खदान मजदूरों पर चलेगा मुकदमा

दक्षिण अफ्रीकी पुलिस ने कहा है कि बंद खानों से निकले बाइस खनिकों के खिलाफ गैरकानूनी खनन का मामला चलेगा. आशंका है कि गिरफ्तारी के डर से कई मजदूर अब भी खदान के अंदर मौजूद हैं.

दक्षिण अफ्रीकी प्रेस एसोसिएशन ने रिपोर्ट दी है कि गैरकानूनी खनन का काम कर रहे इन मजदूरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आपातकालीन कार्यकर्ताओं का कहना है कि जोहानेसबर्ग के पास खदान में काम कर रहे अन्य मजदूर गिरफ्तारी के डर से बाहर नहीं आ रहे. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक खदान में फंसे मजदूरों की आवाज सुनकर इलाके में गश्त लगा रही पुलिस को इस हादसे के बारे में पता चला. खदान के मुंह के पास पत्थरों के आ जाने से मजदूर फंस गए थे.

दक्षिण अफ्रीका में गैरकानूनी रूप से खनन के लिए जुर्माना समेत जेल की सजा का प्रावधान है. सोना और प्लैटिनम के प्रमुख उत्पादक दक्षिण अफ्रीका में गैरकानूनी खनन आम बात है. बचाव दल के मुताबिक खदान से निकाले गए सभी मजदूरों को पुलिस के हवाले कर दिया गया. बचाव दल के एक अधिकारी रॉजर ममाइला के मुताबिक, "हम 11 लोगों को निकालने में कामयाब रहे, हमें लगता है कि ये सभी दक्षिण अफ्रीकी हैं."

कीमती धातु के चक्कर में गैरकानूनी खनन करते हैं मजदूर

इलाज के बाद सभी लोगों को पुलिस के हवाले कर दिया गया. ममाइला ने कहा, "हां, ऐसी संभावना है कि खदान के अंदर और भी लोग फंसे हो सकते हैं. लेकिन हमें पता नहीं और हम बचाव दल को अंदर नहीं भेजने वाले." दक्षिणी अफ्रीकी पुलिस के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग खदान में ही मौजूद हैं और वे बाहर आने से इनकार कर रहे हैं. खदान में कितने लोग मौजूद है इस बारे में साफ साफ पता नहीं चल पाया है.

लालच में जान जोखिम

खदान के बाहरी हिस्से में फंसे 30 मजदूरों ने बचाव दल को बताया था कि गहराई में करीब 200 और लोग फंसे हुए हैं. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई. स्थानीय नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि 30 ही लोग फंसे हुए थे. पुलिस के मुताबिक बचाव अभियान 11 लोगों को निकाले जाने के दो घंटे बाद बंद कर दिया. ममाइला के मुताबिक, "अगर कोई वहां था और बाहर आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, उनके लिए हमने पत्थरों को हटाकर रास्ता बना दिया है. अब यह उन पर निर्भर करता है कि वे कब बाहर निकलते हैं."

जोखिम में जान

भारत में खनन उद्योग 200 साल पुराना है. कोयला खदानों में काम करने देश के दूसरे हिस्सों के अलावा नेपाल और बांग्लादेश के भी लोग आते हैं.

जोखिम में जान

पूर्वोत्तर भारत के मेघालय प्रांत में जमीन के भीतर 50 करोड़ टन कोयला मौजूद है. कई निजी कंपनियां भी यहां से कोयला निकालने का काम कर रही हैं.

जोखिम में जान

इन खदानों से आज भी पारंपरिक रूप से कोयला निकाला जाता है. सीढ़ी लगा कर मजदूर नीचे उतरते हैं और फिर पीठ पर कोयला ढो कर दो फीट ऊपर आते हैं.

जोखिम में जान

ये मजदूर खून पसीना बहा कर अपना पेट पालते हैं. सुरक्षा के आधुनिक इंतजाम नहीं होने के कारण यहां अक्सर दुर्घटनाएं भी होती हैं.

जोखिम में जान

अक्टूबर में मेघालय सरकार ने कहा कि पिछले छह सालों में बांग्लादेश से आए 20,000 लोगों की शिनाख्त की गयी है जो अवैध रूप से यहां काम कर रहे हैं.

जोखिम में जान

मेघालय के मुख्यमंत्री ने खनन नीति को सिरे से बदलने की सरकारी योजना की घोषणा की लेकिनं फिलहाल यह महज एक कागजी घोषणा है.

जोखिम में जान

जान जोखिम में डाल कर कोयला खदानों में काम करने की एक वजह यह भी है कि यहां मजदूरी कर लोग महीने के पांच से दस हजार रुपये कमा लेते हैं.

जोखिम में जान

दूर किसी गांव से घर बार छोड़ यहां काम करने आए किसी मजदूर से जब वजह पूछो, तो जवाब मिलता है, "भूखे मरने से तो जान जोखिम में डालना भला."

लेकिन पुलिस को शक है कि कुछ मजदूर पिछले 12 दिनों से खदान के भीतर थे. बहुत से मजदूर पूर्व खनिक हैं और उन्हें स्थानीय भूगोल की अच्छी समझ है. पुलिस का कहना है कि मजदूर कई किलोमीटर तक अंदर ही अंदर चलने और किसी और छोर से निकलने में माहिर हैं. गैरकानूनी ढंग से खनन के कारण कई बार दक्षिण अफ्रीका की खदानों में जानलेवा हादसे भी हो चुके हैं.

दक्षिण अफ्रीका दुनिया का छठा सबसे बड़ा सोने का उत्पादक है. सोने की लालच में कई बार मजदूर महीनों तक खदान में रह जाते हैं. साल 2012 में खदान से जुड़े हादसों में 112 लोगों की मौत हो गई.

एए/एमजे (एपी, एएफपी)

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