सुरक्षित पर्यावरण भी मानवाधिकार

आज दुनिया मानवाधिकार दिवस मना रही है. डॉयचे वेले के मथियास फॉन हाइन का कहना है कि मानवाधिकारों का हनन आज सिर्फ तानाशाह और उनके गुर्गे ही नहीं कर रहे हैं, उसे जलवायु परिवर्तन और उसे न रोकने वाले समाज से भी खतरा है.

इन दिनों पेरिस में विश्व पर्यावरण सम्मेलन में इतिहास लिखने की तैयारी हो रही है. लेकिन यह साफ नहीं है कि अच्छे या बुरे रूप में. पेरिस में ही आज से 67 साल पहले मानवाधिकारों के आम बयान की घोषणा हुई थी. तब से 10 दिसंबर मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इस साल भी चीन, सऊदी अरब और ईरान में मौत की सजा के अत्यधिक इस्तेमाल की आलोचना करने का मौका है. या फिर यातना, पुलिस उत्पीड़न और वैचारिक स्वतंत्रता के दमन की आलोचना. इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार की तारीफ की जा सकती है जो ट्यूनीशिया के राष्ट्रीय संवाद चौकड़ी को गया है.

जलवायु परिवर्तन

पेरिस में हो रहे जलवायु सम्मेलन के वार्ताकारों से अपील की जा सकती है कि वे मानवाधिकारों की घोषणा के आर्टिकल 3 पर ध्यान दें. यह जीने के अधिकार की गारंटी करता है. लेकिन जलवायु परिवर्तन ने जान लेना शुरू कर दिया है, बड़ी तादाद में और कभी सीधे तो कभी अप्रत्यक्ष रूप से. सीधे इसलिए कि जलवायु परिवर्तन की वजह से आंधी तूफान और बाढ़ जैसी घटनाएं बढ़ गई हैं. 1995 से 2014 तक चक्रवाती तूफानों और बाढ़ में 500,000 लोग मारे गए हैं. जलवायु का बदलना इतनी जटिल प्रक्रिया है कि सीधे जिम्मेदारी ठहराना मुश्किल है लेकिन यह साफ है कि जलवायु की अति बढ़ रही है.

डॉयचे वेले के मथियास फॉन हाइन

जलवायु परिवर्तन अप्रत्यक्ष रूप में इस तरह जान ले रहा है कि वह राज्यों को अस्थिर कर रहा है. मिसाल है सीरिया, जहां लाखों की जान लेने वाला और करोड़ों को विस्थापित करने वाला गृहयुद्ध सालों के सूखे के बाद शुरू हुआ. 15 लाख किसानों को देहात छोड़कर शहरों में जाना पड़ा. ऐसे समय में जब सीरिया को इराक के लाखों शरणार्थियों का दबाव झेलना पड़ रहा था.स्थिर समाज भी ऐसी परिस्थितियों में हिल जाएंगे, सीरिया में कुशासन और बाहरी हत्सक्षेप ने हालत और खराब कर दी.

सुरक्षा को खतरा

मिसाल है बोको हराम. यह संयोग नहीं है कि आतंकी संगठन का उदय चाड झील के सूखने के साथ जुड़ा हुआ है. यदि 3 करोड़ लोगों, किसानों, पशुपालकों और मछुआरों की जिंदगी पहले के मुकाबले सिर्फ 20 प्रतिशत जमीन पर सिमट जाए तो बंटवारे का संघर्ष मुश्किल हो जाता है. और जब गरीबी और संभावनाओं का अभाव भी हो तो युवाओं की भर्ती का आतंकी ग्रुपों का काम आसान हो जाता है.

यहां तक कि अमेरिकी सेना ने भी जलवायु परिवर्तन को सुरक्षा के लिए जोखिम बताया है. यह साफ भी है. तापमान के बढ़ने से बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन होगा और शरणार्थी एक जगह से दूसरी जगह जाएंगे. संसाधनों की लड़ाई, खासकर पानी के लिए सख्त हो जाएगी. और यह हमेशा शांतिपूर्ण नहीं रहेगा. यह भी साफ है कि दुनिया में भूखमरी बढ़ेगी, जबकि आज ही हमारा अत्यंत समृद्ध समाज सभी लोगों का पोषण करने की हालत में नहीं है. हर तीन सेकंड पर एक इंसान भूखमरी से मर रहा है. ज्यादतर बच्चे हैं.

