शांति के पथ पर सोमालिया

युद्ध के जख्मों के बीच सोमालिया की राजधानी मोगादिशु शांति की ओर बढ़ रहा है. हालांकि भारी संघर्ष के निशान अभी भी शहर में मौजूद हैं. लेकिन थोड़ी आजादी की खुशबू हवा में है.

समंदर किनारे जोड़े एक दूसरे का हाथ पकड़े प्यार की बातें कर रहे हैं. ये ऐसा दृश्य है, जिसकी कल्पना अल शबाब संगठन के सोमालिया पर कब्जे के दौरान नहीं सोची जा सकती थी.

भारतीय महासागर के लीडो बीच पर अपने दोस्त के साथ सैर करने आई समीरा अदेन कहती है, ''हम अब आजाद महसूस करते हैं.''

दो साल पहले की ही बात है जब इस्लामी कट्टरपंथियों ने महिलाओं के स्विमिंग पुल में तैरने पर पाबंदी लगा दी थी. अफ्रीकी फौज की कार्रवाई के बाद अब हालात बदल गए हैं.

जिंदगी की दोबारा शुरुआत एक कठिन काम है और ये एक धीमी चलने वाली प्रक्रिया है.

आतंकी संगठन अल शबाब से खतरा बरकरार

इस्लामी कट्टरपंथी अब भी देश के कुछ एक शहरों और गांवों पर कब्जा किए हुए हैं. 2011 से अब तक इन शहरों में कई हमले किए गए हैं. पिछले महीने उन्होंने नैरोबी के शॉपिंग मॉल पर हमला कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

लेकिन मोगादिशु के नागरिक अपनी नई आजादी को लेकर दृढ़ संकल्प रखते हैं. साथ ही आतंकियों की धमकियों से नहीं डरते हैं. अल शबाब का कब्जा नहीं होने के कारण शहर के युवा समंदर किनारे मौज मस्ती करते दिख जाते हैं. इसके अलावा कॉफी शॉप पर भी लड़के गप करते दिख जाएंगे.

लोग सामानों से भरे स्टोर्स से खरीदारी करने का स्वाद चख रहे हैं. सड़क किनारे डिब्बे से पेट्रोल खरीदने की बजाय लोग पेट्रोल पंप पर अपनी कारों में तेल भरा रहे हैं. मलबे के ढेरों के बीच बने रेस्तरां और होटलों में लोग खाने के लिए रात को बाहर भी निकलते हैं. अदेन कहती हैं, ''जब इस्लामी कानून लागू था तब हम इस तरह की आजादी का मजा नहीं ले सकते थे." अल शबाब के कब्जे के दौरान कड़े इस्लामिक शरिया कानून लागू कर दिए गए थे.

बहुत से सोमाली नागरिक विदेश से देश लौट रहे हैं. लंबी लड़ाई के दौरान वो अपना सब कुछ छोड़ कर चले गए थे. फाथी होटल और रेस्तरां के मैनेजर अब्दीसलान नूर कहते हैं, "मोगादिशु में व्यापार फल फूल रहा है. हमारे पास पुरूषों के लिए जगह है, महिलाओं के लिए जगह है और तो और जोड़ों के लिए भी इंतजाम है." अधिक उदार दृष्टिकोण के लोगों की वापसी के बाद थोड़ा मनमुटाव भी पैदा हो गया है. क्योंकि विदेशों में पढ़ाई और काम के बाद उनकी सोच में बहुत बदलाव आया है. इन सब चीजों से थोड़ी उदास सबदाऊ अदेन कहती हैं. "मुझे मोगादिशु में मजा आता है. नई आजादी का भी मजा है लेकिन बाहर से आए लोगों ने इसको कुछ आगे ही पहुंचा दिया है."

अल शबाब जिसने और हमले की धमकी दी उसके मीडिया संगठन के एक सदस्य ने टेलीफोन से कहा, ''ये सब बुरी चीजें बाहर से आए लोग कर रहे हैं. हमारे नौजवानों को भड़काने के लिए इस तरह के काम किए जा रहे हैं."

खतरा बरकरार

अल शबाब ने नैरोबी के मॉल पर हमला किया था

पिछले साल खुला राष्ट्रीय रंगमंच कुछ ही दिनों बाद बंद करना पड़ गया, जब आतंकियों ने उस पर आत्मघाती हमला कर दिया था. जून महीने में राजधानी में बने यूएन बेस कैंप पर एक हमले में 22 लोगों की मौत हो गई.

एक पश्चिमी राजनयिक का कहना है, ''अल शबाब सोमालिया के लिए कम नहीं बल्कि बड़ा खतरा है." उनका इशारा सितंबर महीने में नैरोबी के एक मॉल में आतंकी हमले की तरफ था. इस हमले में 67 लोगों की मौत हो गई थी. हमले की जिम्मेदारी अल शबाब ने ली थी.

पिछले साल सत्ता में आए राष्ट्रपति हसन शेख महमूद का कहना है कि इस्लामी कट्टरपंथ कमजोर हुआ है. राष्ट्रपति के सुरक्षा सलाहकार अब्दिर्हमान उमर उस्मान का कहना है, "सुरक्षा के लिहाज से हालात रोज बदल रहे हैं. सरकार अल शबाब से निपटने की हर कोशिश कर रही है."

सरकार को अफ्रीकी शांति बल पर निर्भर होना पड़ता है जिसका प्रभाव मोगादिशु से बाहर नहीं है. जिस तरह की शांति मोगादिशु में है, सोमालिया के और शहरों में होनी बाकी है.

एए, एम (रॉयटर्स)

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