होगी चुम्बकीय बल की जांच

इंसान हमेशा से तारों को गजब की जिज्ञासा से देखता है. बचपन से ही तारों की कहानियां सुनाई पड़ती हैं. कभी हम तारों के आकार तो कभी उनकी टिमटिमाहट को लेकर मुग्ध हो जाते हैं. तारों की इस दुनिया को समझेंगे इस बार मंथन में.

आकाश में दिखने वाले इन तारों के बारे में हम कितना जानते हैं. सूरज भी एक तारा है. आसमान में दिखने वाले छोटे से तारे कई बार आकार और वजन में सूरज से कई गुना बड़े होते हैं. इन तारों की उम्र भी होती है, जिसके बाद यह मर जाते हैं, या कहें कि ये अपनी रौशनी खो देते हैं. तारों की इस दुनिया को समझेंगे इस बार मंथन में.

विज्ञान | 15.03.2013

चुम्बकीय बल का अनुमान

बचपन में हम चुंबक के साथ खेलते हैं. पृथ्वी भी चुंबक की ही तरह बर्ताव करती है. इसका चुंबकीय क्षेत्र धरती को अंतरिक्ष से आने वाले खतरनाक थपेड़ों से बचाता है. लेकिन वक्त के साथ साथ अक्सर चुंबक कमजोर पड़ जाते हैं. तो क्या यही हाल पृथ्वी के चुंबक का भी होगा. इसी को जानने के लिए अंतरिक्ष में स्वॉर्म नाम का एक कैमरा भेजा जा रहा है. स्वॉर्म अनुमान लगाएगा कि पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र किस तरह से काम कर रहा है.

ब्लैक होल में तब्दील होता सिग्नस एक्स 1 नाम का यह तारा सूरज से 15 गुना बड़ा है.

यह विशालकाय कैमरा अंतरिक्ष में जाने वाला सबसे बड़ा डिजिटल कैमरा है. सितंबर से यह आसमान के एक अरब जगमग तारों की पड़ताल करेगा. उनकी स्थिति, उनके प्रकाश में आने वाले बदलाव और उनके घूमने का डाटा पहली बार सटीक ढंग से जुटाया जा सकेगा. इसकी मदद से अंतरिक्ष विज्ञानी आकाशगंगा बनने के रहस्य को समझना चाहते हैं.

वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में ले जाने का मिशन मई में शुरू होगा. इस बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में अंतरिक्ष यात्रियों की नई टीम से पहली बार इटली के वैज्ञानिक को भेजा जा रहा है. रूस का सोयूज रॉकेट उन्हें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में ले जाएगा. स्टेशन से कई निगरानी यंत्र अंतरिक्ष में छोड़े जाएंगे. स्वॉर्म भी लाइन में है. स्वॉर्म में तीन उपग्रह लगे हैं जो धरती की बनावट और उसके चुंबकीय क्षेत्र में होने बदलावों पर नजर रखेंगे. वह इस बात का अनुमान लगाएगा कि चुंबकीय बल कभी खत्म तो नहीं होगा.

धरती की ही तरह सूरज का भी चुम्बकीय बल होता है.

शहरों की खूबसूरती

तारों की दुनिया में हो रहे शोध के साथ साथ मंथन में इस बार हम आपको मिलवा रहे हैं एक ऐसे व्यक्ति से जिसका जीवन इन्हीं तारों के बीच बीतता है. ब्रिटेन की एक खगोलशास्त्री बता रही हैं की किस तरह से तारों की दुनिया ने उनके सोचने का तरीका बदल दिया है. जर्मनी में रिसर्च कर रहे एक भारतीय वैज्ञानिक से भी खास बातचीत होगी. अभिजीत बोरकर ब्लैक होल और हाल ही में रूस में हुए उल्कापिंड पर जानकारी देंगे.

कार्यक्रम में भारतीय की पर्यटन राजधानी गोवा के संघर्ष पर भी एक रिपोर्ट है. बीते साल 27 लाख सैलानी गोवा पहुंचे. लेकिन बढ़ती भीड़ से गोवा का दम घुट रहा है. लोग मौज मस्ती के लिए यहां आते हैं और पीछे छोड़ जाते हैं ढेर सारा कूड़ा, जो शहर की खूबसूरती पर भारी पड़ रहा है. खतरे को देखते हुए गोवा में लोग खुद कमर कस रहे हैं. ऐसे ही कुछ हालात जॉर्डन के रेगिस्तान के भी हैं. यहां पर्यावरण को बचाने के लिए सैलानियों के लिए खास ईको होटल बनाए जा रहे हैं, जहां न ही बिजली होती है और ना ही मांसाहारी खाना.

विज्ञान की इन बातों के साथ साथ यह जानने के लिए कि किस तरह से जर्मनी में ब्रेड बनाई जाती है, देखना न भूलिएगा मंथन शनिवार सुबह 10.30 बजे डीडी-1 पर. कार्यक्रम के बारे में अपने सुझाव और अपनी प्रतिक्रियाएं आप हमें फेसबुक या ईमेल के जरिए भेज सकते हैं.

आईबी/ओएसजे

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