लोकल हीरो के विजेताओं को बधाई

हमें दुनिया भर से भेजी गई लोकल हीरो की कहानियां मिलीं. इन कहानियों ने हमें उन लोगों के बारे में जानने में मदद दी जो अपने समुदायों में बदलाव लाने के लिए सक्रिय हैं.

हमें दुनिया भर से आपकी भेजी हुई लोकल हीरो की तमाम कहानियां मिलीं. इनसे हमें अपने इलाकों में अर्थपूर्ण बदलाव ला रहे लोगों के बारे में एक बड़ी तस्वीर मिली. प्रस्ताव भेजने के लिए आप सबका धन्यवाद. सभी प्रविष्टियों के आकलन के बाद विजेताओं के नाम इस प्रकार हैं:

प्रथम पुरस्कार विजेता हैं हेमंत पाणिग्रही - इन्होंने बस्तर जिले में आदिवासी लड़कियों को पढ़ाने वाले 80 वर्षीय धर्मपाल सैनी उर्फ ताऊ की कहानी हमें भेजी थी.

द्वितीय और तृतीय पुरस्कार विजेता हैं राजकुमार कलीरवाना और विश्वू तारड़ - इन दोनों ने ही प्लास्टिक से हो रहे प्रदूषण के खिलाफ काम करने वाले राजस्थान के खामु राम बिश्नोई की कहानी हमसे साझा की.

सांत्वना पुरस्कार विजेताओं के नाम इस प्रकार हैं:

1. डॉक्टर प्रकाश आम्टे की कहानी के लिए शिवम चंद्रवंशी

2. समाज शेखर की कहानी के लिए शक्ति सिंह

3. अशोक बेलखोड़े की कहानी के लिए राष्ट्रपाल लोनिकर

4. धर्मेंद्र झा की कहानी के लिए अभय चंद्र झा

5. रवि बगोटी की कहानी के लिए रश्मी उपाध्याय

6. अशोक नायक की कहानी के लिए नितिन मुद्गल

7. कुलभूषण उपमान्य की कहानी के लिए नितिन उपमान्य

आप सबको हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं. दुनिया को बेहतर बनाने की कोशिशों में लगे लोगों के बारे में विस्तार से जानकारी देने पर हम आपका आभार व्यक्त करते हैं.

प्रथम पुरस्कार विजेता को मिलेगा एक स्मार्टफोन और एक लोकल हीरो पैकेज. द्वितीय और तृतीय पुरस्कार विजेता के मिलेगा आईपॉड और लोकल हीरो पैकेज. सभी सांत्वना पुरस्कार विजेताओं तो भी लोकल हीरो पैकेज भेजे जाएंगे.

पुरस्कार भिजवाने के लिए हमें आपके पते की जरूरत पड़ेगी. कृपया hindi@dw.com पर अपना ईमेल का पता, घर का पता और फोन नंबर भेज दें. ईमेल के सब्जेक्ट में "Local Heroes" लिखना ना भूलें. आप फेसबुक इनबॉक्स के जरिए भी अपनी जानकारी हम तक पहुंचा सकते हैं.

लोकल हीरो पैकेज को इस्तेमाल कर सामग्री के साथ हमें अपनी तस्वीर भी भेजें और बताएं कि यह आपको कैसा लगा.

बायीं ओर दिए लिंक में आप डॉयचे वेले द्वारा प्रकाशित लोकल हीरो कहानियां पढ़ सकते हैं. इस तरह की और कहानियां और डीडब्ल्यू के नए इंग्लिश चैनल के बारे में जानकारी पाने के लिए यहां क्लिक करें - dw.com/localheroes

नया DW स्थानीय तौर पर सक्रिय लोकल हीरो के लिए बना है. टेलिविजन ऑन कीजिए या dw.com पर आइए और विश्व भर में हो रही घटनाओं के बारे में जानकारी हासिल कीजिए.

एसिड अटैक का मुकाबला!

भारत से निहारी

निहारी जब केवल 19 साल की थी, उसने खुदखुशी की कोशिश की थी. वह अपने जीवन से पूरी तरह निराश हो चुकी थी. वह अपने पति की ओर से मिल रही शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से बेहद परेशान थी.

एसिड अटैक का मुकाबला!

बांग्लादेश से फरीदा

फरीदा के पति को ड्रग्स और जुए की इतनी बुरी लत थी कि उसके लिए अपना घर तक बेच दिया. तंग आकर जब फरीदा ने उसे छोड़ने की धमकी दी तो उसके पति ने सोती हुई फरीदा पर एसिड डाल कर उसे कमरे में बंद कर दिया. उसके दर्द से बिलबिला कर चीखने से पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़कर फरीदा को बाहर निकाला.

एसिड अटैक का मुकाबला!

जीवनभर का जख्म

हमले के समय फरीदा की उम्र केवल 24 साल थी. तबसे अब तक वह 17 बार सर्जरी करवा चुकी हैं. फरीदा की मां भी उसके जख्मों की नियमित देखभाल करती हैं. अब फरीदा अपनी बहन के साथ रहती हैं. उनका अपना कोई घर नहीं रहा.

एसिड अटैक का मुकाबला!

युगांडा से फ्लाविया

साल 2009 में फ्लाविया पर उसके घर के ही ठीक सामने एक अजनबी ने एसिड फेंक दिया. उसे आजतक नहीं पता कि वह हमलावर कौन था और उसने ऐसा क्यों किया. कई साल तक घर की चारदिवारी में छुप कर काटने के बाद उसने तय किया कि उसे अपनी जिंदगी आगे बढ़ानी ही होगी. यहां फ्लाविया एक साल्सा डांस नाइट में जाने के लिए तैयार होती दिख रही हैं.

एसिड अटैक का मुकाबला!

परिवार का सहारा

फ्लाविया हर हफ्ते कम से कम एक बार डांस के लिए जरूर जाती हैं. बेहतरीन डांस करने के कारण उन्हें सब पसंद भी करते हैं. अपने परिवार और दोस्तों से मिल रही मदद से फ्लाविया अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर ला पाई है.

एसिड अटैक का मुकाबला!

नई खूबसूरती

यहां जिस कमरे में निहारी मेकअप करती दिख रही है, यहीं उसने खुद को आग लगा ली थी. आज वह अपने उस कदम पर शर्मिंदा है और अब जली हुई महिलाओं को लेकर अपना एक संगठन चलाती है. निहारी के संगठन का नाम है 'ब्यूटी ऑफ दी बर्न्ड विमेन'.

एसिड अटैक का मुकाबला!

पाकिस्तान से नुसरत

नुसरत पर दो बार एसिड हमला हुआ. पहले पति ने और फिर परिवार के एक और शख्स के उस पर एसिड फेंक दिया. किस्मत से वह बच गईं. एक नए दिन का सामना करने के लिए तैयार होती हुई नुसरत.

एसिड अटैक का मुकाबला!

उम्मीद से भरी

एसिड के कारण नुसरत के सिर के कुछ हिस्सों से बाल खत्म हो गए. अपने डॉक्टर की सलाह से खुद को ठीक करने के तरीकों और अपनी हेयरस्टाइल पर राय लेती नुसरत.

एसिड अटैक का मुकाबला!

दोस्तों का साथ

नुसरत अपने जैसी दूसरी औरतों से मिल कर एक दूसरे की तकलीफें साझा करना बहुत जरूरी मानती है. एसिड सर्वाइवर्स फाउंडेशन की बैठकों में नियमित रूप से जाकर हर किसी को तसल्ली मिलती है कि दुनिया में वह अकेली नहीं हैं.

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