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हिंसा छोड़, शांति के रास्ते पर आएं माओवादीः ममता

१० अगस्त २०१०

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने माओवादियों से हिंसा छोड़ कर शांति का रास्ता अपनाने की अपील की है. माओवादी हिंसा से ग्रस्त रहे लालगढ़ में ममता ने कहा कि लोग जमीन दे दें तो वह वहां रेल फैक्ट्री लगवा सकती हैं.

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लालगढ़ में की बड़ी रैलीतस्वीर: UNI

पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के माओवाद प्रभावित लालगढ़ में सोमवार को पहली बार हजारों लोग जुटे थे. ममता बनर्जी की पहल पर 9 अगस्त के ऐतिहासिक दिन संत्रास विरोधी मंच के बैनर तले बीते लगभग डेढ़ बरसों में यह इस तरह की पहली रैली थी. इसके लिए सुरक्षा का जबरदस्त इंतजाम किए गए. कड़ी धूप और उमस की परवाह किए बिना दूरदराज के गावों से हजारों लोग रैली में जुटे थे. इसमें ममता के अलावा जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, स्वामी अग्निवेश और महाश्वेता देवी जैसे कई हस्तियां मौजूद थीं. इन सबने इलाके के लोगों और माओवादियों से हिंसा छोड़ कर शांति प्रक्रिया शुरू करने की अपील की.

लालगढ़ के रामकृष्ण विद्यालय के मैदान में लोगों की भीड़ तो सुबह से ही जुटने लगी थी. लेकिन दोपहर बाद डढ़े बजे ममता के वहां पहुंचते ही लोगों में नया जोश भर गया. पूरा इलाका ममता बनर्जी जिंदाबाद के नारों से गूंजने लगा. ममता ने कहा कि वह आज से ही इलाके में शांति बहाल करने के लिए विकासमूलक कार्यक्रम शुरू करना चाहती हैं. उन्होंने रामकृष्ण विद्यालय को सांसद कोटे से 20 लाख रुपए देने का एलान किया.

ममता ने कहा कि माओवादियों और दूसरे लोगों को हिंसा की राह छोड़ कर शांति बहाली के प्रयास करने होंगे. माओवादियों की ओर से होने वाली हिंसा की निंदा करते हुए तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने कहा कि उनको बातचीत के लिए आगे आना चाहिए. लेकिन इसके लिए पहले हत्या की राजनीति बंद करनी होगी. उन्होंने कहा कि अगर इलाके के लोग जमीन दें तो वे यहां रेलवे की एक फैक्ट्री स्थापित कर सकती हैं. इससे लालगढ़ के बेरोजगार युवकों को रोजगार मिलेगा.

स्वामी अग्निवेश ने माओवादी नेता आजाद और लालगढ़ में मारे गए पुलिस अत्याचार विरोधी समिति के नेताओं की हत्या की जांच की न्यायिक जांच कराने की मांग की. जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने भी इलाके में शांति बहाल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि हिंसा से कोई समस्या हल नहीं हो सकती.

ममता कोई डेढ़ घंटे तक लालगढ़ में रहीं. उन्होंने अपने भाषण में जंगल पर आदिवासियों का अधिकार बहाल करने का भी समर्थन किया. अगले साल बंगाल विधानसभा चुनाव जीत कर सत्ता में आने पर उन्होंने सिंगुर के किसानों की जमीन लौटाने का भी भरोसा दिया.

क्या इस रैली से लालगढ़ में एक नई सुबह की शुरूआत होगी? लाख टके के इस सवाल का जवाब तो बाद में मिलेगा. लेकिन इसके जरिए इलाके में विकास की दिशा में एक पहल तो हो ही गई है.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः ए कुमार

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