भारत में हो सकते हैं यूरोप जैसे आईएस हमले

भारत जैसे बड़े देश में कुछ सौ आईएस संदिग्धों का होना कोई बड़ी चिंता की बात नहीं होनी चाहिए फिर भी सरकार चिंतित है और हर हाल में इन संदिग्धों की पहचान कर स्थिति बिगड़ने को रोकना चाह रही है.

सऊदी अरब ने भारतीय युवाओं को अल कायदा और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के लिए भर्ती करने वाले एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है. भारत सरकार की सुरक्षा एजेंसियां इस समय सऊदी अरब के साथ संदिग्ध शबील अहमद की पहचान तय करने में लगी हैं. उसकी गिरफ्तारी एक लुक आउट नोटिस जारी करने के बाद हुई है. संदिग्ध के बड़े भाई ने 2007 में ब्रिटेन के ग्लासगो में एक आत्मघाती हमला किया था जिसमें उसकी मौत हो गई थी.

भारत सरकार का दावा है कि आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएस ने भारत में बहुत कम युवकों को आकर्षित किया है. इसके बावजूद आईएस के प्रभाव को रोकने में सरकार कोई कोताही नहीं बरतना चाहती. आईएस लड़ाकों की आत्मघाती शैली से कुछ लोगों के द्वारा ही बड़ा नुकसान पहुंच सकता है, इस आशंका को देखते हुए सरकार सभी संदिग्धों की पहचान जुटाने में लगी हुई है.

जानें, क्या है आईएस

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

आईएस में भर्ती

सीरिया और इराक के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने वाले इस आतंकी गुट ने 29 जून 2014 को खिलाफत का एलान किया. तब से अब तक संगठन ने अपनी संख्या बढ़ाने में बड़ी कामयाबी पाई है. रिपोर्टों के मुताबिक 2011 से अब तक आईएस में 90 देशों से 20,000 से ज्यादा लोग भर्ती हुए हैं.

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

इतिहास को नुकसान

सीरिया में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जगहों को आईएस ने भारी नुकसान पहुंचाया है. ऐतिहासिक इमारतों और संग्रहालयों में लूटपाट की घटनाएं सामने आई हैं. आईएस ने इनसे मिली रकम का इस्तेमाल खुद को मजबूत करने में किया है.

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

कत्लेआम

आईएस की क्रूरता किसी से छुपी नहीं है. आईएस की ओर से अक्सर जारी किए जाने वाले वीडियो उसके जुल्म की गवाही देते हैं. लोगों का सिर कलम कर देना, गर्दन रेत देना या जिंदा जला देना इनके आम कुकृत्य हैं.

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

तकनीक के जानकार

यह आतंकवादी संगठन आधुनिक दौर में तकनीक की अहमियत समझता है. अपने प्रचार के लिए ये आतंकी गुट सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करता है. अपने वीडियो बनाने में ये संगीत, एक्शन सीन इत्यादि का इस्तेमाल कर रिलीज करते हैं, जिससे और लोगों को अपने साथ जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकें.

आईएस से जुड़े पांच तथ्य

खर्च

आईएस के पास इतना पैसा है कि वह अपनी आतंकवादी गतिविधियों को आराम से अंजाम दे रहा है. उसने डोनेशन पाने का अपने लिए एक मजबूत तंत्र भी विकसित कर लिया है. आतंकी संगठन धन जुटाने के लिए बंधक बनाता है और ब्लैकमेल भी करता है. कई छोटी बड़ी कंपनियां भी इसका निशाना बनी हैं.

‘लोन वुल्फ अटैक' का खतरा

महाराष्ट्र के परभणी जिले से पिछले महीने आईएस के दो संदिग्धों की गिरफ्तारी और उनसे हुई पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आईएस, मुंबई और देश के बड़े शहरों में ‘लोन वुल्फ अटैक' करने की योजना बना रहा है. ‘लोन वुल्फ' यानी कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी धार्मिक आतंकवादी संगठन के विचारों से प्रभावित होकर किसी सरकार को सबक सिखाने के लिए अकेला ही निकल पड़े. ऐसी आशंका है कि आईएस, भारत में ऐसे कई ‘लोन वुल्फ' तैयार कर चुका है.

