कैसे काम करता है हत्यारों का दिमाग!

यूरोप, अमेरिका और अब जापान में हत्याकांड. आत्महत्याओं पर रिसर्च करने वाले गेऑर्ग फीडलर से हमने पूछा कि हत्यारों का दिमाग कैसे काम करता है.

यूरोप और अमेरिका के विभिन्न शहरों में हाल ही में हुए कई हमलों में हमलावरों में एक बात साझी थी. वे सब के सब डिप्रेशन यानी अवसाद के शिकार थे. आत्महत्याओं पर रिसर्च करने वाले गेऑर्ग फीडलर से हमने पूछा कि ऐसे हत्यारों का दिमाग कैसे काम करता है.

अगर डिप्रेशन हो जाए तो कोई व्यक्ति दूसरों के खिलाफ हथियार उठा सकता है?

पहले तो मैं यह बात साफ कर दूं कि लोग कहते हैं, फलां आदमी में डिप्रेशनन के संकेत थे. इसका मतलब

है कि आपको लगता है फलां आदमी डिप्रेशन का शिकार था. अगर किसी में डिप्रेशन के संकेत दिखें तो जरूरी नहीं कि वह बीमार ही हो. और अगर ऐसा हो भी तो आमतौर पर ऐसे लोग बंदूक उठाकर दूसरों को मारने नहीं निकल पड़ते. जो लोग अवसाद में होते हैं वे दरअसल खुद पर ही गुस्सा निकालते हैं. इसलिए आप यह नहीं कह सकते कि डिप्रेशन इस तरह के हमलों की वजह है.

जर्मनी में डिप्रेशन की क्या स्थिति है?

अगर सिर्फ संकेतों की बात करेंगे तो एक तिहाई लोगों में ऐसे संकेत दिख जाएंगे. लेकिन डिप्रेशन बहुत विस्तृत है. परेशान रहने वाले, दुखी रहने वाले, खुद को हर बात के लिए दोषी समझने वाले लोग बहुत हैं लेकिन जरूरी नहीं कि वे बीमार ही हों. असल में डिप्रेशन बहुत गंभीर बीमारी है. इसके शिकार लोग तो हफ्तों तक सो नहीं पाते हैं.

देखें: बुरी सोच वालों का दिमाग कैसे चलता है

बुरी सोच वाले, तेरा दिमाग कैसा?

मैं परेशां, तू परेशां..

हर वक्त बुरा सोचने वाला इंसान खुद तो परेशान रहता ही है, वह अपने आसपास वालों को भी खूब परेशान कर के रखता है. उसकी शिकायतें सुनने वाला भी बुरा सोचने लगता है और इसका असर दोनों की सेहत पर पड़ता है.

बुरी सोच वाले, तेरा दिमाग कैसा?

केमिकल लोचा

हमारा दिमाग किसी बिजली के कनेक्शन की तरह काम करता है. बहुत से बिंदु तारों से एक दूसरे से जुड़े होते हैं. इन तारों से ही सिग्नल एक बिंदु से दूसरे में पहुंचता है. जब हम कुछ बुरा सोचते हैं, तो वह एक ख्याल और भी कई बुरे ख्यालों को जगा देता है.

बुरी सोच वाले, तेरा दिमाग कैसा?

बार बार

यह केमिकल लोचा कुछ ऐसा होता है कि वही सिग्नल बार बार लूप बना कर घूमते रहते हैं. इसलिए वही बुरा ख्याल बार बार आपको परेशान करता रहता है और आप उससे पीछा नहीं छुड़ा पाते.

बुरी सोच वाले, तेरा दिमाग कैसा?

शख्सियत पर असर

यह एक ऐसा दुश्चक्र है जिससे बाहर निकालना बेहद मुश्किल है. ये बुरे ख्याल इंसान को इतना परेशान करते हैं कि पूरी शख्सियत पर ही इसका असर दिखने लगता है.

बुरी सोच वाले, तेरा दिमाग कैसा?

तो क्या करें

हम अपने दिमाग में अच्छे और बुरे ख्यालों के स्विच को खुद ऑन ऑफ कर सकते हैं. जिस तरह से बुरे ख्याल दिमाग में फैलते हैं, उसी तरह अच्छे ख्यालों के साथ भी होता है. अपने अच्छे अनुभवों के बारे में सोचिए और मुस्कुराइए.

बुरी सोच वाले, तेरा दिमाग कैसा?

खुश रहिए

हर उस बात के बारे में, हर उस इंसान के बारे में सोचिए, जो आपको खुशी देता है. इस तरह से आप दिमाग में तनाव को पैदा होने से रोक सकते हैं.

बुरी सोच वाले, तेरा दिमाग कैसा?

चिक चिक करने वालों से बचें

आपका मिजाज कैसा होगा यह बहुत हद तक इस पर भी निर्भर करता है कि आपके इर्दगिर्द किस तरह के लोग हैं. अगर आप हर वक्त चिक चिक करने वाले लोगों से घिरे रहते हैं, तो संभव है कि आप भी उन्हीं जैसे हो जाएंगे.

बुरी सोच वाले, तेरा दिमाग कैसा?

डिप्रेशन का खतरा

हर वक्त बुरा सोचने से डिप्रेशन भी हो सकता है और ऐसे में आपको डॉक्टर के पास भी जाना पड़ सकता है. डिप्रेशन के लक्षणों के बारे में जानने के लिए ऊपर दिए गए "+और" पर क्लिक करें.

