सऊदी अरब में सीरिया के भविष्य पर चर्चा

सऊदी अरब में सीरिया के भविष्य पर बैठक चल रही है. राष्ट्रपति असद का विरोध कर रहे संगठनों के 100 से भी अधिक प्रतिनिधि रियाद में चर्चा के लिए पहुंचे हैं.

विद्रोहियों में "आर्मी ऑफ इस्लाम" और "अहरार अल-शाम" जैसे कट्टरपंथी संगठन भी शामिल हैं, जिन्हें अब तक सरकार के साथ एक ही मेज पर बैठ कर बात करने का मौका नहीं मिला है. अहरार अल-शाम का नाता आतंकवादी संगठन अल कायदा से रहा है. संगठन के नेता ने शिकायत की है कि बैठक में हिस्सा लेने आए अधिकतर लोग सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जनता और विरोधियों का नहीं. अहरार ने दावा किया है कि सऊदी अरब ने शुरुआत में 65 प्रतिनिधियों को बुलाया था, जिनमें केवल 15 ही विरोधियों की ओर से थे. हालांकि इस बीच संख्या में बदलाव आया है.

फ्री सीरियन आर्मी के नाम से कई छोटे छोटे संगठन भी सीरिया में सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं. इन सभी का साझा लक्ष्य राष्ट्रपति बशर अल असद को सत्ता से हटाना है. अहरार समेत इन संगठनों ने मांग की है कि असद और उनके सभी समर्थकों को सत्ता से पूरी तरह से हटाया जाए और असद को उनके हवाले कर दिया जाए.

वियना बैठक में विरोधियों को शामिल नहीं किया गया था.

बुधवार को शुरू हुई इस बैठक के लिए सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक पांच सितारा होटल बुक किया गया है. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मंगलवार को ही मीडिया को होटल के इलाके से हट जाने के आदेश दिए गए. इससे पहले अक्टूबर में सीरिया पर चर्चा के लिए 20 देशों के राजनयिक वियना में जमा हुए थे. यह पहला मौका था जब इस तरह की बैठक में ईरान ने भी शिरकत की. अंतरराष्ट्रीय स्तर की यह बैठक अब जनवरी में एक बार फिर होगी. पिछली बार हुई बैठक में विरोधियों को शामिल नहीं किया गया था और इस बात की उन्होंने निंदा भी की थी. ऐसे में मौजूदा बैठक को अगले साल होने वाली बैठक के लिए काफी अहम माना जा रहा है.

होम्स में बुरे हालात

इस दौरान होम्स में सरकार से समझौते के बाद विद्रोहियों ने एक इलाका खाली करना शुरू कर दिया है. सीरिया में मौजूद एक मानवाधिकार संस्था के अध्यक्ष रामी अब्देल रहमान ने समाचार एजेंसी डीपीए को बताया, "करीब 150 लोगों से भरी तीन बसों को अल वाएर इलाके से बाहर ले जाया गया है, इनमें मुख्य रूप से बच्चे और महिलाएं थीं." पिछले हफ्ते सरकार और विद्रोहियों के बीच हुए समझौते के तहत पहले चरण में 750 से 800 लोग इलाके से बाहर जा पाएंगे. धीरे धीरे कुल 3200 लड़ाके अपने परिवारों के साथ विद्रोहियों के इलाके में जा सकेंगे और इसके बदले में सरकार खाद्य और चिकित्सा सामग्री से भरे ट्रकों को इलाके में भेजेगी. एक सप्ताह पहले दमिश्क के एक इलाके को भी इस तरह से खाली कराया गया.

आईबी/एमजे (डीपीए, रॉयटर्स)

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

आईएसआई

आज जिसे इस्लामिक स्टेट के नाम से जाना जाता है, दरअसल उसकी शुरुआत अल कायदा से हुई. 2006 में इराक में मौजूद अल कायदा ने खुद को इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक का नाम दिया. तब यह आईएसआई कहलाया.

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आईसिस

फिर 2013 में संगठन अल कायदा से अलग हो गया और इसके लीडर अबु बक्र अल बगदादी ने नाम के आगे "अल-शाम" भी जोड़ दिया. तब यह इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड अल-शाम कहलाया. अंग्रेजी में इसे इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया यानि आईसिस कहा जाने लगा.

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क्या है अल-शाम?

अरबी भाषा में सीरिया को शाम कहा जाता है. हालांकि "अल शाम" एक बेहद पुराना शब्द है जो सीरिया, लेबनान, इस्राएल, फलीस्तीन और जॉर्डन को एक साथ संबोधित करता है.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

आईसिल

भूमध्यसागर के करीब जिस इलाके को अरबी में अल-शाम कहा जाता है, लगभग उसी को अंग्रेजी में लैवेंट पुकारा जाता है. यहीं से एक नया अनुवाद हुआ और संगठन को अब इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लैवेंट यानि आईसिल कहा जाने लगा.

आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?

आईएस

जून 2014 में इस आतंकी संगठन ने घोषणा की कि वह अपने नाम के आगे से इराक और सीरिया हटा रहा है. तब से वह आईएस के नाम से जाना जाने लगा है. अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र अब भी आइसिल का प्रयोग करते हैं और फ्रांस दाएश का.

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दाएश

दौलत अल इस्लामिया फ-अल इराक वा अल-शाम. अरबी मीडिया आईएस को इस नाम से पुकारता है. इसे छोटा करके बनता है दाईश. फ्रांस समेत कई पश्चिमी देशों ने इसे एक शब्द बना कर दाएश के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला किया है. हालांकि अरबी में दाएश जैसा कोई शब्द नहीं है.

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खिलाफत

संगठन का दावा है कि वह एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित कर चुका है. संगठन ने अपने नाम के आगे से इराक और सीरिया हटाने का भी यही कारण बताया. इस तर्क से दुनिया की सभी इस्लामी सरकारें नाजायज हैं और केवल आईएस ही सही है.

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अल बगदादी

केवल दुनिया की सरकारें ही इस आतंकी संगठन को "इस्लामिक" मानने से इंकार नहीं करतीं, खुद आतंकवादी भी करते हैं. अल कायदा ने इसे अल बगदादी का नाम दिया है और इस्लाम के नाम पर इस संगठन द्वारा की जा रही हरकतों की निंदा भी कर चुका है.

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