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आतंकी नेटवर्कों का लक्ष्य अब मुस्लिम महिलाएं

८ जुलाई २०११

इस सप्ताह जर्मन मीडिया में चर्चा रही पाकिस्तान के आतंकी कैंपों में जर्मनी की मुस्लिम महिलाओं की ट्रेनिंग की और भारत में मंदिर के तहखाने में अरबों की संपत्ति मिलने की.

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तस्वीर: AP

पहले तो सिर्फ मर्द ही पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर स्थित आतंकी कैंपों में जाते थे, अब अक्सर जर्मन औरतें भी अपने पतियों के साथ इन कैंपों में आतंकी ट्रेनिंग लेने के लिए जाने लगी हैं. ये युवा मुस्लिम महिलाएं आम तौर पर बिना पता चले कट्टरपंथ की ओर जा रही हैं, इंटरनेट की गोपनीयता के साये में. दैनिक डी वेल्ट का कहना है कि उनमें से बहुत कम ही फिर से सामान्य जीवन में वापस आ पाती हैं.

आतंकी नेटवर्क चलाने वालों ने महिलाओं को बहुत दिनों से लक्ष्य बना रखा है. अल कायदा की एक नई ऑनलाइन पत्रिका का नाम अल-शमीखा है. उसमें अनाम लेखिकाएं बताती हैं कि एक लड़ाके की बीबी होना कैसा लगता है, और जिहाद में उनका कर्तव्य क्या है. वजीरिस्तान से आने वाली ताजा रिपोर्टों से संदेह होता है कि जिहाद कॉलनियों में रहने वाली जर्मन मुस्लिम महिलाओं का बड़ा हिस्सा वापस लौटने के बारे में नहीं सोचता है. कुछ महिलाओं के परिजनों को संदेह है कि उन्हें जोर जबरदस्ती से रोका जा रहा है. अक्सर विदेशी इस्लामी कट्टरपंथियों से पासपोर्ट और पैसा ले लिया जाता है. जिहाद कैंपों से अकेले बाहर निकलने की उन्हें यूं भी इजाजत नहीं है. यहां तक कि वजीरिस्तान के इंटरनेट कैफे से वे माता-पिता या भाई बहनों को व्यक्तिगत तौर पर ईमेल भी नहीं भेजतीं.

Flash-Galerie Spuren des Terrors
तस्वीर: AP

कराची के एक कचराखाने में हाजी जलालुद्दीन कूड़ा अलग अलग करवाते हैं, उसके बाद उसे पख्तून खरीद लेते हैं और चीन ले जाते हैं. पहनी हुई चप्पल हो, इस्तेमाल बैटरी या कम्प्यूटर के पुर्जे, उनके कर्मचारी कूड़े में से उन्हें अलग अलग करते हैं. फ्रांकफुर्टर अलगेमाइने त्साइटुंग का कहना है कि जलालुद्दीन उन्हें बहुत कम मजदूरी देता है. 50 साल से कराची में डॉक्टर और नन का काम करने वाली रूथ फाऊ कचरा अलग करने वालों के लिए कचरे के व्यापार में काफी संभावनाएं देखती हैं. अखबार लिखता है

उनका विचार है कि जलालुद्दीन के बदले कचरा इकट्ठा करने वालों को भविष्य में चीन के साथ कारोबार में कमाना चाहिए. उनके मन में उस चिट्ठी का खाका है जो रूथ फाऊ कैथोलिक राहत संगठन मिजेरेओर को लिखकर कूड़ा अलग करने और रिसाइक्लिंग में मदद के लिए कहना चाहती हैं. मदर टेरेसा के विपरीत रूथ फाऊ अपने काम और वेटिकन के सिद्धांतों के बीच साफ लाइन खींचने में संकोच नहीं करतीं. गडाप के अपने हेल्थ सेंटर में चिकित्सक फाऊ कहती हैं, "हिज एक्सेलेंसी पोप निश्चित ही धार्मिक मामलों में मुझसे बहुत ज्यादा ज्ञान रखते हैं, लेकिन मेरे काम से संबंधित बातों में वे हस्तक्षेप नहीं कर सकते." गडाप में रूथ फाऊ की नई पहल में इस स्वतंत्रता को कतई समर्थन नहीं मिल रहा. ऐसा लगता है कि जर्मन नन के खिलाफ रोम के रूढ़िवादी विचारों और कराची के अफगानों के सांस्कृतिक और धार्मिक संदेहों का जैसे कि नापाक गठबंधन बन गया हो.

