटक

हिज्बुल्लाह रफीक हरीरी की हत्या में शामिल होने से इनकार करता है और चाहता है कि प्रधानमंत्री हरीरी यूएन के जांच ट्राइब्यूनल को दी जाने वाली रकम रोक दें. लेकिन सरकार ने इस मांग को खारिज किया है. राजनीतिक जानकार हिज्बुल्लाह और हरीरी के बीच सशस्त्र सैन्य संघर्ष की संभावनाओं में तो ज्यादा दम नहीं देख रहे हैं. लेकिन 2005 के हमले के बाद जैसे विरोध प्रदर्शनों और झड़पों से इनकार नहीं किया जा सकता. हिज्बुल्लाह को ईरान और सीरिया का समर्थन प्राप्त है तो हरीरी के ऊपर सउदी अरब और अमेरिका का हाथ माना जाता है.

अमेरिका ने कहा है कि यह बात सुनिश्चित की जाएगी कि ट्राइब्यूनल अपना काम करता रहे. उधर अरब लीग के महासचिव अम्र मूसा भी हरीरी के हत्यारों को सजा दिए जाने की मांग करते हैं, लेकिन वह यह भी मानते हैं कि इसके लिए हिज्बुल्लाह पर आरोप लगाने से मामला भड़क सकता है. मूसा ने एक बयान में कहा, "ट्राइब्यूलन राजनीति से ऊपर होना चाहिए और इंसाफ होना चाहिए. लेबनान में एक सरकार भी होनी चाहिए. लेकिन जब हम इतने सालों से इंतजार कर रहे हैं तो तनाव को टालने के लिए क्यों छह महीने दिए जाएं."

अधिकारी अभी यह कहने से बच रहे हैं कि क्या हरीरी को ही नई सरकार बनाने को कहा जाएगा या फिर किसी और को यह जिम्मेदारी दी जाएगी. हरीरी के गठबंधन ने 2009 में हुए चुनावों में जीत दर्ज की.

हिज्बुल्लाह की ताकत

हिज्बुल्ला अकेला ऐसा संगठन है जिसने 1975 से 1990 तक चले गृहयुद्ध के बाद भी हथियार नहीं छोड़े हैं. उसे लेबनान में सैन्य रूप से देश की सेना से भी ताकतवर समझा जाता है. हिज्बुल्लाह खुद को एक जातीय गुट से ज्यादा एक ऐसे इस्लामी समूह के तौर पर पेश करता है जो इस्राएल का विरोधी है. लेकिन अगर 2005 में रफीक हरीरी समेत 22 लोगों की जान लेने वाले ट्रक बम धमाके में हिज्बुल्ला के शामिल होने की बात सामने आती है तो इससे उसकी छवि को धक्का लगेगा.

हिज्बुल्लाह और उसके सहयोगी अमेरिका पर आरोप लगाते हैं कि वह सउदी अरब और सीरिया को समधान नहीं तलाशने दे रहा है. ट्राइब्यूनल को लेकर हरीरी की सरकार गिर गई. वह देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने हुए हैं और अमेरिका के बाद फ्रांस के दौरे पर गए हैं. ब्रिटेन, फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने 2007 में बने इस ट्राइब्यूनल को पूरी तरह समर्थन दिया है.

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि लेबनान में अस्थिरता पैदा करने की हिज्बुल्लाह की कोशिशें नाकाम रहेंगी. उन्होंने कहा, जो कुछ भी हुआ, वह साफ तौर पर लेबनान में मौजूद ताकतों की कोशिशों का नतीजा हैं. साथ ही इसमें लेबनान के बाहर के हित भी शामिल हैं जो इंसाफ और लेबनान की स्थिरता और प्रगति का रास्ता रोकना चाहते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः महेश झा

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