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परीक्षा केंद्र पहुंचने से पहले ही क्यों लीक हो जाते हैं पेपर

समीरात्मज मिश्र
२९ नवम्बर २०२१

उत्तर प्रदेश में रविवार को हुई शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी परीक्षा शुरू होते ही निरस्त कर दी गई, क्योंकि परीक्षा पेपर लीक हो गया. यह पहला मौका नहीं है जब उत्तर प्रदेश में ऐसा हुआ है.

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तस्वीर: David Talukdar/Zumapress/picture alliance

रविवार को उत्तर प्रदेश में परीक्षार्थियों को बीच में ही वापस चले जाने के निर्देश दे दिए गए. राज्य भर में करीब 21 लाख परीक्षार्थी अलग-अलग जगहों पर परीक्षा देने पहुंचे थे. परीक्षा निरस्त होने की सूचना पर कई जगह हंगामा भी हुआ. पेपर लीक होने की सूचना मिलते ही राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कदम उठाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोषी लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और रासुका के तहत कार्रवाई की जाए. मुख्यमंत्री ने दोषी लोगों की संपत्ति जब्ती के भी निर्देश दिए हैं. हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब नकल माफिया ने परीक्षा में सेंध लगाई है.

अभी कुछ दिन पहले ही अध्यापक परीक्षा के लिए प्रयागराज के एक केंद्र में भी पेपर लीक हो गया था और इस मामले में एक कॉलेज के प्राचार्य समेत कई लोग गिरफ्तार भी हुए थे. इन सबसे बचने के लिए इस बार टीईटी के लिए सरकार की ओर से पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे. किसी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए एसटीएफ की सभी यूनिटों को निगरानी के लिए लगाया गया था, लेकिन कथित नकल माफिया इन सारी कवायदों को धता बताते हुए पेपर लीक कराने में कामयाब हो गए.

विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस परीक्षा में 21 लाख 65 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. सतीष द्विवेदी ने कहा है कि छात्रों को दोबारा परीक्षा फॉर्म नहीं भरना होगा और उनके परीक्षा केंद्र भी वही रहेंगे. यही नहीं, परीक्षार्थियों को एडमिट कार्ड दिखाने पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए रोडवेज बसों का किराया भी नहीं देना पड़ेगा. शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी का कहना है कि परीक्षा एक महीने के भीतर यानी 26 दिसंबर से पहले करा ली जाएगी. इस बीच, एसटीएफ ने परीक्षा लीक मामले में कई जगहों से 29 लोगों की गिरफ्तारियां भी की हैं. वहीं परीक्षार्थियों में इसे लेकर काफी रोष है.

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यूपी टीईटी परीक्षा का आयोजन साल में एक बार होता है. इस परीक्षा के तहत दो पेपर होते हैं. पहला पेपर उन अभ्यर्थियों के लिए होता है जो कक्षा 1 से 5 तक शिक्षक बनना चाहते हैं जबकि पेपर दो उनके लिए है जो कक्षा छह से आठ तक के अध्यापक बनना चाहते हैं. यूपी टीईटी पेपर लीक होने के बाद राज्य की योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई. पूर्व मुख्यमंत्री और सपा नेता अखिलेश यादव और बीएसपी नेता मायावती के अलावा कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी भी इस मामले में सरकार पर हमलावर हो गई हैं. योगी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल के दौरान आधा दर्जन से ज्यादा परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं जिनमें इंस्पेक्टर भर्ती से लेकर एसससी के पेपर्स तक शामिल हैं.

पहले भी होते रहे हैं पेपर लीक

मार्च 2017 में योगी सरकार आने के चार महीने बाद ही जुलाई 2017 में दारोगा भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने 25 और 26 जुलाई 2017 को ऑनलाइन दारोगा भर्ती परीक्षा (सीबीटी) आयोजित की लेकिन उससे पहले ही इसे स्थगित कर दिया गया क्योंकि पेपर पहले ही वॉट्सऐप पर लोगों के पास पहुंच चुका था. करीब 1 लाख 20 हजार अभ्यर्थियों को इसमें शामिल होना था लेकिन परीक्षा रद्द कर दी गई.

फरवरी 2018 में उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया था. सरकार ने एसटीएफ से जांच कराई. एसटीएफ की जांच रिपोर्ट में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता की बात सामने आने के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया और लापरवाही के आरोप में प्रमुख सचिव (ऊर्जा) आलोक कुमार ने विद्युत सेवा आयोग के अध्यक्ष एके सक्सेना और सचिव जीसी द्विवेदी को निलंबित कर दिया था.