महाराष्ट्र एटीएस लगातार पूछताछ में परभणी से पकड़े गए नासेर बिन चाऊस ने बताया कि वह ‘लोन वुल्फ अटैक' करने वाला था. कुछ दिन पहले ही ‘लोन वुल्फ अटैक' की तर्ज पर ही फ्रांस में आतंकी हमला हुआ था, जहां एक आतंकवादी ने ट्रक से सैक़ड़ों लोगों को कुचल दिया.

तस्वीरों में देखें, कितना क्रूर है आईएस

आईएस की क्रूरता

रणनीति

32 पेज का कथित दस्तावेज जिहाद का इतिहास बताते हुए सामयिक रणनीति बयान करता है.

आईएस की क्रूरता

खुली लड़ाई

जिहादी संगठन की हिंसक अंतरराष्ट्रीय रणनीति के अंत में खुली लड़ाई की बात कही गई है.

आईएस की क्रूरता

क्रूरता

आईएस अपने विरोधियों को हिंसक तरीके से मारता रहा है और उसकी तस्वीर रिलीज करता रहा है.

आईएस की क्रूरता

बर्बर

अफगानिस्तान में उसने तालिबान समर्थकों को लाइन में बिछाकर भूमिगत सुरंगों से उड़ा दिया.

आईएस की क्रूरता

समर्थन

आईएस को पश्चिमी देशों से भी लड़ाके मिल रहे हैं. आईएस के प्रोपेगैंडा वीडियो में एक जर्मन लड़ाका.

आईएस की क्रूरता

निशाना

आईएस दस्तावेज में पश्चिमी देशों के बदले भारत को जिहाद का अगला युद्धक्षेत्र बताया गया है.

आईएस की क्रूरता

कत्लेआम

सीरिया और इराक के जिन इलाकों में आईएस ने कब्जा किया है, वहां कत्लेआम मचाया है.

आईएस की क्रूरता

सेक्स दासता

इराक के यजीदी इलाके में आईएस ने मर्दों को मार डाला और औरतों तथा बच्चियों को बंधक बनाया.

आईएस की क्रूरता

तोड़ फोड़

इराक के मोसुल शहर में आईएस के लड़ाकों ने प्राचीन धरोहरों की बेरहमी से तोड़ फोड़ की.

आईएस की क्रूरता

धरोहर

इराक के पालमिरा शहर पर कब्जे के बाद दुनिया को वहां के विश्व धरोहरों की चिंता सता रही है.

आईएस की क्रूरता

दरिंदगी

आईएस के लड़ाकों ने पालमिरा के प्राचीन धरोहरों के विशेषज्ञ 81 वर्षीय खालेद अल असद को मार डाला.

सूचना और खुफिया तंत्र पर ध्यान

आईएस के बढ़ते खतरे और किसी संभावित हमले से निपटने के उपायों पर केंद्र की सरकार राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है. आतंक के खाते से निपटने के लिए केंद्रीय और राज्यों के खुफिया तंत्र के बीच बेहतर तालमेल और सूचना प्रवाह को दुरुस्त करने पर ज़ोर दिया जा रहा है. निश्चित अंतराल में बैठक और समीक्षा पर जोर दिया जा रहा है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृहमंत्रालय और राज्य पुलिस के बीच खुफिया सूचना के प्रवाह को गति देने और तालमेल बढ़ाने पर केंद्र सरकार जोर दे रही है. सुरक्षा और खुफिया तंत्र को मजबूत करने की सार्थक कोशिशें की गयी है. हालांकि इसमें हुई चूक के चलते देश को गंभीर परिणाम भी भुगतने पड़े हैं.
आतंकी मामलों की जांच के किए बनी एजेंसी एनआईए ना केवल सफलतापूर्वक काम कर रही है और आतंकी मॉड्यूल के साजिशों को नाकाम करने में कामयाब रही है. खुफिया सूचना के आदान प्रदान के लिए मल्टी एजेंसी सेंटर बेहतर तालमेल के साथ काम कर रहा है. नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड बनाने का काम भी चल रहा है. वैसे, नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर बनाने का काम राजनैतिक वजहों से रुका पड़ा है.
आईएस के वैचारिक प्रभाव रोकने के लिए साइबर सेल को भी सक्रिय किया गया है. वह इंटरनेट व वेबसाइट्स पर आईएस की गतिविधियों पर बराबर नजर रख रही है जिसके चलते एनआईए को संदिग्धों तक पंहुचने में कामयाबी मिली है. आईएस एवं इस तरह के आतंक से लड़ने की कोशिश को मजबूती देने के लिए भारतीय एजेंसिया अमेरिका, रूस, फ़्रांस और अन्य मित्र देशों की एजेंसियों के साथ भी संपर्क में है.

