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समाज

वुहान पहुंची डब्ल्यूएचओ की टीम

१४ जनवरी २०२१

डब्लूएचओ ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए महामारी के ग्राउंड जीरो यानी वुहान में विशेषज्ञों का एक दल भेजा है. दिसंबर 2019 में कोरोना वायरस का पहला मामला वुहान में ही सामने आया था.

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तस्वीर: Ng Han Guan/AP Photo/dpa/picture alliance

डब्लूएचओ की जांच टीम का चीन दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब देश ने आठ महीने में पहली बार कोरोना वायरस से पहली मौत दर्ज की है. दुनिया भर में कोरोना वायरस के नए रूप को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. विश्व भर में कोरोना वायरस मामलों की कुल संख्या 9.2 करोड़ से अधिक हो गई है और अब तक करीब 20 लाख लोगों की मौत हो चुकी है. दुनिया के कई देश कोरोना की दूसरी या तीसरी लहर की चपेट में हैं. महामारी के कारण ना केवल जान का नुकसान हो रहा है बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं भी बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं.

चीन के वुहान में गुरुवार को शोधकर्ताओं की एक वैश्विक टीम पहुंची जो यह जांच करेगी कि कोरोना वायरस कैसे फैला. शुरूआत में तो चीन अपने यहां जांच करने के लिए टीम को नहीं आने देना चाह रहा था लेकिन वैश्विक दबाव के बाद उसे सहमति देनी पड़ी. डब्लूएचओ ने 10 सदस्यीय टीम को बीजिंग की मंजूरी मिलने के बाद भेजा है, महीनों तक शी जिनपिंग की सरकार ने जांच दल को आने से रोकने के तमाम कूटनीतिक हथकंडे अपनाए, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक तेद्रोस अधनोम गेब्रयेसुस ने सार्वजनिक तौर पर चीन की इसके लिए आलोचना भी की थी.

चीन में जांच दल को मिलेंगे सबूत?

वैज्ञानिकों को शक है कि चीन के इसी प्रांत से चमगादड़ या अन्य जानवरों से वायरस इंसानों तक फैला जिसके कारण लाखों लोग मारे जा चुके हैं. चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी उन आरोपों से चिढ़ गई जिसमें कहा गया कि उसने बीमारी को फैलने दिया. इसके बदले पार्टी का कहना है कि वायरस विदेश से आया था, मुमकिन हो आयात किए हुए समुद्री भोजन से, लेकिन वैज्ञानिक इसे मानने से इनकार करते आए हैं.

डब्लूएचओ की अंतरराष्ट्रीय टीम में वायरस एक्सपर्ट के अलावा अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं, ये एक्सपर्ट अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, रूस, नीदरलैंड्स, कतर और विएतनाम के हैं. चीनी सरकार के प्रवक्ता ने इस हफ्ते कहा था कि टीम को चीनी वैज्ञानिकों के साथ विचार आदान प्रदान करने का मौका मिलेगा, लेकिन उसने संकेत नहीं दिया कि उन्हें सबूत जुटाने की इजाजत होगी या नहीं.

चीन के चैनल सीजीटीएन की एक पोस्ट में कहा है टीम को दो हफ्ते के लिए क्वारंटीन में जाना होगा और इसी के साथ उनके गले के स्वॉब की जांच होगी. क्वारंटीन में रहने के दौरान डब्लूएचओ की टीम के सदस्य चीनी विशेषज्ञों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए साथ काम कर सकेंगे. ताइवान के चांग गुंग यूनिवर्सिटी में उभरते वायरल संक्रमण अनुसंधान केंद्र के निदेशक शिन-रु-शी कहते हैं, "सरकार को बहुत पारदर्शी और सहयोगी होना चाहिए."

चीनी सरकार ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की, उसने साजिश के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया जिसके बहुत कम सबूत थे, जैसे कि वायरस खराब समुद्री भोजन से फैला होगा. हालांकि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों और एजेंसियों इन सिद्धांतों को खारिज कर दिया. चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के अधिकारी मी फेंग ने बुधवार को कहा था, "डब्ल्यूएचओ को अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की जांच करने की आवश्यकता है."

एक सप्ताह पहले डब्ल्यूएचओ टीम के सदस्य चीन रवाना होने के लिए तैयार थे लेकिन चीन ने ऐन वक्त पर उन्हें वैध वीजा नहीं दिया.

जारी है कोरोना का कहर

जॉन होप्किंस यूनिवर्सिटी की तालिका के मुताबिक वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस मामलों की कुल संख्या 9.2 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि संक्रमण से होने वाली मौतों की संख्या 19.7 लाख से अधिक हो गई हैं. अभी भी अमेरिका दुनिया का सबसे अधिक प्रभावित देश है, जहां संक्रमण के 23,067,796 मामले और 3,84,604 मौतें दर्ज की गईं हैं. संक्रमण के मामलों के हिसाब से भारत 1,05,12,093 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर आता है, जबकि देश में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 1,51,529 हो गई है. भारत में इस बीमारी से ठीक होने वाली की दर 96.51 प्रतिशत है, जबकि मृत्यु दर 1.44 प्रतिशत है.

एए/सीके (एएफपी, एपी, रॉयटर्स)

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