कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर ना आए

दुनियाभर में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो एक दिन घर से निकले और फिर कभी नहीं लौटे. उनके घरवाले आज भी उनका इंतजार कर रहे हैं. लेकिन सरकारें क्या कर रही हैं?

16 साल पुरानी वह सुबह अब शोभा भट्ट को धुंधली सी ही याद है. पांच लोग उनकी दुकान पर आए और उनके पति श्याम को ले गए. काठमांडू के पास एक छोटी सी दुकान चलाने वाली भट्ट बताती हैं, "उन्होंने कहा कि कुछ सवाल पूछने हैं और थोड़ी देर में वापस आ जाएगा. मेरे पति ने मुझसे कहा कि फिक्र ना करूं, जल्दी ही लौटता हूं." 29 साल के श्याम कभी नहीं लौटे.

शोभा भट्ट का कहना है कि श्याम को माओवादियों ने अगवा किया था. तब नेपाल में माओवादी हिंसा जोरों पर थी. 2006 में राजशाही के खात्मे के साथ हिंसक आंदोलन का समापन हो गया. लेकिन दो बच्चों की मां शोभा का इंतजार आज भी जारी है. एक सुबह वह उम्मीद के साथ जगती है कि श्याम लौट आएगा. अगली सुबह निराशा से भरी उठती है कि वह कभी नहीं लौटेगा. वह कहती हैं, "मुझे तो अब तक नहीं पता कि मेरे पति का क्या हुआ. क्या उसे उन्होंने मार दिया? पता नहीं वह जिंदा है या नहीं. अगर नहीं है तो मुझे उसकी लाश चाहिए ताकि उसका अंतिम संस्कार कर दूं."

तस्वीरों में: जब डूब गई उम्मीद

डूब गई उम्मीद

कभी नहीं लौटेंगे

चीन की राजधानी बीजिंग के एक होटल में कई दिनों से इंतजार कर रहे मुसाफिरों के परिवारवालों ने जैसे ही मलेशियाई प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक का एलान सुना, वे खुद पर काबू नहीं रख पाए.

डूब गई उम्मीद

कैसे समझाएं खुद को

यह महिला दूसरे मुसाफिरों के रिश्तेदारों के साथ किसी चमत्कार की उम्मीद कर रही थी लेकिन हुआ उसका उलटा. अब सिर्फ इस बात का इंतजार है कि किसी तरह विमान का मलबा मिले.

डूब गई उम्मीद

गुस्सा और गम

प्रधानमंत्री नजीब ने संकेत दे दिए हैं कि विमान हादसे का शिकार हो चुका है और अब किसी के बचने की उम्मीद नहीं रही. यह महिला अपने दोनों हाथों को जोड़ कर फफक पड़ी.

डूब गई उम्मीद

मलेशिया पर गुस्सा

गुस्साए लोग बीजिंग की सड़कों पर उतर आए. उन्होंने मलेशिया के दूतावास के सामने प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस से उनकी झड़प भी हुई और उन्होंने मलेशिया को "हत्यारा" करार दिया.

डूब गई उम्मीद

और इंतजार नहीं होता

इन तख्तियों पर चीनी भाषा में लिखा है कि हमें और इंतजार मत कराओ. विमान में सवार लगभग दो तिहाई मुसाफिर चीन के थे. वे लीडो होटल से निकल कर दूतावास तक पहुंचे और प्रदर्शन किया.

डूब गई उम्मीद

प्रदर्शन की इजाजत

आम तौर पर चीन में प्रदर्शन को कुचला जाता है. इस बार ऐसा नहीं हुआ क्योंकि यह दूसरे देश के खिलाफ था. पुलिस ने ट्रैफिक रोक कर प्रदर्शन करने वालों के लिए जगह बनाई.

डूब गई उम्मीद

होटल में डेरा

चीन के लोग लगातार एक होटल में जमा हैं और वे अपने रिश्तेदारों की खैरियत जानने को बेचैन हैं. सोमवार को मलेशियाई प्रधानमंत्री के एलान से पहले भी रिश्तेदार अपनों की जानकारी के लिए उतावले थे.

डूब गई उम्मीद

बोइंग का विमान

लापता विमान अमेरिकी कंपनी बोइंग 777 था, अमेरिका भी इसकी जांच की तह तक जाना चाहता है. क्वालालंपुर एयरपोर्ट के रनवे पर खड़े मलेशियाई विमानों को देखती एक बच्ची.

