बुरकिनी विवाद का राष्ट्रपति चुनावों पर साया

फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव तो अगले साल होंगे, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति निकोला सारकोजी और उनके प्रतिद्वंद्वी अलां जुप्पे के बीच ठन गई है. मुस्लिम महिलाओं का फुल बॉडी स्विमिंग सूट इस समय फ्रांस में विवादों में है.

इस बार पहली बार एक प्राइमरी में फ्रांस की दक्षिणपंथी पार्टी अपने राष्ट्रपति उम्मीदवार का चुनाव करेगी. अभियान के दौरान बुरकिनी पर विवाद शुरू हो गया है. दोनों प्रमुख नेताओं के बीच झगड़ा तब शुरू हुआ जब कई शहरों के मेयरों ने देश की सर्वोच्च प्रशासनिक अदालत के शुक्रवार के उस फैसले को मानने से इनकार कर दिया जिसमें बुरकिनी पर प्रतिबंध को गैरकानूनी करार दिया गया था.

बड़बोले निकोला सारकोजी 2007 से 2012 तक फ्रांस के राष्ट्रपति रहे हैं और पिछले ही हफ्ते उन्होंने अगले साल राष्ट्रपति चुनाव का उम्मीदवार बनने की घोषणा की है. वह पिछले हफ्ते ही इस विवाद में शामिल हो गए थे जब उन्होंने कहा कि फ्रांस को अपने धर्मनिरपेक्ष "जीवन के ढर्रे" की रक्षा के लिए संघर्ष करना होगा. उन्होंने कहा, "हम अपने देश में धर्म में हिस्सेदारी का बाहरी दखल नहीं चाहते." 61 वर्षीय सारकोजी ने अपने युवा समर्थकों से कहा कि वे असंगत समझौतों, हकीकत को नकारने और आप्रवासन पर आधे अधूरे समाधान का उम्मीदवार नहीं होना चाहते.

बिकिनी को बिकिनी क्यों कहते हैं? तस्वीरें बताएंगी

70 साल की जवान बिकिनी

चार त्रिभुज

बिकिनी क्या है. चार त्रिभुज जो धागों के सहारे लटकी रहती हैं. 5 जुलाई 1946 को पैरिस के स्विमिंग पूल में इन्हीं चार त्रिभुजों को लटकाए दिखीं. यह पहली बिकिनी थी जिसे एक इंजीनियर लुई रिआर्द ने बनाया था.

70 साल की जवान बिकिनी

अटॉमिक बम के बाद का धमाका

तब दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो चुका था. शीत युद्ध शुरू हो रहा था. अमेरिका साउथ पैसिफिक के बिकिनी अटॉल में परमाणु परीक्षण कर रहा था. इसी जगह के नाम पर रिआर्द ने बिकिनी को यह नाम दिया था. उन्होंने विज्ञापनों में लिखा थाः पहला एन-अटॉमिक बम.

70 साल की जवान बिकिनी

प्राचीन रोम से

बिकिनी रिआर्द ने बनाई जरूर थी, लेकिन यह उनकी भी ईजाद नहीं थी. रोमन सैकड़ों साल पहले ऐसा कर चुके थे. चौथी सदी के कुछ भित्तिचित्रों में बिकिनी पहने लड़कियां दिखती हैं.

70 साल की जवान बिकिनी

मॉडल्स की पसंद

मर्लिन मुनरो ऐक्ट्रेस बनने से पहले जब मॉडलिंग कर रही थीं तो बिकिनी ने ही उन्हें चर्चित किया था. मॉडल्स के लिए तो बिकिनी खुदा के भेजे तोहफे जैसी थी. सब इसे पहनते थे.

70 साल की जवान बिकिनी

हॉलीवुड का फॉर्मूला

1950 के दशक में तो हॉलीवुड फिल्मों की सफलता का फॉर्मूला बिकिनी से निकलता था. जिस फिल्म में हीरोईन बिकिनी पहनकर बीच पर नहीं भागी, वह फिल्म ही भाग जाती थी.

70 साल की जवान बिकिनी

बॉन्ड गर्ल्स

बिकिनी ने बॉन्ड गर्ल्स को चमकाया या बॉन्ड गर्ल्स ने बिकिनी को, कहना मुश्किल है. हां, दोनों एक दूसरे का प्रतीक और पर्याय बन गए थे. शुरुआत 1962 में उरसूला आंद्रेस ने की थी.