एशियाई देशों से आईएस को मिले जिहादी

एशियाई देशों से आईएस में जाते जिहादी

चीन

चीन में सार्वजनिक व्यवस्था के लिए जिम्मेदार मंत्री मेंग होंग्वाई ने बताया है कि कोई 300 के लगभग चीनी लोग आईएस के लिए लड़ने पहुंचे हैं. मुसलमानों, उइघूर समेत कई अल्पसंख्यक समुदायों के लोग मलेशिया के रास्ते सीरिया गए हैं. मेंग ने कहा, "वे मलेशिया को टर्मिनल की तरह इस्तेमाल करते हैं."

एशियाई देशों से आईएस में जाते जिहादी

इंडोनेशिया

इंडोनेशिया के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014 के अंत तक 60 इंडोनेशियाई नागरिक कथित रूप से आईएस में शामिल होने के लिए सीरिया चले गए थे. हाल ही में तुर्की में एक टुअर के दौरान 16 इंडोनेशियाई लोग गायब हो गए. माना जा रहा है कि वे तुर्की के रास्ते सीरिया जाने के लिए खुद ही टुअर समूह से अलग हो गए.

एशियाई देशों से आईएस में जाते जिहादी

पाकिस्तान

एशियाई देशों में से आईएस में शामिल होने वाले सबसे ज्यादा लोग पाकिस्तान से हैं. आईएस इन्हें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर के पास के पिछड़े इलाकों से लाता है. इनमें वे प्रशिक्षित लोग भी शामिल हैं जो पहले तालिबान से जुड़े थे.

एशियाई देशों से आईएस में जाते जिहादी

अफगानिस्तान

अमेरिकी सैन्य रिपोर्ट के मुताबिक अबूबकर अल बगदादी के नेतृत्व में आईएस समूह अफगानिस्तान से लड़ाकों को अपने साथ शामिल कर रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014 के अंत तक अफगानिस्तान से 23 लोग आईएस में शामिल होने के लिए सीरिया गए.

राज्य सरकारों के साथ समन्वय पर ज़ोर

संदिग्धों से पूछताछ और खुफिया जानकारी के मुताबिक, आईएस भारत में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकी गुटों की मदद लेने की कोशिश कर रहा है. केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक, और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों के गरीब मुसलमान युवाओं पर आतंकी संगठन की नजर है. हालांकि अब तक पकड़े गए ज्यादातर युवा पढ़े लिखे हैं. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक अब तक करीब 100 भारतीय आंतकी संगठन आईएस में शामिल हो गए हैं. इसके अलावा आईएस भटके हुए युवाओं को जोड़ने में की कवायद में भी सक्रिय है.

केंद्र सरकार, राज्यों की सरकारों के साथ मिल कर ऐसे युवाओं पर खास नजर रख रही हैं जो आतंक के शिकार हो सकते हैं. सरकार ऐसे लोगों की सोशल मीडिया की गतिविधियों पर नजर रख रही है जो आतंकी दुष्प्रचार का निशाना बन सकते हैं. साथ ही साथ उन्हें कल्याणकारी एवं रोजगार योजनाओं के जरिए मुख्यधारा में शामिल करने के लिए प्रयास भी किये जा रहे हैं. अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी एवं रोजगार से जुड़ी योजनाएं पर काम कर रहा है. विशेषकर संवेदनशील इलाकों में इस तरह की योजनाएं शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर का का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों ने युवकों को कट्टरपंथ से निकालने के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए हैं.

आईएस की ओर से लड़ने की इच्छा रखने वाले भारतीयों की संख्य मुट्ठी भर ही है, इसके बावजूद सरकार की चिंता और और उन्हें रोकने का प्रयास जायज है. क्योंकि ये मुट्ठी भर लोग उन गरीब बेरोजगार या धार्मिक रूप से कट्टर युवाओं के लिए वायरस का काम कर सकते हैं जो स्वयं को किसी ना किसी रूप में अन्याय का शिकार मानते हैं.

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