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समाज

अतिवादियों के प्रति सचेत करेगी फेसबुक

२ जुलाई २०२१

सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक अब अपने ग्राहकों को ‘अतिवादी सामग्री’ के प्रति सचेत करेगी. इसके लिए यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजे जाएंगे.

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तस्वीर: picture-alliance/dpa/empics/D. Lipinski

गुरुवार को फेसबुक ने कहा कि ग्राहकों को बताया जाएगा कि उनकी फेसबुक वॉल पर ऐसी सामग्री हो सकती है, जो उग्रवाद से संबंधित हो. ट्विटर पर फेसबुक के कुछ नोटिफिकेशन की तस्वीरें पोस्ट की गई हैं, जिनमें फेसबुक यूजर्स से ऐसे सवाल पूछे गए हैं – क्या आप इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आपका कोई जानकार उग्रवादी हो रहा है?

एक नोटिफिकेशन में यूजर्स को बताया गया है कि संभवतया उन्होंने अतिवादी सामग्री देखी है. दोनों ही जगहों पर यूजर्स को मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया है.

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दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट पर लगातार इस बात का दबाव रहा है कि उसका इस्तेमाल अतिवादी सामग्री के प्रसार के लिए ना हो. सरकारें और सामाजिक कार्यकर्ता दोनों ही फेसबुक को ऐसे कदम उठाने के लिए कहते रहे हैं कि उसके प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल आतंकवादी या उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नहीं होना चाहिए.

अमेरिका में शुरुआत

अमेरिका में 6 जनवरी को कैपिटल हिल पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के समर्थकों की चढ़ाई के बाद अमेरिका में फेसबुक पर अतिवादियों को मंच देने के खिलाफ आवाजें तेज हुई थीं.

फेसबुक का कहना है कि अभी वह परीक्षण कर रही है, जिसके तहत चेतावनियों को सिर्फ अमेरिका में उतारा गया है. बाद में इसे दुनियाभर के यूजर्स के लिए शुरू किया जा सकता है.

फेसबुक ने एक बयान में कहा, "यह परीक्षण हमारे उन वृहद प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत हम फेसबुक इस्तेमाल करने वाले लोगों को उग्रवादी सामग्री का सामना होने पर मदद करने के तरीके खोज रहे हैं. हम स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रहे है और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में हमारे पास बताने के लिए और बहुत कुछ होगा.”

क्राइस्टचर्च हमले का असर

फेसबुक ने कहा कि उसकी ये कोशिशें ‘क्राइस्टचर्च कॉल टु एक्शन' मुहिम का हिस्सा हैं. न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में 2019 में एक बंदूकधारी ने स्थानीय मस्जिद पर हमला किया और गोलियां दाग कर दर्जनों जानें ले ली थीं. उस हमले का फेसबुक पर सीधा प्रसारण हुआ था. जिसके बाद तकनीकी कंपनियों पर अपने मंच का इस्तेमाल अतिवादियों को न करने देने के कदम उठाने का दबाव बढ़ा था. तभी ‘क्राइस्टचर्च कॉल टु एक्शन' मुहिम शुरू हुई थी, जिसमें कई तकनीकी कंपनियां शामिल हैं.

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फेसबुक ने कहा कि अपने शुरुआती परीक्षण में दोनों तरह के यूजर्स की पहचान की जा रही है, वे भी जिनके सामने से अतिवादी सामग्री गुजरी हो, और वे भी जिनकी सामग्रियों को फेसबुक ने कभी अतिवादी मानते हुए हटाया हो.

कंपनी ने हाल के सालों में हिंसक गतिविधियों और नफरत फैलाने वाले समूहों के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं. उसका कहना है कि नियम सख्त किए गए हैं और इन नियमों का उल्लंघन करने वाली सामग्रियों और लोगों को हटाया जा रहा है. तब भी संभव है कि ऐसी सामग्री हटाए जाने से पहले कुछ लोगों तक पहुंच जाए.

वीके/एए (रॉयटर्स)