70 साल की जवान बिकिनी

कितना कपड़ा चाहिए

1963 से बिकिनी के अलग-अलग तरह के रूप नजर आने शुरू हुए. बाएं कैपरी मॉडल है और दाहिने को सिसी मॉडल कहते हैं. दोनों हैम्बर्ग में 1963 में लॉन्च हुए.

70 साल की जवान बिकिनी

क्रोएशिए से बुनी बिकिनी

पूर्वी जर्मनी के लोग भी बिकिनी के दीवाने थे. 1971 में एक महिला पत्रिका ने क्रोएशिए की बिकिनी की तारीफ की तो घर-घर में बिकिनी बुनी जाने लगीं. ये सस्ती भी पड़ती थीं.

70 साल की जवान बिकिनी

बिकिनी का विरोध

1950 के दशक में ही बिकिनी का विरोध भी शुरू हो गया था. और साथ ही शुरू हुआ कपड़े का कटना. ब्राजील में बनी स्ट्रिंग टांगा में बहुत कम कपड़ा इस्तेमाल हुआ. आजकल तो यह खूब चलती है.

70 साल की जवान बिकिनी

बिकिनी बॉडी

दुनिया के सबसे खूबसूरत बीच फोटोग्राफरों को खूब लुभाते हैं क्योंकि वहां बिकिनी बॉडी दिखती हैं. और बिकिनी की चाहने वाली युवतियां अपनी बॉडी को बिकिनी के लिए फिट रखने के वास्ते क्या क्या करती हैं.

70 साल की जवान बिकिनी

बीच वॉलीबॉल

1996 से बीच वॉलीबॉल ओलंपिक में शामिल हो गया. और इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी. वजह? बिकिनी. वैसे 2012 तक बिकिनी पहनना जरूरी था. उसके बाद यह हुआ कि जो चाहे पहनो.

70 साल की जवान बिकिनी

क्लासिक बिकिनी

बिकिनी शब्द का अर्थ है लैंड ऑफ कोकोनट्स यानी जहां नारियल उगते हैं. बिकिनी अटॉल में अब कोई नहीं रहता क्योंकि वहां रेडियोएक्टिव विकिरणों का प्रभाव है. लेकिन उस जगह का नाम अमर हो गया है. देखना है कि वक्त के साथ कैसे बदली बिकीनी? ऊपर जो और लिखा है, उस पर क्लिक कीजिए.

सारकोजी के विपरीत देश के प्रधानमंत्री रहे अलां जुप्पे ने कहा कि वे "लोगों को साथ लाना चाहते हैं न कि आग लगाना चाहते हैं." इस समय के जनमत संग्रहों में अलां जुप्पे देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं. हालांकि कुछ पर्यवेक्षकों ने शिकायत की है कि मैदान में युवा नेता नहीं हैं लेकिन 71 वर्षीय जुप्पे अपनी उम्र और अपने नरमपंथी होने का इस्तेमाल अपने फायदे में कर रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसे समय में जब फ्रांस आतंकी हमले के खतरे में जी रहा है और बुरकिनी पर दक्षिण पूर्वी शहरों के मेयरों के फैसलों के कारण देश की छवि दांव पर लगी है, फ्रांस को उनके जैसे अनुभव वाले नेता की जरूरत है. वह कहते हैं, "फ्रांस बहुलता वाला है. हमारा सबका मूल एक नहीं, न हीं एक जैसा चमड़े का रंग या धर्म. इसका आदर होना चाहिए."

सारकोजी के विपरीत जुप्पे ने गर्मियों में दो इस्लामी कट्टरपंथी हमलों के बाद करीब 30 शहरों में बुरकिनी पर लगाए गए प्रतिबंधों के बुखार जैसे माहौल की निंदा की है. वे पूछते हैं, "फ्रांस के समाज को घेरने वाले इस पागलपन का अंत क्या है? क्या हम स्कूलों में लंबी कमीजों पर रोक लगा देंगे?" जुप्पे ने यूनिवर्सिटी में इस्लामी स्कार्फ पर रोक लगाने के विचार का भी विरोध किया है. सारकोजी चाहते हैं कि फ्रांस की धर्मनिरपेक्ष छवि को बढ़ावा देने के लिए स्कार्फ पर रोक होनी चाहिए.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