डूब गई उम्मीद

सबके लिए संदेश

मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर एक एक चौराहे पर यात्रियों के लिए संदेश लिखे जा रहे हैं. विमान में कुल 239 लोग सवार थे, जिनमें से ज्यादातर चीन के थे. आठ मार्च को उड़ने के बाद विमान का पता नहीं.

डूब गई उम्मीद

होटल में प्रार्थना

बीजिंग के लीडो होटल में जमा रिश्तेदार यात्रियों के लिए एक साथ प्रार्थना कर रहे हैं. विमान के सुरक्षित होने की रही सही उम्मीद खत्म हो चुकी है.

किसी अपने का लापता हो जाना एक ऐसा हादसा है जिसमें तकलीफ वक्त के साथ-साथ बढ़ती जाती है. उसका कोई अंत नहीं होता. 30 अगस्त को दुनिया ने "इंटरनेशनल डे ऑफ द डिसअपीयर्ड" मनाया. दुनियाभर में करोड़ों लोग लापता हैं. लेकिन इस क्षेत्र में काम कर रहे कार्यकर्ता कहते हैं कि सरकारों, संस्थाओं और लोगों का ध्यान इस समस्या की ओर उतना नहीं है, जितना होना चाहिए. इंटरनेशनल रेड क्रॉस कमेटी के अध्यक्ष पीटर माउरर कहते हैं, "यह एक त्रासदी है जिससे करोड़ों लोग पीड़ित हैं. लेकिन आज भी इस पर बात नहीं होती. इस तरह की भयानक त्रासदी के प्रति ऐसी उदासीनता बेहद दुखद है."

माउरर कहते हैं कि किसी का लापता हो जाना एक संवेदनशील, सामाजिक और राजनीतिक समस्या है और इंतजार करते लोगों को जवाब खोजने में मदद करने के लिए सरकारों को एक राजनीतिक इच्छाशक्ति पैदा करनी चाहिए.

बच्चे, प्रवासी, कैदी

दुनिया में कितने लोग लापता हैं, अब तक इसका कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. लेकिन 60 देशों में काम करने वाली रेड क्रॉस का अनुमान करोडो़ं में है. लापता लोगों में युद्धों की वजह से घरों से भागने के दौरान परिजनों से बिछड़ गए बच्चों से लेकर किसी वजह से जेल में डाल दिए गए कैदी और देश छोड़कर कहीं और गए प्रवासी तक हैं. दक्षिण एशिया में लापता लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, श्रीलंका, भारत और बाकी एशियाई देशों में दुनिया की 20 फीसदी आबादी रहती है. यह इलाका कुदरती कहर की जद में सबसे ज्यादा है. कभी बाढ़ तो कभी भूकंप की वजह से हर साल हजारों लोग बेघर होते हैं और उनमें से जाने कितने लापता हो जाते हैं.

देखिए, किस देश पर सबसे ज्यादा कहर बरपाएगी कुदरत

किस देश पर सबसे ज्यादा टूटेगा कुदरत का कहर

पहला खुलासा

बीते दशकों में कुदरती कहर की घटनाएं बढ़ी हैं. 1980-82 में ऐसी 400 घटनाएं हुईं जिनमें 50 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. 2012-15 में 900 घटनाएं दर्ज हुईं और 300 अरब डॉलर स्वाहा हो गए.

किस देश पर सबसे ज्यादा टूटेगा कुदरत का कहर

दूसरा खुलासा

रिपोर्ट बताती है कि बांग्लादेश और नीदरलैंड्स दोनों ही पर कुदरती कहर का खतरा बराबर है लेकिन बांग्लादेश नंबर 5 पर है जबकि नीदरलैंड्स 49 पर. ऐसा इसलिए है क्योंकि मूलभूत ढांचा बांग्लादेश में तैयार नहीं है.

किस देश पर सबसे ज्यादा टूटेगा कुदरत का कहर

तीसरा खुलासा

रिपोर्ट में 9 चीजों को ढांचागत जरूरतों में सबसे अहम बताया गया है. ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, संचार, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं, जल सप्लाई, खाना, वित्त, बीमा, प्रशासन की हालत और मीडिया और संस्कृति सब कुछ मिलकर एक सुरक्षित देश बनाते हैं.

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चौथा खुलासा

अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर सही नहीं होगा तो लोग ज्यादा खतरे में होंगे. 2008 के सिचुआन भूकंप में 5000 छात्र सिर्फ इसलिए मारे गए क्योंकि उनके स्कूल का निर्माण घटिया था.

