"सिखाने का तरीका सीखो"

दस बारह साल पहले उन्होंने झुग्गी के बच्चों के बीच एक कंप्यूटर छोड़ दिया. इसी भारतीय को पढ़ाने और सिखाने के शानदार तरीके के लिए 10 लाख डॉलर का पुरस्कार मिला है. ऐसा पुरस्कार, जो नोबेल विजेताओं को मिला करता है.

उनका नाम है सुगाता मित्रा. पेशे से भौतिक विज्ञानी लेकिन जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा उन्होंने झुग्गी के बच्चों को पढ़ाने के नाम कर दिया. आमेरिका में साइंस की प्रतिष्ठित संस्था टेड ने कैलिफोर्निया में उन्हें सम्मानित किया. वह बच्चों को बिना किसी झिझक के पढ़ने का मौका देना चाहते हैं.

उनकी यह करामाती तरकीब 1999 में शुरू हुई, जब उन्होंने दिल्ली में एक झुग्गी वाले इलाके में एक कंप्यूटर लगाया, यह देखने के लिए कि बच्चे उसके साथ क्या करते हैं. अपना प्रोजेक्ट शुरू करते वक्त मित्रा ने कहा, "मैंने भेड़ियों के बीच यह चीज रखी थी. मुझे मालूम था कि तोड़ फोड़ कर इसका कबाड़ा निकाल दिया जाएगा और इसे बेच दिया जाएगा."

उन दिन को याद करते हुए वह रोमांचित हो जाते हैं, "सिर्फ आठ घंटे बाद जब मैं लौटा, तो देखा कि बच्चे अंग्रेजी में इंटरनेट ब्राउज कर रहे हैं. मुझे अहसास हुआ कि गलती से ही सही, मैंने कुछ अनोखा कर दिया है."

भौतिक विज्ञानी सुगाता मित्रा

भौतिक विज्ञानी से शिक्षाविद बने मित्रा ने बच्चों को पढ़ाने और सिखाने का ऐसा तरीका निकाला है, जिसका कई देशों ने बाद में इस्तेमाल किया. सभी समुदायों को एक ही नतीजा मिलाः बच्चों को अगर इंटरनेट की पहुंच मिल जाए, तो वह अपनी शिक्षा का तरीका खुद निकाल सकते हैं, बशर्ते कि बड़े उनकी राह में न आएं.

विशेष‚
विज्ञान | 12.02.2013

मित्रा का कहना है, "वे मशीन के आस पास झुंड बना लेते हैं. इसके बाद आप चुपचाप बैठ कर देखते रहें. आप उन्हें जितना शांति के साथ लाइन में बैठने को कहेंगे, उनके बीच झगड़े की संभावना उतनी ज्यादा होगी." जाहिर तौर पर वह परंपरागत क्लासरूम की मुखालफत करते हैं.

टेड ने हाल ही में अपनी पुरस्कार राशि दसगुनी बढ़ाई है, जिसके बाद यह पुरस्कार पाने वाले मित्रा पहली शख्सियत हैं. टेड समुदायों के बीच ऐसे आइडिया को तेजी से प्रचार करने की कोशिश करता है, जिसका समाज के बड़े हिस्से पर असर हो.

टेड पुरस्कार पाने वालों में नोबेल विजेता से लेकर बिल गेट्स और गूगल के संस्थापक जैसे लोग शामिल हैं. अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रपति अल गोर को भी यह पुरस्कार मिला है.

(देखिये स्कूल में पिछड़ने के बावजूद जिंदगी में जीतने वाली प्रतिभाओं को)

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

अल्बर्ट आइनस्टाइन

सापेक्षता समेत कई बड़े सिद्धांत देने वाले आइनस्टाइन ने 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया. साल भर बाद उन्होंने स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट की प्रवेश परीक्षा दी, जिसमें नाकामी हाथ लगी. इसके बाद आइनस्टाइन ऐसे स्कूल वापस लौटे जहां कल्पनाशीलता को समीकरण रटने से ज्यादा महत्व दिया जाता था.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

थॉमस एडिसन

बिजली का बल्ब, फोनोग्राम और मोशन पिक्चर कैमरा जैसी क्रांतिकारी मशीनें बनाने वाले एडिसन के नाम 1,000 से ज्यादा पेटेंट हैं. बीमार रहने के कारण उन्होंने काफी देर से स्कूल जाना शुरू किया. स्कूल ने भी तीन महीने बाद ही उन्हें बाहर निकाल दिया. एडिसन की मां खुद एक टीचर थीं, उन्होंने अपने बेटे को घर पर ही पढ़ाया.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

वॉल्ट डिज्नी

वॉल्ट डिज्नी दिन में स्कूल जाते और रात में शिकागो की कला अकादमी. यह सिलसिला ज्यादा लंबा नहीं चला. 16 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया. फर्जी बर्थ सर्टीफिकेट बनाकर वह अमेरिका से फ्रांस पहुंचे और रेड क्रॉस की एंबुलेंस चलाने लगे. एंबुलेंस में कार्टून के चित्र भरे पड़े थे. यहीं से वॉल्ट डिज्नी को कार्टूनों का आइडिया आया. देखते देखते उन्होंने सिनेमा में डिज्नी साम्राज्य खड़ा कर दिया.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