फिर लौटा फैशन

कहते हैं कि फैशन का भी चक्र होता है, जो कुछ समय बाद घूम कर फिर वहीं आता है. इस बार स्विमसूट के साथ कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है. 2015 में बिकनी की जगह रंगीन वन पीस स्विमसूट का चलन लौटा है.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

शुरुआत

18वीं सदी में पहली बार बेदिंग सूट बने. पूरे तन को ढकने वाले ये बेदिंग सूट ऊन और कपास के बने होते थे. बेहद मोटे फैब्रिक के कारण इन्हें सूखने में बहुत लंबा वक्त लग जाता था.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

बदलाव

20वीं सदी की शुरुआत में जैसे जैसे टूरिज्म का विकास हुआ बेदिंग सूट में भी बदलाव आने लगे. अब ये ढीले ढाले नहीं रह गए थे और इनमें इलास्टिक का इस्तेमाल भी होने लगा था. 1910 की इस तस्वीर में उस समय महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए एक जैसे डिजाइन दिखते हैं.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

मॉडर्न

1920 के दशक में स्विमसूटों ने काफी मॉडर्न लुक ले लिया. बेल्ट, सुनहरे बटन और छोटे छोटे चमकदार सितारों के साथ महिलाओं के स्विमसूट काफी फैशनेबल और अलग दिखने लगे. लेकिन तब ये केवल छोटे साइज में ही उपलब्ध थे यानि मोटी तंदुरुस्त महिलाओं के लिए कोई विकल्प नहीं था.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

हॉलीवुड में

इसके बाद फिल्मों में स्विमसूट के चलन ने जोर पकड़ा. अमेरिकी तैराक एस्थर विलियम्स 1940 की ओलंपिक प्रतियोगिता की तैयारी कर रही थीं लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के चलते यह रद्द हो गयी. इसी दौरान हॉलीवुड एजेंटों का ध्यान उनकी ओर गया और आगे चलकर वह हॉलीवुड की सबसे रईस अभिनेत्रियों में से एक बनीं.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

फिर आईं मर्लिन मुनरो

1940 के दशक में मर्लिन मुनरो ने मशहूर पिरेली कैलंडर के लिए फोटोशूट किया. इसमें स्विमसूट वाली उनकी तस्वीरों की काफी चर्चा हुई पर साथ ही नग्न तस्वीरों के कारण उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी. अभिनेत्री के तौर पर उनका करियर इसके बाद ही शुरू हुआ.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

अजीब अजीब पैटर्न

1960 के दशक में पॉप आर्ट अपनी जगह बना चुका था. इसके बीच अमूर्त और ज्यामितीय पैटर्न का रिवाज आया. फ्रांस के ऑन्द्रे कूरैज ने इस दौरान स्विमसूट पर कई रचनात्मक पैटर्न उकेरे. तस्वीर में बर्लिन में पेश हुए उनके स्विमसूट का नमूना देखा जा सकता है.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

स्टाइलिश टोपी

1960 के दशक में नए स्टाइल की टोपियां बाजार में दिखने लगीं. स्विमिंग के दौरान सर ढकने के लिए रबड़ से बनी टोपियां चल पड़ीं. इससे पहले तक बड़ी बड़ी हैट ही एकमात्र विकल्प था.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

नया दौर

अमेरिकी कार्यक्रम बेवॉच ने 90 के दशक में धमाल मचा दिया. फैशन के जानकार इसे स्विमसूट के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ मानते हैं. बेहद कम कपड़ों से बने चटक लाल रंग के स्विमसूट के कट काफी गहरा बनाए गए. अभिनेत्री पामेला एंडरसन के लिए तो और भी कम कपड़े का इस्तेमाल हुआ.

वक्त के साथ कैसे बदली बिकिनी

कितना कम?

स्विमसूट बनाने वाले डिजायनरों के लिए यह बड़ा सवाल है कि कितना कपड़ा लगाया जाए. 2011 के मायामी फैशन वीक के दौरान इस तरह के लो-कट स्विमसूट पेश किए गए. लेकिन वन पीस के साथ ही अब एक बार फिर कुछ ज्यादा फैब्रिक का चलन शुरू हुआ है.

