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जूते का जवाब जूते से

२ दिसम्बर २००९

जॉर्ज बुश पर जूता फेंकने वाले इराक़ी पत्रकार मुंतज़र अल ज़ैदी को भी ठीक वैसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा, जब पेरिस में उन पर इराक़ के ही एक शख़्स ने जूता फेंक दिया. लेकिन बुश की तरह ज़ैदी भी साफ़ बच गए.

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ज़ैदी पर जूता फेंका गयातस्वीर: AP

साल भर के अंदर मुंतज़र अल ज़ैदी को वैसी ही हालत का सामना करना पड़ा, जैसा पिछले साल इराक़ की राजधानी बग़दाद में हुआ था. ज़ैदी जब फ्रांस की राजधानी पेरिस में पत्रकारों से बात कर रहे थे, तो उन पर जूता फेंका गया.

जूता फेंकने वाले ने ख़ुद को इराक़ का एक पत्रकार बताया था और कहा था कि वह फ्रांस में शरण लिए हुए है. उसने ज़ैदी पर जूता फेंकते हुए कहा, "लो, तुम्हारे लिए यह भी एक जूता है."

उसने जूता फेंकने से पहले इराक़ी लहजे में और अरबी भाषा में कुछ देर तक कुछ कहा और अचानक अपना जूता ज़ैदी की तरफ़ पूरी ताक़त से उछाल दिया. जूता सीधे ज़ैदी के सिर को निशाना बना कर फेंका गया था, लेकिन ज़ैदी ऐन मौक़े पर झुक गए और जूते का वार ख़ाली चला गया. ज़ैदी ने जब पिछले साल बुश पर जूते फेंके थे, तो बुश भी डाइव मार कर बच गए थे.

Journalist bewirft US Präsident Bush mit Schuh
ज़ैदी ने बुश पर जूता फेंका, बुश ने डक कियातस्वीर: AP

पेरिस में हुई इस घटना के बाद ज़ैदी के भाई ने जूता फेंकने वाले को पकड़ लिया और उसे थप्पड़ रसीद कर दिया. इसके बाद उसे आयोजन स्थल से बाहर कर दिया गया. इसके बाद ज़ैदी की प्रेस कांफ्रेंस चलती रही. यह कार्यक्रम अरब प्रेस की तरफ़ से आयोजित किया गया था.

ज़ैदी ने इस घटना पर अफ़सोस जताया. उन्होंने कहा, "जब मैंने जूता फेंका था, तो वह इराक़ पर अमेरिकी कब्ज़े के विरोध में था. लेकिन मैंने अपने ही देश के किसी शख़्स पर जूता नहीं फेंका था."

पिछले साल 14 दिसंबर को इराक़ी पत्रकार ज़ैदी ने उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर भरी प्रेस कांफ्रेंस में अपने दोनों जूते फेंके थे. इसके बाद उन्हें गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया गया. लेकिन वह अरब देशों में हीरो भी बन गए. वह अरब देशों में विरोध के प्रतीक बन गए और कई देशों की लड़कियों ने खुलेआम उनके पास शादी का प्रस्ताव भेजा.

शिया समुदाय से ताल्लुक़ रखने वाले लगभग 30 साल के मुंतज़र अल ज़ैदी को नौ महीने तक जेल में रहना पड़ा. इसके बाद उनकी रिहाई हो गई और बाद में उनकी कंपनी ने उन्हें इराक़ से बाहर भेज दिया.

पेरिस में ज़ैदी ने बताया कि वह जेनेवा में अपना इलाज करा रहे हैं. उनका कहना है कि क़ैद के दौरान यातना में उनका दांत टूट गया है और पीठ में भी परेशानी हो रही है. उनका कहना है कि इलाज के बाद वह इराक़ लौटना चाहते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः महेश झा