विंटर ओलंपिक में गर्मी का अहसास

होटल से ग्राउंड जाने वाली बसों की खिड़कियां खुली हैं. और उसमें सवार खिलाड़ियों ने आस्तीनें चढ़ा रखी हैं. कुछ ने तो बिना आस्तीन वाली शर्ट पहन रखी है. भले ही सोची में विंटर ओलंपिक हो रहा हो लेकिन मौसम का मिजाज कुछ और है.

तापमान तो सर्दी बिलकुल नहीं बता रहा है. आधिकारिक तौर पर बताया गया कि पारा 12.1 डिग्री है. लेकिन वहां, जहां छाया है, खुले में गर्मी कहीं ज्यादा है. इतनी कि दर्शकों में से कुछ कभी कभार पास के काले सागर में डुबकी लगा रहे है. लंबी स्की करने वाले खिलाड़ी भी हल्के फुल्के कपड़े ही पहन रहे हैं. नॉर्वे की क्रॉस कंट्री स्कीयर मारिट जोएर्गेन का कहना है, "मैंने जितना कम संभव हुआ, उतने कम कपड़े पहने. वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि कुछ तो पहनना था न." उन्होंने 10 किलोमीटर महिला मुकाबले में हिस्सा लिया.

जोएर्गेन ने तो फिर भी पूरी बांह की जर्सी पहन रखी थी, अमेरिकी स्कीयर सोफी कैल्डवेल ने तो रेस के लिए गर्मियों जैसे कपड़े चुने. उनका कहना है, "अजीब तरह का मौसम है. निश्चित तौर पर मैं सबसे गर्म माहौल में खेल रही हूं."

विंटर ओलंपिक में कैंचियों की मांग भी बढ़ गई है. खिलाड़ी अपने लंबे ट्राउजर को काट कर शॉर्ट्स बना रहे हैं या फिर जर्सियों की आस्तीनें चढ़ा रहे हैं. पोलैंड को गोल्ड मेडल दिलाने वाली युस्ताइना कोवाल्सिक का कहना है, "यह मेरे जीवन की सबसे मुश्किल रेस थी, खास तौर पर सूरज की रोशनी के नीचे. आखिर में तो मैं सिर्फ चल ही पा रही थी." ऑस्ट्रिया की काटेरीना स्मूतना का कहना है, "मुझे लग रहा था कि जैसे मुझे बुखार हो गया हो." जबकि कांस्य पदक विजेता नॉर्वे की थेरेसा योहाउंग का कहना है कि इस बार तो लगता है कि धूप के चश्मों की बिक्री बढ़ेगी.

रोजा खूतोर एक्सट्रीम पार्क में भी ऐसा ही माहौल था. अमेरिकी स्कीयर निकोलस गोएपर का कहना है, "यह बहुत गर्म दिन था. मुझे अपने कपड़े कम करने पड़े. मुझे पसीना आ रहा था." मौसम की वजह से आयोजकों को कई पहाड़ियों पर ट्रेनिंग के कार्यक्रम में बदलाव करने पड़े. खतरा यह भी है कि वहां जमी बर्फ पिघल न जाए. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रवक्ता मार्क एडम्स कहते हैं, "हम मजे में हैं लेकिन स्थिति पर नजर रखे हुए हैं." वैसे खिलाड़ियों के लिए राहत की बात है कि आने वाले हफ्ते में पारा थोड़ा नीचे गिर सकता है.

एजेए/ओएसजे (डीपीए)

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