चार्ली चैप्लिन

कॉमेडी के सर्वकालीन महान अदाकार माने जाने वाले चार्ली चैप्लिन ने भी 13 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया. मां-बाप के निधन के बाद परिवार का पेट पालने के लिए वो स्टेज शो करने लगे. स्टेज शो में उन्हें मसखरे की भूमिका मिलती. लेकिन यही भूमिका धीरे धीरे उन्हें शिखर पर ले गई.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

चार्ल्स डिकेंस

अंग्रेजी के महान लेखकों में शुमार चार्ल्स डिकेंस के पिता को कर्ज के कारण जेल हो गई. घर का खर्च चलाने के लिए 12 साल के डिकेंस ने स्कूल छोड़ दिया और बूट ब्लैकिंग फैक्ट्री में 10 घंटे रोज की नौकरी शुरू कर दी. इसके बाद वो कई नौकरियों और अनुभवों से गुजरे और समाज के गहरे विश्लेषण ने उन्हें कहानीकार बना दिया.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

बेंजामिन फ्रैंकलिन

बेंजामिन फ्रैंकलिन की राजनीति, कूटनीति, लेखन, प्रकाशन, विज्ञान और अमेरिका की आजादी में अहम भूमिका रही. वह अपने परिवार के 15वें बच्चे थे. गरीबी के चलते 10 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और प्रिंटिंग में पिता व भाई का हाथ बंटाने लगे.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

हेनरी फोर्ड

फोर्ड की कारें तो आपने देखी ही होंगी, इनके जनक हेनरी फोर्ड हैं. उन्हें आधुनिक उद्योगों का जनक भी कहा जाता है. 16 साल की उम्र में फोर्ड ने स्कूल छोड़ दिया. खाली वक्त में वह घड़ियों के पुर्जे खोलते और जोड़ते रहे. बाद में फोर्ड ने ऑटोमोबाइल उ्द्योग में पहली बार एसेंबली लाइन इस्तेमाल की.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

बिल गेट्स

हावर्ड यूनिवर्सिटी के सबसे मशहूर ड्रॉपआउट छात्र होने का श्रेय माइक्रोसॉफ्ट के जनक बिल गेट्स को जाता है. कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने के दो साल बाद गेट्स ने अपने बचपन के मित्र पॉल एलन (तस्वीर में बाएं) के साथ माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना की. दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में शुमार गेट्स ने अपने सॉफ्टवेयरों को जरिये कंप्यूटर को कैलकुलेटर से आगे बढ़ाया.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

स्टीव जॉब्स

आईफोन, आईपॉड और मैकबुक जैसी मशीनें बनाने वाले एप्पल के सह संस्थापक जॉब्स ने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी. इस दौरान उन्होंने कला की कक्षाओं में बिना दाखिले के जाना शुरू कर दिया. इंजीनियरिंग से प्यार करने वाले जॉब्स के मुताबिक कला की कक्षा ने उन्हें अद्वितीय खूबसूरती की परिभाषा सिखाई.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

अजीम प्रेमजी

दयालु और दिलदार भारतीय कारोबारियों में गिने जाने वाले अजीम प्रेमजी से 21 की उम्र में कॉलेज छोड़ दिया. प्रेमजी ने अपनी कंपनी विप्रो शुरू की. आज विप्रो की कीमत 11 अरब डॉलर से ज्यादा है. प्रेमजी अपने आधे शेयर दान करने का एलान कर चुके हैं.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

कर्नल हारलैंड सैंडर्स

हारलैंड सैंडर्स की उम्र सिर्फ छह साल थी जब उनके पिता की मौत हुई. मां दिन भर काम करती और साथ ही पूरे परिवार के लिए खाना भी बनाती. परिवार चलाने के लिए उन्होंने स्कूल के बजाए कई काम करने शुरू किये. इसी दौरान उन्हें नौकरीपेशा लोगों को फ्राइड चिकन बेचने का आइडिया आया. आज दुनिया भर में उनके आउटलेट्स केएफसी (कनटकी फ्राइड चिकन) के नाम से जाने जाते हैं.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

रिचर्ड ब्रैनसन

डिसलेक्सिया के रोगी ब्रैनसन को पढ़ाई में काफी परेशानी होती थी. 16 साल में स्कूल छोड़ वो लंदन आए जहां उन्होंने कारोबार के गुर सीखे. वर्जिन अटलांटिक एयरवेज, वर्जिन रिकॉर्ड्स, वर्जिन मोबाइल जैसे कंपनियां खड़ी करने के बाद अब वह आम लोगों के लिए अंतरिक्ष यात्रा मुमकिन करने की तैयारी कर रहे हैं.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

