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कैबिनेट बैठक करने जाएंगे एवरेस्ट

२ नवम्बर २००९

नेपाल सरकार एवरेस्ट पर कैबिनेट बैठक करके दुनिया भर का ध्यान ग्लोबल वॉर्मिंग से हिमालय पर्वत को होने वाले नुकसान की ओर खींचना चाहती है.

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माउंड एवरेस्टतस्वीर: DW/Nestler

एवरेस्ट की ऊंचाई पर जल्द होने वाली है दुनिया की पहली कैबिनेट बैठक. नेपाल सरकार ऐसा करके दुनिया भर का ध्यान ग्लोबल वॉर्मिंग से हिमालय पर्वत को होने वाले नुकसान की ओर खींचना चाहती है. नेपाली विदेश मंत्री दीपक बोहरा के अनुसार कैबिनेट के सभी मंत्री पांच हज़ार तीन सौ साठ मीटर की ऊंचाई पर बने एवेरेस्ट बेस कैंप में नवंबर में मिलेंगे.

ये घोषणा ठीक उस समय की गयी जब पूरी दुनिया की नज़रें 7 से 18 दिसंबर को कोपनहोगन में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण संबंधी शिखर वार्ता पर है. बोहरा कहते है, "हिमालय के ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं जो एक बहुत बड़ा चिंता का विषय बन गया है, और हम कोपनहेगन के सम्मेलन से पहले दुनिया भर का ध्यान इस ओर खींचना चाहते हैं."

बोहरा का यह भी मानना है कि एवेरेस्ट पर होने वाली इस कैबिनेट बैठक से मंत्रियों को हिमालय की बिगड़ती हालत को पास से देखने का अवसर मिलेगा. बोहरा के अनुसार नेपाल सरकार अपा शेरपा के उन पर्वतारोहियों को भी कोपनहेगन ले जाने पर विचार कर रही है, जो 19 बार एवरेस्ट पर चढ़ चुकी है, ताकि वो अपने अनुभव और हिमालय के पर्यावरण में देखे गए बदलावों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा कर पाएं. करीब एक अरब तीस करोड़ लोग पानी से जुड़ी ज़रूरतों के लिए हिमालय के ग्लेशियर से पिघलने वाली बर्फ़ पर निर्भर करते हैं. लेकिन जिस तेज़ी से ये बर्फ़ पिघल रही है उससे पहले बाढ़ और फिर सूखे का बड़ा खतरा मंडराने लगा है. जानकारों का मानना है कि जहां ग्लोबल वॉर्मिंग का निचले क्षेत्रों जैसे माल्दीव और बांग्लादेश पर होने वाले असर को दुनिया समझती है, वहीं हिमालय को हो रहे नुकसान के बारे में लोगों को ज़्यादा जानकारी नहीं दी जा रही है.

रिपोर्टः एजेंसियां/तनुश्री सचदेव

संपादनः ए कुमार