म्यूनिख में हमला करने वाला लड़का 18 साल से भी छोटा था. क्या उसकी उम्र का लड़का ऐसा भयानक काम कर सकता है?

ऐसे मामलों में किसी भी तरह की धारणा बनाने से बचना चाहिए. उस अपराध के पीछे कई कारण थे. बताया जाता है कि उसका मानसिक रोग के लिए इलाज चल रहा था. यानी हो सकता है मानसिक रोग भी अपराध के पीछे एक वजह रही हो. लेकिन सिर्फ एक वजह हुई. कंप्यूटर गेम्स आज के युवाओं में कितनी लोकप्रिय हैं. वे तो हिंसा को बढ़ावा देती हैं. लेकिन सिर्फ एक कंप्यूटर गेम किसी को हत्यारा बनाने का काम नहीं कर सकती. हम लोग आसान वजह खोज रहे हैं. इस तरह की घटनाओं की वजह बहुत जटिल होती हैं.

तस्वीरों में: डिप्रेशन के 10 लक्षण

डिप्रेशन के 10 लक्षण

थकान

मन अच्छा तो तन चंगा. जब दिमाग ही ठीक से काम नहीं कर रहा होगा, तो वह शरीर को कैसे संभालेगा. इसलिए डिप्रेशन से गुजर रहे लोग कई बार ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

नींद में गड़बड़

डिप्रेशन कई तरह के होते हैं, इसलिए नींद का कोई एक पैट्रन नहीं होता. कुछ लोग अवसाद के कारण रात रात भर नहीं सो पाते. इसे इंसॉम्निया कहा जाता है. तो कुछ जरूरत से ज्यादा सोने लगते हैं.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

पीठ में दर्द

हमारी रीढ़ की हड्डी गर्दन से ले कर कूल्हे तक शरीर को संभालती है. ज्यादा तनाव से यह प्रभावित होती है और पीठ का दर्द शुरू होता है. कई लोगों को लगातार सर में दर्द भी रहता है जो दवाओं से भी दूर नहीं होता.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

चिड़चिड़ापन

किसी के चिड़चिड़ेपन का मजाक उड़ाना बहुत आसान है. औरतों को "उन दिनों" का ताना मिल जाता है, तो मर्दों को बीवी से लड़ाई का. लेकिन यह इससे कहीं ज्यादा हो सकता है.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

एकाग्रता की कमी

अगर दिमाग को कंप्यूटर मान लिया जाए, तो समझिए कि डिप्रेशन में उसका प्रोसेसर ठीक से काम नहीं कर पाता. आप एक काम पर टिक नहीं पाते, छोटी छोटी बातें भूलने लगते हैं.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

गुस्सा

गुस्से और चिड़चिड़ेपन में फर्क होता है. डिप्रेशन के दौरान इंसान काफी तनाव से गुजरता है. वह सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, खुद पर भी गुस्सा हो जाता है. झगड़ने की जगह उस व्यक्ति को समझने, उससे बात करने की कोशिश करें.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

डर

किसी के डर को निकालने के लिए उसे तर्क समझाने लगेंगे तो कोई फायदा नहीं होगा. अवसाद से गुजर रहा व्यक्ति तर्क नहीं समझता. उसे किसी भी चीज से डर लग सकता है, अंधेरे से, बंद कमरे से, ऊंचाई से, अंजान लोगों से.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

खराब हाजमा

आप सोच रहे होंगे कि भला दिमाग का हाजमे से क्या लेना देना हो सकता है? याद कीजिए बचपन में परीक्षा के डर से कैसे पेट खराब हो जाया करता था. डिप्रेस्ड इंसान हर वक्त उसी अनुभव से गुजरता है.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

सेक्स में रुचि नहीं

मर्दों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन आम होता है. परेशानी की बात यह है कि यह किसी दुष्चक्र जैसा है क्योंकि अपने पार्टनर की उम्मीदों पर खरा ना उतरना भी डिप्रेशन की वजह बन सकता है.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

बुरे ख्याल

डिप्रेशन से गुजर रहे लोग अक्सर अपनी या दूसरों की जान लेने के बारे में सोचते हैं. यहां तक कि नींद में भी उन्हें बुरे ख्याल आते हैं. कई बार इन बुरे सपनों के डर से भी वे सो नहीं पाते.

डिप्रेशन के 10 लक्षण

मदद

बहुत जरूरी है कि डिप्रेस्ड इंसान की मदद की जाए. डॉक्टर के पास जाने और दवाई से हरगिज परहेज नहीं करना चाहिए. जिस तरह किसी भी शाररिक बीमारी को ठीक करने के लिए दवा और प्यार दोनों की जरूरत पड़ती है, ठीक वैसा ही मानसिक बीमारी के साथ भी होता है.

इस तरह की घटनाओं के लिए एक्सटेंडेड सूईसाइड यानी विस्तृत आत्महत्या जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह होता क्या है?

जब लोग आत्महत्या करने से पहले अपने करीबी लोगों की जान ले लेते हैं तब इन शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है. जैसे कोई मां मरने से पहले अपने बच्चों को मार डाले. लेकिन इसके पीछे भावना यह होती है कि मेरे बाद इनका क्या होगा. लेकिन म्यूनिख जैसे हमलों में यह भावना नहीं थी.

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