क्या हमें इसे नियति मान लेना चाहते हैं? आराम की वजह से, आदत की वजह से? कल्पनाशक्ति के अभाव की वजह से कि किस तरह जिंदगी और अर्थव्यवस्था को टिकाऊ तरीके से चलाया जा सकता है? क्योंकि आर्थिक हित बहुत शक्तिशाली लगते हैं? लोग अच्छी तरह जानते हैं कि जिंदगी इस तरह से नहीं चल सकती है. पेरिस में औद्योगिक देशों को और प्रयास करने होंगे, दूसरों को साथ देना होगा. मामला हमारे ग्रह का नहीं है, वह हमारे बिना भी रह सकता है. मामला हम इंसानों का है.

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जलवायु परिवर्तन का टेस्ट

सवाल

धरती कितनी गर्म हो गई है?

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जवाब

सन 1850 के करीब औद्योगिक क्रांति से पहले की तुलना में धरती एक डिग्री गर्म हुई है. वैज्ञानिकों को डर है कि उनके द्वारा तय 2 डिग्री की सीमा को 2100 तक बचा पाना संभव नहीं है. आलोचक 2 डिग्री सेल्सियस की सीमा को यूं भी ज्यादा मानते हैं और नए सर्वेक्षणों की रोशनी में 1.5 डिग्री की सीमा पर जोर दे रहे हैं.

जलवायु परिवर्तन का टेस्ट

सवाल

सन 2100 तक धरती के 2 डिग्री गर्म होने के क्या परिणाम होंगे?

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जवाब

धरती का तापमान यदि तेजी से बढ़ता है तो तीस लाख लोग तटीय क्षेत्रों में आने वाली बाढ़ से खतरे में पड़ जाएंगे. इसके अलावा 2 अरब लोग सूखे की वजह से पानी की कमी का शिकार होंगे. 20 से 30 प्रतिशत प्रजातियां खत्म हो जाएंगी क्योंकि धरती के गर्म होने से उनकी प्रकृति के अनुरूप ढलने की क्षमता खत्म हो जाएगी.

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सवाल

कांचघर प्रभाव कैसे पैदा होता है?

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जवाब

कोयला, खनिज तेल और गैस. बिजली बनाने, घर को गर्म करने, मोटर चलाने या औद्योगिक उत्पादन के लिए इन प्राकृतिक ईंधनों को जलाने से कार्बन डाय ऑक्साइड पैदा होता है जो वातावरण में घुल जाता है. कांचघर प्रभाव उत्पन्न करने में कार्बन डाय ऑक्साइड की 65 प्रतिशत जिम्मेदारी है.

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सवाल

पिछले साल कौन से देश मौसम में तेज बदलाव से प्रभावित थे?

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जवाब

पर्यावरण संगठन जर्मन वॉच के अनुसार सर्बिया, अफगानिस्तान और बोजनिया-हैर्त्सेगोविना में 2015 में खतरनाक मौसमी घटनाएं हुई. 1995 से बाढ़, तूफान और सूखे जैसी मौसमी परेशानियों का शिकार सबसे ज्यादा होंडुरास, म्यांमार, हैती और फिलीपींस जैसे दक्षिण के छोटे देश हुए हैं.

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सवाल

जलवायु परिवर्तन पर समुद्र का खारापन क्यों बढ़ता है?

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जवाब

समुद्र के पानी पर कांचघर गैस कार्बन डाय ऑक्साइड का रासायनिक असर होता है. रासायनिक प्रक्रिया से पानी अल्कली का हिस्सा कम हो जाता है. इसका समुद्र में अल्गी और कोराल जैसे जीवों पर बुरा असर होता है. पानी में अम्ल जितना ज्यादा होगा चूने के खोल गलने लगते हैं और कोराल मरने लगते हैं.

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सवाल

जलवायु परिवर्तन में किसकी ज्यादा भूमिका है?

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जवाब

एयरबस ए 320 से उड़ान भरने वाला यात्री 248 किलो कार्बन डाय ऑक्साइड पैदा करता है. उसी दूरी को तय करने के लिए फोल्क्सवागेन की नई कार 179 ग्राम कार्बन डाय ऑक्साइड उत्सर्जित करती है. पर्यावरण के लिए सबसे अच्छा है रेल से सफर करना. इस दूरी के लिए प्रति यात्री कार्बन डाय ऑक्साइड का उत्सर्जन 11 किलो है.

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