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क्यों तटों पर फंस रही हैं व्हेल मछलियां

११ जून २०११

भारत के तटीय इलाकों में व्हेल मछलियों के फंसने और मौत के मामले बढ़ गए हैं. केरल के तटीय इलाकों में ही पिछले कुछ महीनों में दर्जनों मरी हुई व्हेल मछलियां मिली हैं. कारणों का अब तक पता नहीं चल पा रहा है.

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तस्वीर: DPA

दक्षिण भारतीय राज्य केरल के तटों में व्हेलों के फंसने और मरने की वजह से चिंता बढ़ने लगी है. केरल यूनिवर्सिटी के एक्वाटिक बायोलॉजी एंड फिशरी डिपॉर्टमेंट के हेड ए बिजु कुमार कहते हैं, "कई ऐसे मामले सामने आए हैं जब जख्मी व्हेल तटों पर आई हैं. हो सकता है कि चोटें बड़े और तेज जहाजों की वजह से लग रही हों." इसी साल दुनिया भर में अब तक 410 से ज्यादा व्हेल मछलियां तटों पर निढाल ढंग से पड़ी मिल चुकी हैं.

वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत भारत में व्हेल का शिकार करने पर पाबंदी है. कानून के चलते अब तक भारत की समुद्री सीमा को व्हेल मछलियों के लिए सुरक्षित माना जाता रहा है. हालांकि जहाजों से होने वाला ध्वनि और जल प्रदूषण भारत की समुद्री सीमा में भी होता है. लेकिन वैज्ञानिक इसे व्हेल मछलियों की मौत से जोड़कर नहीं देखते हैं.

केरल के तट पर 2010-11 में फंसी चार जिंदा व्हेल मछलियां ब्रिडे प्रजाति की थीं. ब्रिडे व्हेल भारतीय समुद्र में पाई जाने वाली व्हेल की एक आम प्रजाति है. रिकॉर्डों के आधार पर भारत के हिस्से वाले हिंद महासागर में इस वक्त 1800 से 2000 स्तनपायी जीव हैं.

व्हेल की कई प्रजातियां मसलन डॉल्फिन और सी काउ भारत में लुप्त होने के कगार पर हैं. वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट भी इनकी संख्या बढा़ने में खासा सफल नहीं हुआ है. अधिकारियों के मुताबिक बड़ी मछलियों के दुश्मन आम मछुआरे भी हैं. मछुआरों की दलील है कि व्हेल प्रजाति की मछलियां उनके जालों को नुकसान पहुंचाती हैं, जिसकी वजह से वे मछली नहीं पकड़ पाते. व्हेल को जाल से दूर करने के लिए मछुआरे अक्सर बड़ी मछलियों पर बरछे या नुकीले औजारों से वार करते हैं.

रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह

संपादन: महेश झा

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