मंगलवार को एक आम हड़ताल ने भारत के दक्षिणी महानगर हैदराबाद में जनजीवन को ठप्प कर दिया. स्कूल, कॉलेज, दुकानें और दफ्तर सब बंद रहे और सड़कों पर इक्का दुक्का गाड़ियां दिखीं. नौए ज्यूरिषर त्साइटुंग ने लिखा है कि 48 घंटे की आम हड़ताल तेलंगाना राष्ट्र समिति ने बुलाई थी.

तथाकथित समिति राजनैतिक पार्टी है जो आंध्र प्रदेश से उत्तरी तेलंगाना क्षेत्र के विभाजन की मांग कर रही है. तेलंगाना की मांग करने वाले कार्यकर्ताओं की शिकायत है कि इलाके के साथ आर्थिक भेदभाव हो रहा है. इस क्षेत्र को स्वतंत्र राज्य बनाने की मांग नई नहीं है. 1956 में आंध्र प्रदेश की स्थापना के बाद से ही विरोध होते रहे हैं. 1969 में सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में 400 लोगों की जानें गईं. तेलंगाना राज्य बनाने के लिए ताजा आंदोलन 2009 के अंत में शुरू हुआ है. उस समय टीआरएस के संस्थापक भूख हड़ताल पर चले गए थे और केंद्र सरकार से तेलंगाना के विभाजन की जांच करने का आश्वासन पाया था. पिछले साल विभाजन समर्थकों और विरोधियों के बीच कई बार झड़पें हुईं. विवाद अब और गहरा हो गया है. इस सप्ताह तेलंगाना क्षेत्र के 81 जन प्रतिनिधियों ने विधान सभा से इस्तीफा दे दिया है, कुछ सांसदों ने संसद की सदस्यता भी छोड़ दी है.

सोना, हीरे, जवाहरात और सिक्के - दक्षिण भारत में एक मंदिर के तहखाने में अधिकारियों को अकूत संपत्ति मिली है. ऐतिहासिक धरोहरों की कीमत कई अरब यूरो आंकी जा रही है, जबकि अंतिम तहखाना अभी खोला भी नहीं गया है. बर्लिन का दैनिक टागेस्श्पीगेल लिखता है

NO FLASH Indien Schatzfund im Hindu Tempel
तस्वीर: dapd

भारतीय मीडिया ने रिपोर्ट दी है कि बोरों में भर कर वहां 500 किलो से अधिक सोने के सिक्के, इसके अलावा हीरे, पन्ने और जवाहरात जमा हैं, सोने और चांदी की हजारों कीमती मालाएं और कीमती पत्थरों से सजी सोने की मूर्तियां. अकेले एक सोने की माला के छह मीटर लंबा होने की बात है. यदि ये रिपोर्टें सही हैं तो श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर भारत का सबसे धनी मंदिर बन जाएगा. भारतीय प्रदेश आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर जैसे मंदिरों ने, जिसे देश का सबसे समृद्ध मंदिर माना जाता है, अपने श्रद्धालुओं के चंदों से संपत्ति जमा की है.

अभी भी स्पष्ट नहीं है यह संपत्ति किसने तहखाने में छुपाई और क्यों. दैनिक डी वेल्ट का कहना है कि कई संभावनाओं की चर्चा हो रही है.

एक विचार यह है कि ट्रावनकोर के राजवंश ने अपनी संपत्ति भगवान विष्णु को सौंप दी. सिर्फ इसलिए कि उनका विश्वास था कि वे भगवान विष्णु के वंशज हैं. दूसरा अधार्मिक तर्क है कि ट्रावनकोर के राजाओं ने अपनी संपत्ति इसलिए छुपाई कि बुरे समय में उसका इस्तेमाल कर सकें. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार यह भी संभव है कि महाराजा अपनी संपत्ति ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों से छुपाना चाहते थे, जो अपने उपनिवेशों का सोना जब्त कर लेते थे.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस चिंतित है. उसे डर है कि चोर और लुटेरे भी ट्रावनकोर की संपत्ति की खोज में निकल सकते हैं. उसने तहखाने की सुरक्षा के लिए कैमरे और अलार्म सिस्टम लगा दिया है. संपत्ति किसकी है, अब इस पर विवाद हो रहा है. ट्रावनकोर के महाराजा के वंशजों ने सरकार द्वारा मंदिर के अधिग्रहण का विरोध किया है.

संकलन: अना लेहमान/मझा

संपादन: आभा एम

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