कट्टरपंथ की राह पर चल निकले संदिग्धों के साथ पेश आने के मुद्दे पर भी दोनों उम्मीदवारों की राय एक दूसरे के एकदम विपरीत है. सारकोजी ने कट्टरपंथ के समर्थक बने संदिग्धों को हमला करने से रोकने के लिए इंटर्नमेंट कैंप बनाने की मांग की है. लेकिन जुप्पे का कहना है कि वे "फ्रेंच स्टाइल का गुआंतानामो नहीं चाहते जहां बिना मुकदमे के हजारों लोगों को कैद रखा जाए." आप्रवासन और इस्लाम को छोड़ दें तो अर्थव्यवस्था पर दोनों उम्मीदवारों में कोई अंतर नहीं है.

मध्यमार्ग दक्षिणपंथी पार्टी की प्राइमरी 20 और 27 नवंबर को दो चरणों में होगी. सोशलिस्ट राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद की घटती लोकप्रियता को देखते हुए यह प्राइमरी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है. इसमें हर वह इंसान भाग ले सकता है जो 2 यूरो की फीस दे और मध्यमार्ग और दक्षिणपंथ के मूल्यों को स्वीकार करे. खस्ताहाल आर्थिक स्थिति के कारण ओलांद को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे कम लोकप्रियता पॉइंट मिले हैं. उन्होंने कहा है कि वह चुनाव लड़ने के बारे में दिसंबर तक फैसला करेंगे. मध्य दक्षिणपंथी प्राइमरी जो जीतता है उसके लिए मई में होने वाले चुनाव जीतने की संभावना अत्यंत प्रबल होगी. संभव है कि दूसरे चरण में मुकाबल उग्र दक्षिणपंथी नेशनल फ्रंट की मारी ले पेन से मुकाबला हो.

महिलाओं के खिलाफ अजीबोगरीब कानून दुनियाभर में हैं, देखिए तो...

महिलाओं के खिलाफ अजीबोगरीब कानून

शादीशुदा महिला का बलात्कार

दिल्ली में 2012 के निर्भया कांड के बाद दुनिया भर में भारत की थूथू हुई. लेकिन एक साल बाद ही कानून में एक नई धारा जोड़ी गई जिसके मुताबिक अगर पत्नी 15 साल से ज्यादा उम्र की है तो महिला के साथ उसके पति द्वारा यौनकर्म को बलात्कार नहीं माना जाएगा. सिंगापुर में यदि लड़की की उम्र 13 साल से ज्यादा है तो उसके साथ शादीशुदा संबंध में हुआ यौनकर्म बलात्कार नहीं माना जाता.

महिलाओं के खिलाफ अजीबोगरीब कानून

अगवा कर शादी

माल्टा और लेबनान में अगर लड़की को अगवा करने वाला उससे शादी कर लेता है तो उसका अपराध खारिज हो जाता है, यानि उस पर मुकदमा नहीं चलाया जाएगा. अगर शादी फैसला आने के बाद होती है तो तुरंत सजा माफ हो जाएगी. शर्त है कि तलाक पांच साल से पहले ना हो वरना सजा फिर से लागू हो सकती है. ऐसे कानून पहले कोस्टा रीका, इथियोपिया और पेरू जैसे देशों में भी होते थे जिन्हें पिछले दशकों में बदल दिया गया.

महिलाओं के खिलाफ अजीबोगरीब कानून

सुधारने के लिए पीटना सही

नाइजीरिया में अगर कोई पति अपनी पत्नी को उसकी 'गलती सुधारने' के लिए पीटता है तो इसमें कोई गैरकानूनी बात नहीं मानी जाती. पति की घरेलू हिंसा को वैसे ही माफ कर देते हैं जैसे माता पिता या स्कूल मास्टर बच्चों को सुधारने के लिए मारते पीटते हैं.

महिलाओं के खिलाफ अजीबोगरीब कानून

ड्राइविंग की अनुमति नहीं

सऊदी अरब में महिलाओं का गाड़ी चलाना गैरकानूनी है. महिलाओं को सऊदी में ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं दिया जाता. दिसंबर में दो महिलाओं को गाड़ी चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया. इस घटना के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार संस्थानों ने आवाज भी उठाई.

महिलाओं के खिलाफ अजीबोगरीब कानून

पत्नी का कत्ल भी माफ

मिस्र के कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को किसी और मर्द के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखता है और गुस्से में उसका कत्ल कर देता है, तो इस हत्या को उतना बड़ा अपराध नहीं माना जाएगा. ऐसे पुरुष को हिरासत में लिया जा सकता है लेकिन हत्या के अपराध के लिए आमतौर पर होने वाली 20 साल तक के सश्रम कारावास की सजा नहीं दी जाती.

हमें फॉलो करें