जेम्स कैमरन

अवतार और टाइटैनिक जैसी सिनेमा जगत की सबसे बड़ी फिल्में बनाने वाले निर्देशक जेम्स कैमरन भी कैलिफोर्निया में अपनी फिजिक्स की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. उन्होंने कॉलेज छोड़ा, एक वेटर से शादी की और रोजी रोटी के लिए ट्रक चलाने लगे. 1977 में उन्होंने स्टार वॉर्स फिल्म देखी और वहीं से वह रुपहले पर्दे की ओर खिंचे चले आए.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

कपिल देव

क्रिकेट में वेस्ट इंडीज की बादशाहत खत्म करने और पहली बार भारत को विश्व कप दिलाने वाले कपिल देव भी स्कूली पढ़ाई पूरी नहीं कर सके. भारत के बेहतरीन ऑल राउंडरों में गिने जाने वाले कपिल को हालांकि इस बात का आज भी मलाल है.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

राजकुमारी डायना

डायना स्पेंसर ने 16 साल की उम्र में ब्रिटेन छोड़ दिया और स्विट्जरलैंड के एक स्कूल में दाखिला लिया. वहां भी वह पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं. वह गायिकी और बेले डांस की शौकीन थी. बाद में ब्रिटेन लौटकर उन्होंने एक डे केयर सेंटर में नौकरी की, जहां उनकी मुलाकात राजकुमार चार्ल्स से हुई. शादी के बाद डायना राजकुमारी बन गईं. उनकी खूबसूरती और दरियादिली आज भी लोगों के जेहन में है.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

सचिन तेंदुलकर

क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में शुमार सचिन तेंदुलकर ने 10वीं के बाद स्कूली पढ़ाई छोड़ दी. बेहतरीन बल्लेबाजी के चलते 16 साल की उम्र में वो भारतीय टीम के सदस्य बने और इसके बाद तो उनके बल्ले से कीर्तिमान बरसते चले गए.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

मार्क जकरबर्ग

फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने भी कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया. कॉलेज के दिनों में जकरबर्ग एक लड़की को खोजना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने एक सोशल नेटवर्किंग साइट बनाई. दुनिया आज इसे फेसबुक के नाम से जानती हैं. फोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक जकरबर्ग दुनिया के सबसे अमीर युवा हैं. आज दुनिया भर में फेसबुक के एक अरब से ज्यादा यूजर हैं.

स्कूल में पीछे, जिंदगी में अव्वल

लेडी गागा

उनका असली नाम स्टेफनी योआने एंजेलिना जर्मनोटा है. न्यूयॉर्क में आर्ट्स की पढ़ाई करने वाली स्टेफानी ने संगीत उद्योग में अपना करियर बनाने के लिए कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया. वह न्यूयॉर्क के क्लबों में परफॉर्म करने लगीं. 20 साल की उम्र में उन्होंने इंटरस्कोप रिकॉर्ड्स के साथ करार किया. आज लेडी गागा दुनिया के सबसे मशहूर गायकों में गिनी जाती हैं.

ब्रिटेन में न्यू कैसल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मित्रा ने कहा कि पुरस्कार से मिली रकम से वह भारत में ऐसी प्रयोगशाला खोलने की कोशिश करेंगे, जिससे इंटरनेट क्लाउड के जरिए पढ़ाई को बढ़ावा दिया जा सके. उनके मुताबिक दुनिया भर के रिटायर शिक्षक "ग्लोबल नेटवर्क से" इन पर नजर रखेंगे और ऑनलाइन वीडियो से एक दूसरे से जुड़े रहेंगे. उनका कहना है, "मैं देखना चाहता हूं कि यह काम करता है या नहीं. अगर कर गया, तो हमें बराबरी का मौका मिल जाएगा."

उनका कहना है कि स्कूलों में परंपरागत रूप से पढ़ाई, लिखाई और गणित ऐसे वक्त की बात हो गई है, जब लोगों की महत्वाकांक्षा सरकारी पदों की होती थी. लेकिन जब तकनीक विकसित हुई, तो लोगों ने अपना व्यवसाय तैयार करने का फैसला किया और अब ऐसा वक्त आ गया है कि हमें बच्चों को उनके हिसाब से पढ़ने और सीखने का मौका देना चाहिए.

सौम्य और मृदुभाषी मित्रा ने कहा, "अगली पीढ़ी तैयार करने के दसियों तरीके हो सकते हैं. मैंने तो सिर्फ एक हिमखंड का ऊपरी हिस्सा छुआ है." वह टेड की मदद से अपने लैब को सौर ऊर्जा मुहैया कराने का प्रयास करेंगे. उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें मदद की दरकार होगी.

टेड पुरस्कार के निदेशक लारा श्टाइन ने कहा, "सुगाता ने न सिर्फ खुद से सीखने का शानदार तरीका खोजा है, बल्कि उन्हें पूरी दुनिया के शिक्षकों का समर्थन हासिल है, जो इस तरीके पर आगे बढ़ना चाहते हैं."

श्टाइन ने कहा, "हमें उनकी इच्छाओं का समर्थन करते हुए बेहद खुशी हो रही है और हम इस बात से उत्साहित हैं कि भारत में उनका लैब कैसा बनेगा."

एजेए/ओएसजे (एएफपी)

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