सबसे मोटे दुर्लभ तोते ने लगाई बच्चे पैदा करने की झड़ी

दुनिया के सबसे मोटे तोते की किस्म काकापो पर गायब होने का गंभीर खतरा है. ऐसे में उसका रिकॉर्ड ब्रीडिंग सीजन केवल न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों के लिए ही नहीं पूरी दुनिया के लिए खुशखबरी है.

करीब 50 साल पहले ही इस ना उड़ सकने वाले रात के पक्षी को खत्म हुआ मान लिया गया था. न्यूजीलैंड के काकापो रिकवरी ऑपरेशन के विज्ञान सलाहकार एंड्रू डिग्बी ने बताया कि इस साल के मेटिंग सीजन में उसी पक्षी के कम से कम 75 चूजे बचने की संभावना है. वैज्ञानिकों को लगता है कि काकापो के प्रजनन के रिकॉर्ड के पीछे जलवायु परिवर्तन का भी हाथ हो सकता है.

माओरी भाषा में काकापो का मतलब है 'रात के तोते'

डिग्बी इनके ब्रीडिंग प्रोग्राम की निगरानी करते हैं. अब यहां 147 वयस्क काकापो रहते हैं. 1970 में यहां पहली बार इन गोलमटोल, हरे, पीले और काले रंग वाले खास पक्षी को देखा गया था. काकापाओ इस मायने में भी खास होते हैं कि इनमें प्रजनन की प्रक्रिया मादाओं के नियंत्रण में होती है. वे दो से चार साल में एक बार तभी मेटिंग करती हैं, जब न्यूजीलैंड में स्थानीय रिमू के पेड़ फलों से लदे हों.

डिग्बी बताते हैं, "मालूम नहीं कि ऐसा क्यों होता है लेकिन हम जिस संभावना पर विचार कर रहे हैं वह है रिमू के फलों का विटामिन डी से लबालब होना, जो कि एक ऐसा सुपर फूड है जो प्रजनन शक्ति और सेहत से जुड़ा है." इस साल न्यूजीलैंड में रिमू के पेड़ खूब फले हैं. इसके लिए विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में आए बदलाव को जिम्मेदार मान रहे हैं.

डिग्बी और उनकी टीम पक्षियों की मॉनिटरिंग के लिए उनको रेडियो ट्रांसमिटर लगा कर रखते हैं.

स्थानीय माओरी भाषा में काकापो का अर्थ होता है "रात का तोता" और ये न्यूजीलैंड के चार द्वीपों पर पाए जाते हैं. करीब चार किलो वजन वाले नर तोते मेटिंग सीजन के शुरु होने पर मादाओं को आकर्षित करने में लग जाते हैं. फिर मेटिंग के बाद उनका रिश्ता यहीं खत्म हो जाता है. अंडे के मादा के पेट में पलने और बाहर आने के बाद भी उसे सेने और आगे देखभाल की सारी जिम्मेदारी मादा ही उठाती है. मॉनिटरिंग के लिए हर एक काकापो पक्षी के शरीर में रेडियो ट्रांसमिटर लगाया गया है और उनके घोंसलों में भी मॉनिटरिंग सिस्टम लगे हैं.  

इस बार 50 मादाओं में से 49 ने कुल 249 अंडे दिए, जिनमें से 89 से चूजे निकल चुके हैं और इनमें से 75 के वयस्क उम्र तक पहुंचने का अनुमान है. तीन साल पहले के मुकाबले यह दर दोगुनी से भी ज्यादा होगी. एक्सपर्ट कहते हैं कि कम से कम 500 काकापो वयस्क पक्षी जीवित रहें, तब जाकर उन्हें खतरे से बाहर समझना चाहिए.

आरपी/आईबी (एएफपी)

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हम दोनों.. दो प्रेमी

यूं तो बिल्ली प्रजाति के ज्यादातर जीव अकेला रहना ही पसंद करती हैं. लेकिन शेर और चीते इसका अपवाद हैं. जब वे मिलते हैं तो एक दूसरे के लिए अपने प्यार को जताने से पीछे नहीं हटते.

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कौन कितना ताकतवर?

क्या ये भी किस कर रहे हैं? नहीं. दरअसल ये लड़ रहे हैं और लड़ाई इस बात पर हो रही है कि पानी से गड्ढे से कौन अपनी प्यास पहले बुझाएगा. पानी की किल्लत झेल रहे दक्षिण अफ्रीका में अकसर ऐसा नजारा दिखता है.

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कैसे हो दोस्त..

नजारा रोमांटिक है. लेकिन ये इंसानों की तरह एक दूसरे को चूम नहीं रहे हैं. गिलहरियां एक दूसरे के प्रति लगाव दिखाने के लिए आपस में अपनी नाक रगड़ती हैं. उनके लिए यही दोस्ती और लगाव को दिखाने का जरिया है.

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प्यार नहीं, तकरार..

अपने होठों को टकराती ये मछलियां देखने में बहुत सुंदर लग रही हैं. लेकिन यहां भी प्यार नहीं बल्कि जंग हो रही है. हालांकि उनके इस "किसिंग" व्यवहार के कारण वे चीन में वेलेंटाइंन डे पर तोहफे के तौर पर खूब दी जाती हैं.

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महक

ये फोटो देख कर यह मत समझ लीजिए कि दो दीवाने हैं. खरगोश अकसर एक दूसरे की गंध सूधने के लिए अपनी नाक को पास पास लाते हैं. आम तौर पर यह जीव बहुत ही शर्मीला होता है.

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तुम कौन हो?

और भी बहुत से जीव एक दूसरे की गंध सूंघने के लिए इस तरह करीब आते हैं. इसके जरिए वह एक दूसरे की पहचान करते हैं. यहां दिख रहीं ग्रे सील भी एक दूसरे पहचान बढ़ा रही हैं.

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ये किस तो नहीं...

ये किलर व्हेल किस करने से एक दूसरे को काटती ज्यादा नजर आती हैं. यह तस्वीर लिए जाने के बाद क्या हुआ, यह तो पता नहीं. वैसे ये जीव एक दूसरे पर हमला नहीं करते. हां कई बार काटना या चोट पहुंचाने के मामले जरूर दिखते हैं.

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हम दोनों..

चोंच होने की वजह से परिंदों का एक दूसरे को किस करना जरा मुश्किल होता है. इसीलिए वे इस तरह एक दूसरे को छूते हैं. चोंच से ही परिंदे अपने बच्चों को खाना खिलाते हैं और हिंसक होने पर इसी से वार भी करते हैं.

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तेरा मेरा साथ रहे..

मोहब्बत की मिसाल देने के लिए कई बार तोता मैना की कहानियां सुनाई जाती हैं. बहुत हद तक ये सही भी हैं. तोते जब एक बार अपने साथी को चुन लेते हैं तो पूरी उम्र भर उसी के साथ रहते हैं.

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