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पांचवां खुलासा

अफ्रीकी देश जैसे टोगो, बेनिन और नाइजीरिया बाढ़, अकाल और बढ़ते समुद्री जलस्तर आदि के कारण बेहद खतरनाक जोन में हैं. वहां विपदा की स्थिति में ढांचागत तैयारी भी खराब है.

फिर इस इलाके में हिंसक विद्रोह भी लोगों को लील गए हैं. श्रीलंका के 26 साल लंबे सैन्य विद्रोह से लेकर कश्मीर में आजादी की मांग से जुड़े आतंकवाद तक ऐसे कई जरिये हैं जो लोगों के लापता हो जाने का कारण बने हैं. जैसे, इसी महीने बांग्लादेश में पुलिस ने आतंकवाद के आरोप में कई लोगों को हिरासत में लिया लेकिन उनका कोई अता-पता नहीं है. देश की मानवाधिकार संस्था 'अधिकार' का कहना है कि पिछले सात साल में खुद को पुलिस बताने वाले लोगों के साथ गए 287 लोग कभी घर नहीं लौटे. इनमें से 38 के शव मिल चुके हैं. 132 लोगों का पता नहीं चला कि वे कहां हैं और बाकी 117 अपने पीछे सिर्फ इंतजार छोड़ गए हैं.

8000 कश्मीरी

कुछ ऐसा ही हाल कश्मीर का भी है. भारतीय कश्मीर के वुनीगाम गांव में 70 साल की हाजरा बेगम अपने बेटे बशीर की एक आहट का इंतजार कर रही हैं. वह बताती हैं, "आर्मी वाले मेरे बेटे को उसकी दुकान से ले गए थे. उसकी बेकरी थी. जब आर्मी वाले उसे ले गए, उसके हाथों पर आटा लगा हुआ था. आर्मी वालों ने कहा कि वह हिरासत से भाग गया है. लेकिन मुझे उनका यकीन नहीं है. आर्मी ने हमारी रोजी-रोटी ही नहीं छीनी, हमारा बेटा भी छीन लिया."

कार्यकर्ता बताते हैं कि भारतीय कश्मीर में आठ हजार से ज्यादा लोग लापता हैं. ज्यादातर युवा हैं. बहुत से आतंकवादी या पूर्व आतंकवादी हैं. लेकिन मासूम नागरिकों की भी कमी नहीं है. हर साल इनके परिजन 30 अगस्त को जमा होते हैं और दुआ करते हैं कि एक दिन उनका इंतजार खत्म होगा. ऐसी ही दुआ दुनियाभर में करोड़ों लोग कर रहे हैं क्योंकि दुआ के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है.

देखिए, आज भी कहां कितने लोग गुलाम हैं

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 10, इंडोनेशिया

इंडोनेशिया में सात लाख से ज्यादा लोग गुलाम हैं. यह शीर्ष के 10 देशों में इसी साल शामिल हुआ है.

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 9, डीआर कांगो

इस अफ्रीकी देश में एक साल के भीतर दासों की संख्या दोगुनी हो गई है अब यहां 8 लाख से ज्यादा गुलाम हैं.

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 8, नाइजीरिया

यहां 8 लाख 75 हजार गुलाम हैं.

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 7, रूस

दुनिया की ताकत बनने को लड़ते रूस में 10 लाख गुलाम हैं.

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 6 उत्तर कोरिया

परमाणु हथियार जुटाने में लगे देश में गुलामों की संख्या भी अच्छी खासी है. यहां कुल 11 लाख लोग गुलामी की बेड़ियों में जकड़े हैं.

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 5, उज्बेकिस्तान

यह देश 12 लाख से ज्यादा गुलामों का घर बन चुका है.

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 4, बांग्लादेश

भारत के इस पड़ोसी देश में 15 लाख 31 हजार लोग गुलाम हैं. यहां गुलामों की संख्या में बीते एक साल में काफी ज्यादा इजाफा हुआ है.

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 3, पाकिस्तान

देश की 1.13 फीसदी आबादी यानी करीब 21 लाख 34 हजार लोग गुलाम हैं.

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 2, चीन

दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में 33 लाख गुलाम हैं. आबादी के लिहाज से 0.247 फीसदी.

2017 में कहां कितने गुलाम

नंबर 1, भारत

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में एक करोड़ 83 लाख लोग गुलाम हैं. ये भारत की कुल आबादी का 1.4 फीसदी है.

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