सामान्य हुआ पेपरों का लीक होना

साल 2018 में ही अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का पेपर भी लीक हुआ. लोअर सबऑर्डिनेट के 641 पदों के लिए यह परीक्षा होनी थी लेकिन पेपर परीक्षा होने से पहले ही कुछ लोगों के पास पहुंच गए थे. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से कराए जाने वाले कुछ अन्य पेपर भी लीक हुए जिनमें सितंबर 2018 में आयोजित नलकूप चालक (सामान्य चयन) परीक्षा-2016 भी शामिल थी. इस मामले में मेरठ में एसटीएफ ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था. इस परीक्षा में करीब बीस लाख छात्रों ने आवेदन किया था और राज्य भर में करीब 350 केंद्र बनाए गए थे.

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पेपर लीक होने से बहुत से अभ्यर्थियों की मेहनत बेकार चली जाती हैतस्वीर: DW

इसी साल अगस्त में अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की ओर से कराई जा रही प्रारंभिक पात्रता परीक्षा यानी पीईटी की प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्न पत्र भी लीक हो गया था. यह परीक्षा राज्य भर के 75 जिलों में 70 हजार सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराई जा रही थी लेकिन पेपर परीक्षा केंद्र पहुंचने से पहले ही कुछ लोगों के हाथ लग गए थे. इसके अलावा बीएड प्रवेश परीक्षा, सिपाही भर्ती परीक्षा और अन्य कई परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और कई परीक्षाएं निरस्त करनी पड़ीं. प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले एक छात्र ने बहुत ही निराश होकर कहा, "नौकरी देने की बात तो छोड़िए, यूपी में तो सरकार नौकरी देने वाली परीक्षा भी नहीं करा पा रही है."

लीक के पीछे नकल माफिया

दरअसल, परीक्षाओं के पेपर लीक होने के पीछे सबसे बड़ी वजह है नकल माफिया और अधिकारियों के बीच सांठ-गांठ. लखनऊ में एक परीक्षा केंद्र के व्यवस्थापक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "परीक्षा केंद्रों में पेपर लीक होने की संभावना बहुत कम होती है. क्योंकि पेपर सीलबंद पैकेट में आते हैं और बड़े अधिकारियों की निगरानी में होते हैं. ये सरकारी प्रिंटिंग प्रेस, परीक्षा में लगी एजेंसियों और कुछ बड़े अधिकारियों की मिलीभगत से ही संभव हो पाता है."

न सिर्फ उत्तर प्रदेश में बल्कि राजस्थान, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, बिहार आदि कई राज्यों में विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक होने की खबरें पिछले कुछ दिनों में आ चुकी हैं. जानकारों का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षा में कई बार हैकर्स भी सेंध लगाते हैं. सरकारी सर्वर उनके सॉफ्ट टार्गेट होते हैं क्योंकि वे अक्सर बहुत सुरक्षित नहीं होते हैं. परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों से फीस के तौर पर मोटी रकम ली जाती है और एक परीक्षा के लिए संबंधित एजेंसी या आयोग को करोड़ों रुपये की आमदनी होती है. हालांकि पेपर लीक होने के बाद दोबारा परीक्षा कराने पर अभ्यर्थी फीस नहीं देते लेकिन फिर भी एजेंसी को इससे अच्छी खासी आमदनी होती है.

वहीं दूसरी ओर, पेपर बंटने से पहले ही हासिल कर और उसे हल करके कुछ लोग लाखों रुपये में उसे अभ्यर्थियों को बेचते हैं. इसमें बड़े गैंग शामिल होते हैं जिनके तार परीक्षा प्रणाली में लगे अफसरों से जुड़े होते हैं. अक्सर ऐसे लोग कामयाब हो जाते हैं लेकिन यदि पता चल जाता है तो भी जिन लोगों ने पैसे देकर पेपर लिए हों, उन्हें शायद ही उनका पैसा मिल पाता हो. एसटीएफ के एक अधिकारी बताते हैं कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में एक ऐसे गैंग को पकड़ा गया था जिसने कम से कम तीन सौ लोगों को आठ-आठ लाख रुपये में रातों-रात पेपर बेचे थे. इस भर्ती परीक्षा के टॉपर और गैंग से जुड़े कई लोगों को पिछले साल जून में एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था.

समीरात्मज मिश्र